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Tuesday, 07 February, 2012
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चार पतियों की खूनी पत्नी
Saturday, July 03, 2010, 11:44 hrs IST
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इधर स्टारडम की दौड़ में दो तारिकाओं को बहुत अहम माना जा रहा है। "राजनीति" की सफलता के बाद जहां कैटरीना के अभिनय की जमीन बहुत पुख्ता हुई है, वहीं प्रियंका भी कम नहीं है। कोई बड़ी हिट दिए बिना भी वो सफलता के रथ पर सवार हैं। ढेरों नई फिल्मों के ऑफर उनके पास आ रहे हैं, ढेरों ऑफर वो वापस कर रही हैं। कह सकते हैं कि अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा कई फिल्मी योजनाकारों की बड़ी पसंद हैं। इसमें "फैशन" के लिए मिले राष्ट्रीय सम्मान ने बहुत बड़े प्लस पॉइंट का काम किया है। यह भी कारण है कि आज मनचाही शर्त पर अपनी मनपसंद फिल्में चुनने के लिए वो स्वतंत्र हैं। निश्चित तौर पर उनके कॅरियर का यह सुनहरा दौर है। वो अच्छी तरह से जानती हैं कि कुछेक गलत फिल्मों का चयन उन्हें फिर से स्टारडम की दौड़ में बहुत पीछे धकेल सकता है। प्रियंका अब इस बात को अच्छी तरह से समझ गई हैं कि "प्यार इम्पॉसिबल" जैसी फिल्मों से उन्हें पैसा तो मिल सकता है, पर प्रसिद्धि नहीं। शायद इसलिए अपनी फिल्मों को लेकर वो पहले की तुलना में और ज्यादा सतर्क हो गई हैं, जिसके चलते विशाल भारद्वाज की फिल्म "सात खून माफ" की शूटिंग शुरू करने से पहले उन्होंने इसकी स्क्रिप्ट में काफी परिवर्तन करवाया। सिद्धार्थ आनंद की "अनजाना-अनजानी" के बाद अब उनकी यह फिल्म भी लगभग पूरी हो चुकी है। एक ताजा मुलाकात के दौरान आत्मविश्वास से भरा उनका स्वर होता है,"मुझे अब दो नावों की सवारी करनी पड़ रही है। मुझे ग्लैमर और एक्टिंग दोनों को साथ लेकर चलना पड़ रहा है।" ऎसे में यह सहज जिज्ञासा पैदा होती है कि उनकी इस नई नीति में विशाल भारद्वाज की यह फिल्म कितनी कारगर साबित होगी ? उनका जवाब होता है,"बहुत ज्यादा....क्योंकि इसमें मेरा मेन कैरेक्टर है। सात पुरूष्ा पात्र हंै, लेकिन फीमेल कैरेक्टर एकमात्र मैं ही हूं। सारे मेल कैरेक्टर मेरे साथ चलते हैं। मैं उनके साथ क्या सलूक करती हूं, यह गौरकाबिल होगा।"
कुछ बातें राज ही रहें...
विशाल की इस फिल्म की कहानी काफी रोचक है। प्र्रियंका इसमें एक-एक कर अपने सारे पतियों का कत्ल कर देती है। प्रियंका इस फिल्म के बारे में विस्तार से कुछ भी बताने से इनकार कर देती हैं। वो हंसकर बताती हैं,"मैं नहीं शायद ऎसा मेरा किरदार करता हो। खैर, इससे जुड़ी कुछ बातों को अभी राज ही रहने दीजिए। अभी यह राज खोलना ठीक नहीं होगा। थोड़ा इंतजार कीजिए यह फिल्म इस साल ही रिलीज होगी।" उनसे यह पूछने पर कि पहले इसमें आपके सात पति के रोल में सात बड़े हीरो को लेने की बात चल रही थी, उनका जवाब होता है,"किसी फिल्म के फ्लोर पर जाने से पहले बहुत सारी प्लानिंग बनती और बिगड़ती रहती है। पहले विशाल जी सहित हम सब ऎसा चाहते थे। बाद में यह फाइनल किया गया कि कैरेक्टर के मुताबिक ही मेल आर्टिस्ट को सेलेक्ट किया जाए। मेरा खयाल है, हर फिल्म में इस बात का ही विशेष्ा ध्यान रखना चाहिए। ऎसा किसी बड़े हीरो के इनकार करने की वजह से नहीं किया गया। विशाल जी ने हर कलाकार का सेलेक्शन कैरेक्टर के मुताबिक किया है। यह उसी सेलेक्शन का नतीजा है कि नसीर जी से लेकर जॉन अब्राहम तक मेरे पति के रोल में दिखाई पडेंगे। नसीर जी के बेटे बिवान भी इसमें मेरे एक पति का रोल कर रहे हैं। वो रोल कैसा है अभी इस बारे में ज्यादा बताना ठीक नहीं होगा। थोड़ी क्यूरिऑसिटी बनाए रखिए। यह फिल्म अंग्रेजी के एक बेस्ट सेलर नोवेल पर बेस्ड है। विशाल जी ने इसकी स्क्रिप्ट पर काफी मेहनत की है। यह खबर बिल्कुल गलत छपी थी कि इसमें हॉलीवुड स्टार और मेरे दोस्त जेरार्ड बटलर भी एक रोल करने वाले हैं। ऎसी कोई प्लानिंग तो मेरे सामने कभी नहीं बनी। जेरार्ड से मैं मिली थी, पर इस मुद््दे पर कभी कोई बात नहीं हुई। यह सब मीडिया का खयाली पुलाव है।"
जरूरत है हिट निर्देशकों की...
सफलता की दृष्टि से "सात खून माफ " के निर्देशक विशाल भारद्वाज को अब भी बहुत पीछे माना जा रहा है, जबकि प्रियंका को इस समय हिट निर्देशकों की सख्त जरूरत है। एक तरह से उनका स्टारडम इन हिट फिल्मों पर ही निर्भर है। प्रियंका इस बात को अच्छी तरह से समझ रही हैं,पर इसी के साथ वो विशाल जैसे फिल्मकारों को भी अपने साथ रखना चाहती हैं। प्रियंका से इसकी वजह पूछने पर उनका जवाब होता है,"विशाल जी ने अपनी काबिलियत को बहुत अच्छी तरह से साबित किया है। "कमीने" में उनके साथ काम करने के दौरान मैं उनके टैलेंट की कायल हो गई थी। उसी समय उन्होंने इस फिल्म का सब्जेक्ट मुझे सुनाया था। बाद में जब मैंने पूरी स्क्रिप्ट पढ़ी, तो मुझे लगा कि मुझे अब जिस तरह की फिल्मों में काम करना चाहिए, यह वैसी ही फिल्म है, पर "कमीने" में काम करने का यह कारण नहीं था। मैं इस तरह से अपने कॅरियर के बारे में नहीं सोचती हूं। कमर्शियल फिल्मों में काम करने की बात हमेशा मेरे जेहन में रहती है। इसी के साथ मैं ज्यादा-से-ज्यादा संजीदा मेकर के साथ काम करना चाहती हूं। "कमीने" पूरी तरह से शाहिद की फिल्म थी ,फिर भी मैंने यह फिल्म की। मुझे पूरा यकीन था कि छोटा-सा रोल ही सही, पर विशाल जी मुझे जाया नहीं करेंगे, वैसा ही हुआ। "फैशन" के बाद "कमीने" ने भी मुझे एक एक्ट्रैस के तौर पर काफी संतुष्टि दी है।"
यह दाव उलटा भी पड़ सकता है
कुछ खास तरह की फिल्मों को प्राथमिकता देने की वजह से कई बार दाव उलटा भी पड़ जाता है। इन दिनों जबकि कैटरीना और प्रियंका को नंबर एक हीरोइन का दावेदार माना जा रहा है। क्या प्रियंका को इस तरह की ऑफ -बीट फिल्में करनी चाहिए। प्रियंका इन्हें अलग तरह की फिल्में मानने से इनकार कर देती हैं,"आपको किसने कह दिया कि यह ऑफ -बीट फिल्म है। विशाल जी सीरियस मेकर हैं, पर उनकी फिल्में पूरी तरह से ऑफ -बीट नहीं होती हंै। हर वर्ग का दर्शक उनकी फिल्मों को एंजॉय करता है।" तब उन्हें समझाना पड़ता है, विशाल की अब तक कि ज्यादातर फिल्मों को क्रिटिक तो मिले, लेकिन दर्शक नहीं। इस पर प्रियंका का अपना तर्क होता है,"किसी भी फिल्म के अच्छे पक्ष को आप कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं। एक अच्छा फिल्म मेकर इसी आधार पर अपना सफर जारी रखता है। हां, कई बार ऎसा जरूर होता है कि एक अच्छी फिल्म को सिर्फ क्रिटिक मिलते हैं। मेरा खयाल है इस आधार पर आप किसी अच्छे मेकर का मूल्याकंन नहीं कर सकते। मैं जानती हूं, बॉलीवुड में आपका सारा मूल्यांकन हिट-फ्लॅाप के आधार पर होता है। मैं इसे एक बड़ा प्रॅाब्लम मानती हूं। यह डर हम सभी को सताए रखता है, इसलिए मैं हर फिल्म बहुत सोच-समझकर कर रही हूं। ताकि एक फ्लॉप फिल्म का खामियाजा मुझे ज्यादा ना उठाना पड़े।"
सिर्फ वर्तमान
की फिक्र...
वो भविष्य के लिए ज्यादा लंबी प्लानिंग नहीं बना रही हैं। करण जौहर की "दोस्ताना-2" की शूटिंग पूरी करने के बाद वो अनुराग बसु की फिल्म "साइलेंंस" की शूटिंग शुरू कर देंंगी। इस बीच उनकी दो फिल्में "सात खून माफ " और "अनजाना-अनजानी" के रिलीज की तैयारी शुरू हो जाएगी। अनुराग की "साइलेंस" में भी रणबीर के साथ उनकी जोड़ी बनाई गई है। फिल्मों के अलावा वो अपने इंडोर्समेंट को लेकर ज्यादा व्यस्त हैं। वो बताती हंै, "मैं अभी सिर्फ वर्तमान को ध्यान में रखकर एक -एक कदम रख रही हूं। असल में मैं इतनी कम फिल्में कर रही हूं कि मुझे अपनी डेट््स को जरा भी एडजस्ट नहीं करना पड़ता। जहां तक इंडोर्समेंट का सवाल है। पैसे कमाना कौन नहीं चाहता। इसका भी वक्त होता है। पैसे कमाने के मौके बार-बार नहीं मिलते।" उनकी बातचीत में एक डिप्लोमेटिक अंदाज साफ झलकता है, लेकिन यह कड़वा सच है कि एक स्टार के लिए पैसा बेहद बहुत जरूरी हो जाता है, क्योंकि गुमनामी के दौर में कोई साथ दे या ना दे, यदि पैसा है, तो जिंदगी आराम से कट जाती है। वही एक मात्र साथी होता है। शाहिद का जिक्र चलने पर वो "सब गॉसिप मैग्जीन की मेहरबानी का नतीजा है" कहकर बात को खत्म कर देती हैं यानी फिलहाल वो बहुत समझदारी का परिचय दे रही हैं।
मुंबई से दीप्ति अनिल
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