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Saturday, 20 December, 2014
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हिट फिट ग्लैमरस मॉम
Sunday, May 12, 2013, 11:17 hrs IST
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shilpa-SHETTY
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ये समर्पित प्रोफेशनल, बेटी, बहन और पत्नी रही हैं। आज इन सबसे बढ़कर ये समर्पित मां हैं। काम, घर और बच्चे की जिम्मेदारी को बखूबी पूरा कर रही हैं शिल्पा। इन सबके बीच इन्होंने खुद को गुम नहीं होने दिया। इनकी अदा, मोहक मुस्कान और शोखी, सब आज भी तरोताकाा है। आखिर कैसे संभाल रही हैं शिल्पा यह सब? जानते हैं उन्हीं के शब्दों में...

मैं और मेरी मां...
प्रेग्नेंसी के बाद 22 किलो वजन घटाकर शिल्पा अपनी मॉडल-एक्ट्रैस शेप में वापसी कर चुकी हैं। इनके शब्दों में जानें तो ये कहती हैं, "डिलेवरी के बाद मैं बेबी एलीफेंट लगने लगी थी। मैं पहले ही समझ रही थी कि 35 की उम्र में डिलेवरी और फिर शेप-अप होना इतना आसान नहीं होगा। इस स्टेज से जुड़ी जितनी जानकारी मेरी मॉम (सुनंदा शेट्टी) रखती हैं, यह उस सबसे कहीं अधिक होगा। मेरी डिलेवरी के पांच माह बाद मॉम ही पहली शख्स रहीं, जिन्होंने मेरे बढ़े हुए साइज के लिए मुझे टोकना शुरू कर दिया।

वह कहतीं,"तेरे जन्म के छह माह के बाद ही मैं अपनी फिगर में लौट आई थी।" इस पर मैं उन्हें कहती, "मां जब मैं पैदा हुई थी, उस वक्त आप 23 साल की थीं। आपकी और मेरी डिलेवरी की उम्र का अंतर तो देखिए।" (हंसती हैं)। शिल्पा की मॉम अपनी बात रखती हैं, "हम साड़ी पहनते थे। डिलेवरी के बाद कमर पर टाइट बंधी हुई साड़ी और ऊपर लूज गारमेंट। यह पहनावा सच में मैजिक करता था हमें फिट बनाने के लिए। फिर हम घर के काम और बच्चे की देखभाल में इतने व्यस्त रहते थे कि जिम से ज्यादा पसीना घर में ही बह जाता था। यह सब समय रहते टमी को फ्लैट करने में सहायक होता था।"

उन दिनों की बात...
शिल्पा अपनी बात शुरू करती हैं, "प्रेग्नेंसी के समय मेरा वजन 83 किलो था। वियान के बर्थ के तुरंत बाद मुझे महसूस हुआ, जैसे मैंने 90 प्रतिशत वेट लूज कर लिया हो। लेकिन मेरा यह अनुमान पूरी तरह गलत था। केवल 30 प्रतिशत ही वेट कम हुआ था मेरा और बाकी 70 प्रतिशत के लिए मुझे मशक्कत करनी थी। इसके बाद पहले पांच माह जब वियान न्यू बोर्न बेबी था मैंने दो किलो वेट और गेन कर लिया।

दरअसल उस समय मैं बस खाती ही रहती थी। वियान को ब्रेस्ट फीडिंग कराती, उसकी देख-रेख में रहती थी और मेरे पास खुद के लिए समय ही नहीं था उन दिनों। डिलेवरी के बाद अक्सर मां की डाइट में एक और चीज शामिल हो जाती है वह है पंजीरी। यह घी और ड्राय फ्रूट्स से बनी होती है। इसे गर्म करके सुबह जल्दी खाना होता है। मेरे हसबैंड रोज सुबह 6 बजे उठकर इसे गर्म करके लाते और बहुत प्यार से मुझे खिलाते। इस दौरान कुछ स्पून वह भी खाते, इसलिए कुछ किलो वजन तो उनका भी बढ़ा होगा...। (हंसती हैं)

मोटापे का अहसास...
मैं अपने मातृत्व से बाहर ही नहीं आ पा रही थी। पूरा समय वियान के साथ ही बीतता। अचानक एक ऎसा पल आया, जब मैं स्तब्ध रह गई। पांच माह का होने पर जब वियान ने पहली बार टुडलिंग (घुटनों के बल चलना) की, तो मैं उसे पकड़ना चाहती थी। जैसे ही उसे पकड़ने के लिए मैं झुकी, मुझे मसल्स में बहुत तनाव महसूस हुआ। झुक ही नहीं पा रही थी। मैं जैसे सहम गई थी। कुछ समझ ही नहीं पा रही थी। उस पल मुझे अहसास हुआ कि मेरी मसल्स अब उतनी स्ट्रॉन्ग नहीं है और फैट वाकई बहुत बढ़ गया है।

तभी से वजन कम करने का इतना जबरदस्त प्रेशर दिमाग पर पड़ा कि इसके अलावा जैसे कोई टारगेट ही नहीं रह गया। मेरे दिमाग में मेरी फिटनेट आइकॉन वाली इमेज आती। गाने के बोल याद आते- शिल्पा सा फिगर, बेबो सी अदा...आदि। लोग मेरे पीठ पीछे व्यंग्य किया करते, "अब आओ उस शेप में, तो जानें"। कई बार लोग कुछ बातों को लेकर बहुत घटिया हो जाते हैं। उनका लक्ष्य कोई ऎसी बात ढूंढ़ना होता है, जिस पर वह दूसरे पर तंज कर सकें। पता नहीं यह क्यों भूल जाते हैं कि स्टार्स भी होते तो इंसान ही हैं ना।

नॉनवेज से दूर रही...
नच बलिए मेरा पहला स्क्रीन शो रहा, मां बनने के बाद। इसने वापस शेप में आने के लिए एक समय सीमा में बांध दिया। मैंने 78 किलो से अपना मिशन शुरू किया और साढ़े तीन माह में 60 किलो पर आ गई। मुझे मटन बिरयानी और एग फ्राइड राइज बहुत पसंद है, लेकिन मेरी प्रेग्नेंसी से लेकर डिलेवरी तक मैंने नॉनवेज को हाथ नहीं लगाया। अब तक मैं नॉनवेज से दूर रही। हां, 21 मई को वियान का पहला जन्मदिन है, तब मैं चिकन टेस्ट कर सकती हूं।

मेरा बेटा वियान...
मुझे इस बात पर बहुत आश्चर्य होता है कि कैसे एक बच्चा समझ जाता है कि कौन उसे प्यार करता है और कौन नहीं या कई बार कुछ चीजें उसके अपने मूड पर निर्भर करती हैं। कुछ लोग ऎसे भी मिलते हैं, जिनसे वियान पहले कभी नहीं मिला, लेकिन तुरंत उनकी गोद में चला जाता है। वहीं कुछ लोग ऎसे भी हैं, जिन्हें वह काफी समय से जानता है, लेकिन उनके पास नहीं जाता।

वियान के लिए राज कहते हैं, "ही इÊा अ लेडीÊा मैन... इसे महिलाएं पसंद हैं"। दरअसल वियान महिलाओं के पास जल्दी चला जाता है। कई बार कहने पर भी किसी की गोद में नहीं जाता है और कभी एक बार में चला जाता है। उसकी इस इच्छा पर मेरा कोई कंट्रोल नहीं। शुरू में उसे पब्लिक अपीयरेंस में लाने में मुझे हिचक हुई। दरअसल मैं चाहती थी कि पहले यह एक साल का हो जाए। फिर लगा जल्दी या देर से कभी तो लोग देखेंगे ही।

मैं वियान को इसके फर्स्ट मैंच के लिए जयपुर लाना चाहती थी। प्लेयर्स, स्टाफ हर कोई इससे मिलना चाहता था, इसलिए मैं नाइट मैच में इसे लेकर आई। जब सुहाना मौसम था और तापमान 26 डिग्री था। वियान ने सब एंजॉय किया। इतने सारे लोग, खुशी से चिल्लाते हुए, एक्साइटेड होते हुए... यह सब इसके लिए काफी लुभावना था। मैच के दौरान घटी कुछ घटनाओं को लेकर मुझसे कहा गया कि ऎसे में बच्चे को साथ रखना ठीक नहीं। मेरा विश्वास है कि अगर आपका दिल और आत्मा पवित्र है और आप सकारात्मक सोच के इंसान हैं, तो आपका बच्चा आपकी इन खूबियों को आपसे सोख लेता है। बतौर पत्नी मैं हमेशा अपने पति के सपोर्ट में खड़ी रहती हूं। अगर कुछ होता भी है, तो इससे मेरा बच्चा सीखेगा कि बहादुर कैसे बना जाता है।
-साभार: हेलो



फिल्म्स से इनका रिश्ता बहुत लम्बा नहीं रहा। बावजूद इसके कम समय में ही ये बॉलीवुड में अपनी पहचान और जगह दोनों कायम करने में सफल रहीं। ओम जय जगदीश, मस्ती, पेज थ्री, खोसला का घोसला और मुम्बई कटिंग आदि इनकी उल्लेखनीय फिल्म्स हैं। स्टारडम हासिल कर जल्दी ही शादी कर घर भी बसा लिया। आज ये फिल्म निर्माता की पत्नी होने के साथ ही दो बच्चों की मां हैं, टीवी शो होस्ट हैं। इन सबसे पहले एनर्जेटिक और बेहतरीन इंसान हैं। ये हैं तारा शर्मा, जिनसे एफएम ने जानी एक मां की कुछ खास बातें...

तीन शब्द, जो बतौर मां आपको परिभाçष्ात करते हों?
व्यवहारशील, खुशमिजाज और निश्चित तौर पर काम करने वाली।

कोई ऎसा पैरेंटिंग रूल, जिसे आपने कभी नहीं तोड़ा?
दरअसल ऎसा होना बहुत कठिन है। मेरा मानना है कि पैरेन्ट्स होने पर आप लगातार कुछ नया डिस्कवर करते रहते हो। हर रोज बदलते और बड़े होते हैं आप। इसलिए कुछ खास बातें हैं, जिन पर मैं और मेरे हसबैंड (प्रोड्यूसर रूपक सलूजा) विशेष्ा ध्यान देते हैं। मुझे नहीं लगता ऎसा कोई निश्चित नियम है। यह तो एक सहज प्रक्रिया है, जो आपके साथ विकसित होती रहती है।

ऎसा पैरेंटिंग रूल, जिसे अक्सर तोड़ती हैं?
हमारे शो (तारा शर्मा"ज शो) में एक चाइल्ड साइकाइट्रिस्ट रहती थीं, जिन्होंने सेट रूटीन के फायदे बताए। मेरे बेटे जेन (4) और काई (2) निश्चित समय पर उठते हैं, नाश्ता करते हैं, स्कूल जाते हैं, लौटकर समय पर लंच करते हैं, होमवर्क करते हैं और फिर उनका प्ले टाइम। रूल टूटने की नौबत तब आती है, जब उन्हें कुछ ज्यादा देर टीवी देखने की इजाकात दी जाती है।

बच्चों को पढ़ाती हैं आप?
हां, हर समय। उन्हें कहानी सुनना पसंद है। हम लकी हैं कि हमारे पास डैड के लिखे कंटेन्ट मौजूद हैं।(तारा के पिता प्रताप शर्मा चाइल्ड ऑथर और प्ले राइटर थे)

खुद को फिट कैसे रखती हैं?
मेरे पास चाहे 15-20 मिनट ही क्यों न हों मुझे जहां मौका मिलता है, चाहे गार्डन हो, चाहे जिम हो या चाहे रेस कोर्स हो... मैं दौड़ती जरूर हूं। पिछले 10 साल से मैं लगातार योग कर रही हूं। यही मुझे शेप में बनाए रखता है। जब आप लंबे समय तक एक्सरसाइज करते रहते हैं, तो मेटाबॉलिज्म अच्छा हो जाता है। इसलिए मुझे अपने वेट को लेकर कोई समस्या नहीं है।

दिन का सबसे अच्छा पल?
मेरे खयाल से पूरा दिन अच्छी तरह बीत जाने के बाद वह समय, जब परिवार साथ होता है। रूपक काम से वापस आ जाते हैं और बच्चे सोने की तैयारी में होते हैं। सबके चेहरे पर संतोष्ाभरी मुस्कान होती है।

पांच चीजें जो हमेशा फ्रिज में रहती हैं?
पानी, ताजे $फ ल, सब्जियां, स्वीट्स और बेशक कुछ जंक फूड। हालांकि मैं हमेशा परिवार की डाइट को हैल्दी ही रखती हूं। कोशिश करती हूं कि ज्यादा से ज्यादा चीजें वही खाई जाएं, जो घर पर बनी हों।

आप और आपके हसबैंड नाइट पार्टी"ज अटेंड करते हैं?
प्राथमिकता बच्चे ही रहते हैं। स्थिति पर निर्भर करता है। जब आप बच्चों की जिम्मेदारी लेते हैं, तो पूरी तरह तैयार रहना होता है। हमने पार्टी"ज और नाइट आउट्स को पहले ही बहुत एंजॉय किया। अब बच्चों को समय देना ज्यादा जरूरी है। हम दोनों को ही घर लौटकर बच्चों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है। हम उन लोगों में से नहीं हैं, जिन्हें सैडरडे आते ही लगता है कि ओह माय गॉड अब कुछ अलग करना ही चाहिए।

पैरेंट्स से सीखी हुई बातें आज कितना काम आती हैं?
बहुत अधिक। आज मैं जो कुछ भी हूं, वह उनकी बदौलत ही हूं। खासकर पापा के कारण। वह कंटेंट क्रिएटर रहे। इसी की बदौलत मैं खुद का बोस होने के महत्व को समझी हूं। अपने शो के दौरान भी उनकी सीख बहुत काम आई। पापा कहते थे कि हमें लगातार खुद को खोजते रहना चाहिए। बच्चे होने के बाद एक्ट्रैस के बारे में अक्सर लोग कहते हैं, अच्छा अब बच्चे हो गए हैं, तो कोई काम नहीं मिल रहा होगा। मैंने ऎसा कभी नहीं कहा कि मेरे पास फिल्म्स नहीं हैं या काम का कोई ऑफर नहीं है। मैंने यह सब क्रिएट किया।

व्यस्त दिनचर्या में एनर्जी लेवल कैसे बनाए रखती हैं?
बच्चे अपने आप में एनर्जी बूस्टर होते हैं। वैसे मैं शुरू से ही एक्टिव रही हूं। मैं उन लोगों में से हूं, जिन्हें बिकाी रहना पसंद है।

साभार: गुड हाउसकीपिंग
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