पुराने दिनों को याद करती हूं, तो लगता है कितने मुश्किल दौर से गुजरी हूं मैं। जहां मैं थी, वहां से यहां तक का सफर आसान नहीं था। शुरू से ही कला के प्रति मेरा रूझान रहा है, साथ ही मेरी ड्राइंग भी बहुत अच्छी थी। कॉलेज के एकदम बाद मैंने ज्वैलरी कोर्स जॉइन कर लिया और एक ज्वैलरी स्टोर पर पार्ट टाइम जॉब भी करने लगी। हालांकि कॉलेज टाइम में मैं अक्सर मॉडलिंग में ट्राई करती रहती थी, लेकिन इसे कभी सीरियसली नहीं लिया, फिर जब मम्मी ने मुझे इस बारे में सोचने के लिए कहा, तो मैंने इस पर ध्यान दिया। हमें इस फील्ड का कोई आइडिया नहीं था, ना ही मेरा कोई फ्रैंड मॉडलिंग बैंक ग्राउंड से था। हमने एक फोटोग्राफर से कॉन्टेक्ट किया, जिसका पास ही फोटो स्टूडियो था। मॉडलिंग में अच्छे पोर्ट फोलियो की अपनी अहमियत है। मेरे मन में रह-रहकर यह डर आता था कि मैं एक ऎसे फील्ड में कॅरियर बनाने की कोशिश कर रही हूं, जहां कई रिजेक्शन, कदम-कदम पर उत्पीड़न और हर समय असफल होने का डर साथ चलता है, जबकि मेरे सारे दोस्त सेफ जॉब्स में हैं। इस ओर रूख करने के बाद मैंने हर वह काम किया, जो पहले कभी नहीं किया था। शूट के पहले दिन मुझे लगा जैसे मैं वंडरलैंड में हूं। मुझ पर पूरी तरह स्टै्रस हावी था। मुझे लग रहा था कि मैं गलत जगह आ गई। फिर मैंने अपना ध्यान इस ओर से हटाकर सोचा... मम्मी को मुझसे कितनी उम्मीदे हैं, वह मुझमें कितना विश्वास करती हैं...शायद उतना, जितना मुझे भी अपने आप में नहीं है। वह दिन तो जैसे-तैसे बीता। भगवान ने मेरा साथ दिया और मात्र तीन दिन के अंदर मेरे पास एक अच्छे असाइनमेंट का ऑफर था। असाइनमेंट पर काम शुरू हुआ और मैंने अपना पुराना जॉब छोड़ दिया। इसके बाद कई बार तारीफ और आलोचनाएं मिलीं। मैंने ग्लैडरेग्स 2003 में भाग लिया और सेकंड रनरअप बनकर दिल्ली का मान बढ़ाया। तब तक मुझे अहसास भी नहीं कि मेरे साथ बहुत अच्छा होना अभी बाकी है...कुछ ही दिन बाद ग्लैडरेग्स से दुबारा मेरे पास फोन आया और उन्होंने मुझे मिस टूरिज्म इंटरनेशन कॉम्पिटीशन-2003 में भाग लेने के लिए कहा। यह प्रतियोगिता मलेशिया के क्वाललम्पुर में होनी थी, जिसमें 35 देशों की प्रतिनिधि भाग ले रही थीं। इसी के साथ 31 दिसंबर 2003 मेरी जिंदगी का सबसे यादगार दिन बन गया, जब इस प्रतियोगिता के दौरान मुझे मिस फ्रैंडशिप का अवॉर्ड मिला। यह अवॉर्ड प्रतियोगियों के बीच वोटिंग सिस्टम के आधार पर फाइनल किया गया। इसके बाद मुझे कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। अपने कॅरियर के लिहाज से मैं यह बात जानती थी कि इसके बाद मेरी अगली मंजिल मुंबई है। मुंबई आने के बाद मुझे एक से एक ग्लैमरस रोल ऑफर हुए, मैंने केवल इसलिए उन्हें ठुकरा दिया, क्योंकि मैं खुद को सहज नहीं महसूस कर रही थी। मुझे खुद पर विश्वास है...मैंने अपनी पहचान बना ली है...मेरे काम को नोटिस भी किया गया और मुझे उसका क्रेडिट भी मिला। मैंने अभी तक दो फिल्में की हैं। जगमोहन मूंदड़ा, अनुपम खेर, तनुश्री दत्ता, सेलीना जेटली, अभिमन्यु सिंह, रोहित रॉय सरीखे जाने-माने लोगों के साथ काम किया है। टेलीविजन में भी मैंने बेस्ट लोगों के साथ काम किया है। ...आज जब पीछे मुड़कर देखती हूं, तो बहुत आत्मविश्वास पाती हूं, साथ ही आगे बढ़ने का हौसला भी। आपकी पारूल चौधरी
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