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Tuesday, 07 February, 2012
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रोमांटिक हूं ना
Saturday, July 17, 2010, 11:42 hrs IST
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आई हेट लव स्टोरीज में अपने हॉट व ट्रेंडी लुक के स्वाभाविक अभिनय से उन्होंने सभी के होश उड़ा दिए और जता दिया अपनी समकालीनों को कि वे कहीं नहीं जाने वाली...।
नई फिल्म आयशा से काफी आशाएं हैं उन्हें.. वो सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इंडोर्स में उनकी व्यस्तता बखूबी देखी जा सकती है। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विमॅन मैग्जीन्स के कवर पर छाई हुई हैं। बड़े-बड़े फोटोग्राफर उन्हें अपने कैमरे में कैद करने के लिए लालायित हैं। वाकई वो हिट-फ्लॉप से परे हैं...परदे पर न सही,
बाकी हर जगह वो सुपरहिट हैं। हाल ही मुंबई में रेखा खान की
सोनम से कई मुद्दों पर ढेर सारी बातें हुइंü..
बातचीत में उभरी सोनम कपूर की ताजा सच्ची तस्वीर...

खास है आयशा...
मेरी हालिया रिलीज आई हेट लव स्टोरीज को पसंद किया गया। किसी स्टार की जब एक फिल्म चलती है, तो उसके हौसले बुलंद होते हैं। जल्द ही रिलीज होने वाली फिल्म आयशा मेरे कॅरियर की एक ऎसी फिल्म है, जो मेरे लिए बेहद अहम है। यह न सिर्फ मेरे घर की फिल्म है, बल्कि यह मेरा अब तक का सबसे मनपसंद रोल है। आयशा की खूबी यह है कि इसमें पूरी टीम यंग है। मसलन फिल्म की प्रोड्यूसर मेरी बहन, निर्देशक राजश्री ओझा समेत फिल्म के दूसरे कलाकार इरा दुबे, लीजा हेडन, अभय देओल आदि... पूरी टीम यंग है, तो आप समझ ही गई होंगी कि इसमें कितनी पॉजिटिव एनर्जी लगी हुई है।
आयशा मिलाएगी जोडियां...
जैसा कि सभी जानते हैं कि आयशा एक ख्याति प्राप्त उपन्यास एम्पा पर आधारित है। दरअसल आयशा को जोडियां मिलाने में काफी रूचि है और जब भी वो किसी कुंवारी लड़की या लड़के को देखती है फौरन मैच मेकिंग शुरू कर देती है... हमारी इंडियन सोसाइटी में ये आम बात है। अगर किसी की शादी नहीं हो रही है, तो आप फौरन उसके लिए लड़का सुझाने लगते हैं। मैं इस रोल से काफी आइडेंटिफाई करती हूं। मैंने आयशा के रोल के लिए खास लुक अपनाया है ये रोल की डिमांड थी।
तू-तू,मैं-मैं...
अभय देओल ने शायद मजाक में कहा होगा कि सेट पर उनकी और मेरी बनती नहीं थी, जबकि सच तो यह है कि पूरी शूटिंग में हम होनों ही ऎसे थे, जिनके बीच कभी तू-तू, मैं-मैं तक नहीं हुई। हां, शूटिंग से पहले मैंने सुना था कि अभय काफी आर्टी-फार्टी (कलात्मक) टाइप हैं, मगर जब वे सेट पर आए, तो बेहद साधारण लगे मुझे। अरे, टिपिकल पंजू (पंजाबी) देओल हैं वे। उन्हें खाने का बेहद शौक है। उनके साथ काम करके बहुत मजा आया... उनकी व मेरी सोच काफी मिलती है। सेट पर वो मेरा बहुत खयाल रखते थे। मैं जल्द ही उनके साथ एक और फिल्म करने वाली हूं। अभय बिलकुल मेरे मिजाज के हैं, जबकि इमरान तो हॉटी है... हॉटी।
रिया की बॉसिंग...
है ना कमाल की बात... वैसे तो मैं अपनी निर्मात्री बहन रिया से डेढ़ साल बड़ी हूं और हमेशा मेरी ही बॉसिंग चलती थी, मगर सेट पर मेरी बॉस रिया रहती... आपको लगता होगा कि निर्मात्री बहन का मुझे बेहद फायदा हुआ होगा, तो ऎसा नहीं है, उलटा मुझे तो नुकसान उठाना पड़ा। शूटिंग के समय सबसे छोटा व बेकार मेकअप रूम मुझे दिया जाता... सबसे पहला कॉल टाइम मेरा होता और सबसे आखिर में मुझे छोड़ा जाता... वो भी बस इतना कहकर, तुम घर की हो, समझ सकती हो, मेरा मुंह बंद कर देती। आज कह सकती हूं कि मुझे रिया पर गर्व है। 23 साल की उम्र में उसने कमाल की फिल्म बनाई है।
हार्डवर्क और पेशेंस...
आयशा के दौरान डैड ने इमोशनल, मॉरल, फाइनेंशियल... हर तरह का सपोर्ट दिया है। हालांकि वे प्रोडक्शन के दौरान भारत में नहीं थे, मगर फोन पर हमेशा उपलब्ध थे। मुझसे हमेशा पूछा जाता है कि अनिल कपूर की बेटी होना कैसा लगता है? तो मैं यही कहूंगी कि मैं तो कल्पना भी नहीं कर सकती उनके बगैर। उनसे मैंने हार्डवर्क व पेशेंस सीखा... सबसे बड़ा मंत्र ये सीखा कि बुरे वक्त व नाकामी में कैसे आगे बढ़ना है। हां, उनसे एक्टिंग टिप्स भी लेती हूं। मुझे याद है कि सांवरिया के दौरान कुछ संवाद बोलने की शैली को लेकर मुझे समस्या थी, जब मैंने डैड से बात की, तो


उन्होंने मुझे घर की सीढिया बार-बार चढ़ने-उतरने को कहा और फिर डायलॉग बोलने की राय दी... वाकई सही तरीके से मैंने डायलॉग बोले। असल में मुझे हांफकर डायलॉग बोलने थे, जो मुझे नहीं आ रहा था। काम व अपनी भूमिकाओं के प्रति उनका पैशन कमाल का है।
स्टार बेटी हूं...
मैंने बचपन में कभी नहीं सोचा था कि मैं सिल्वर स्क्रीन की हीरोइन बनूंगी। मैं तो राइटर-डायरेक्टर बनना चाहती थी। कॉलेज में मैंने एक नाटक भी लिखा था। मैंने कई कविताएं व कहानियां लिखी हैं, मगर मैं लोनर कभी नहीं थी। स्कूल डेज में खूब बातूनी व शरारती थी। मेरी मॉम (सुनीता कपूर) हमेशा ग्लैमर से दूर रहीं और हम पर भी स्टाराना बच्चों के नखरे हावी नहीं होने दिए। डैड तो कभी काम को घर लाते नहीं थे। हम लोग आम बच्चों की तरह पले-बढे... उल्टा डैड इतने सख्त थे कि रात को फुटबॉल मैच हमें देखने की इजाजत नहीं थी। लिहाजा जब भी फुटबॉल वल्र्ड कप होता मैं, रिया और मेरा भाई चुपचाप लाइट बंद करके उनके सोने के बाद मैच देखते। उन्होंने हमेशा अनुशासन भरी जिंदगी को जिया है। एक अरसे तक हमें अहसास ही नहीं हुआ कि हम स्टार अनिल कपूर के बच्चे हैं, क्योंकि हमने उनकी शूटिंग कभी अटेंट नहीं की...। एक बार जब वे हमारे स्कूल के सालाना जलसे में आए, तो उनके प्रति बच्चों व टीचर्स का के्रज देखकर हम हैरान रह गए, तब हमें लगा कि हम स्टार की बेटी हैं।
टर्निग पॉइंट...
ये सच है कि पूरे दो साल मैं सिंगापुर के युनाइटेड वल्र्ड कॉलेज में शेक्सपियर के नाटकों में खोयी रही, फिर मैं आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चली गई। जब भारत लौटी, तो 85 किलो की हो चुकी थी। मैं संजय लीला भंसाली से मिलने गई, क्योंकि मैं उनकी असिस्टेंट बनना चाहती थी। मैंने फेब इंडिया का कॉटन का कुर्ता पहना था... आइब्रो तक नहीं की थी... ऎसे में संजय सर ने जब कहा कि वे मुझे हीरोइन बनाना चाहते हैं, तो लगा वो मेरा मजाक उड़ा रहे हैं, मगर वे गंभीर थे। बस, उसी के बाद मेरी किस्मत बदल गई... मैं सांवरिया की हीरोइन बन गई।
मेरे सपनों का राजकुमार लम्बा, हैंडसम और सांवले रंग का होगा। वह दिखने में हीरो की तरह होगा, मगर उसमें ढेरों बुराइयां होंगी, जिन्हें वह मेरी खातिर छोड़ देगा। ऎसा मैं चाहती हूं।

मैंने अपने पुरूष मित्रों से वादा किया है कि 30 की होने पर अगर मैंने ब्याह नहीं रचाया और उन्होंने भी शादी नहीं की, तो मैं उनसे शादी कर लूंगी। हम साथ में रहेंगे, लेकिन बैडरूम अलग-अलग होंगे।

पापा का कहना है, अगर तुम्हें ऎसा व्यक्ति मिल जाए, जो मुझसे बेहतर इनसान हो, अच्छा दिखता हो, बहुत पैसे वाला हो और तुमसे ज्यादा फेमस हो, तो तुम उससे शादी कर सकती हो। अब मैं
ऎसे इनसान को कहां से लाऊं? पापा ने तो मेरे सारे चांस खत्म कर दिए।

हर दूसरे दिन मम्मी कहती हैं, यह बहुत अच्छा लड़का है मेरे खयाल से तुम्हें इससे मिलना चाहिए। तब मैं कहती हूं- आपकी अपनी तो अच्छी-सी एक लव स्टोरी है, क्या मेरी नहीं होनी चाहिए...पर मम्मी को लगता है कि पुरूषों के मामले में मेरी चॉइस बहुत खराब है।

कभी किसी एक्टर के साथ डेटिंग नहीं करूंगी, ये तो पापा के साथ डेटिंग करने जैसा होगा। हम दोनों में से कोई एक ही इस प्रोफेशन से जुड़ा होगा, क्योंकि इसमें बहुत समय देना होता है।
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