मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी इस सरकार का दूसरा बजट विधानसभा में पेश किया है। यह एक व्यापक व उदारवादी बजट है। इसमें समाज के सभी वर्गो के हितों का काफी ध्यान रखा गया है। विशेष रूप से राजस्थान के आर्थिक व सामाजिक आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का प्रयास किया गया है। आधारभूत ढांचे के अंतर्गत आर्थिक क्षेत्र में सड़कों, ऊर्जा, सिंचाई आदि पर तथा सामाजिक क्षेत्र में शिक्षा, चिकित्सा आदि के विकास के लिए धनराशि आवंटित की गई है। वष्ाü 2010-11 में सड़क विकास के संदर्भ में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। लगभग 1521 किलोमीटर सड़कों का निर्माण होगा। ऊर्जा के क्षेत्र में 11424 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जो 2010-11 की योजना के परिव्यय का 52 प्रतिशत होगा। इस राशि से छबड़ा, रामगढ़ आदि परियोजनाओं से 1860 मेगावाट की वृद्धि की जा सकेगी।
प्रदेश में नई सौर ऊर्जा नीति तैयार की जाएगी। राज्य में 28 मेगावाट विद्युत सृजन का लक्ष्य रखा गया है। बायोमास नीति घोषित की गई है और इस क्षेत्र में भी विकास किया जाएगा। वर्ष 2010-11 में 35005 हैक्टेयर अतिरिक्त भूमि में सिंचाई का विस्तार किया जाएगा। इंदिरा गांधी नहर से सिंचाई का विस्तार किया जाना है। सामाजिक क्षेत्र की प्रगति के लिए शिक्षा व चिकित्सा की सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। चिकित्सालयों के लिए अघिक राशि का प्रावधान किया गया है। अनुदानित शिक्षण संस्थाओं में अध्यापकों की भर्ती की व्यवस्था की जाएगी तथा बालिका शिक्षा व कम्प्यूटर शिक्षा का विस्तार किया जाएगा। शिक्षा एवं स्वास्थ्य ऎसे विषय हैं, जिनको कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। सरकार ने बजट में इन पर विशेष ध्यान दिया है।
महंगाई कम करने का प्रयास वर्तमान में महंगाई की समस्या से समाधान के लिए बजट प्रावधानों में पेंशन में वृद्धि की गई है। 75 वर्ष से अघिक आयुवर्ग के लिए पेंशन की राशि 750 रूपये प्रतिमाह की गई है, और अन्य वर्गो को भी पेंशन वृद्धि का लाभ दिया गया है। विकलांगों के लिए इसका लाभ बढ़ाया गया है। पेंशन वृद्धि का लाभ कुल लगभग 10 लाख व्यक्तियों को मिलेगा। बजट में वरिष्ठ नागरिकों को विशेष तवज्जो स्वागतयोग्य है। सरकार पर इससे 150 करोड़ रूपये का अतिरिक्त भार पडेगा। छात्रावासों की संख्या बढ़ाई जाएगी। छात्रवृत्ति भी बढ़ाई गई है और छात्रों के भोजन भत्ते में वृद्धि की गई है। इससे शिक्षा को जाहिर तौर पर संबल मिलेगा। सबसे रूचिप्रद बात यह है कि बजट में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार करने की बात कही गई है। निर्घन परिवारों को चार रूपये प्रति किलो की बजाय दो रूपये प्रति किलो पर अनाज उपलब्ध कराया जाएगा। इससे महंगाई से त्रस्त गरीब परिवारों को निश्चित रूप से राहत मिलेगी। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस घोषणा का लाभ राज्य के सभी बीपीएल परिवार उठा सकें। हालांकि बजट में इसके लिए कूपन प्रणाली लागू करने का उल्लेख है, ताकि लाभ पाने के हकदार किसी भी दुकान से अनाज सहज रूप से प्राप्त कर सकें । इस पर निगरानी रखनी होगी। इस मद में अनुदान की राशि का अनुमान 170 करोड़ रूपये लगाया गया है।
रोजगार संवर्घन के उपाय बजट को रोजगारोन्मुख भी बनाया गया है। काफी संख्या में अध्यापकों, चिकित्सकों, पुलिस कर्मचारियों आदि की नियुक्ति की जानी है। दिल्ली-मुंबई कॉरीडोर का 40 प्रतिशत अंश राजस्थान से होकर गुजरेगा, जिसमें कई आर्थिक कार्यकलापों के प्रारंभ होने से तथा सेज में उद्योगों की स्थापना से रोजगार का सृजन होगा। स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थाओं की स्थापना तथा नई स्वरोजगार नीति के बनने के बाद इस दिशा में भी रोजगार के अवसर बढेंगे। नई औद्योगिक नीति का प्रारूप तैयार हो चुका है। उसके जारी होने पर उद्यमकर्ता अपने अपने क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित कर पाएंगे।
लोक कल्याणकारी कार्यक्रम समाज में कमजोर, उपेक्षित और अल्पसंख्यक वर्गो के लिए बजट में व्यय के प्रावधान किए गए हैं। लघु किसानों को दो हजार रूपये का अनुदान दिया जाएगा। पशु पालकों के लिए खास योजना बनाई गई है। चंबल नदी को स्वच्छ करने की योजना पहली बार बजट में देखने को मिली है। राज्य शहरीकरण आयोग का गठन किया जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमि के क्रय विक्रय पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि किसी प्रकार का गलत लेन-देन न हो सके। राज्य में साहसी पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। नर्सो का मानदेय बढ़ाया गया है और फसल बीमा योजना का विस्तार किया गया है। पंचायतों को काम के आधार पर अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा बजट में कर प्रस्तावों मे ज्यादातर व्यापारियों की सुविधा व लाभ प्रदान किए गए हैं। कर जमा कराने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। इससे 70 हजार व्यापारी लाभान्वित होंगे। व्यापारी वर्ग को स्व-कर-निर्घारण की सुविधा दी गई है, जिससे 30 हजार व्यापारियों को लाभ होगा। कई उद्योगों व आर्थिक क्रियाओं पर वैट 14 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है, जैसे मार्बल चिप्स पर, रेस्त्रां में उपभोक्ताओं के व्यय पर, वाटर टैंकर्स पर वैट की राशि 14 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई है। लेकिन इसके विपरीत महंगे दुपहिया व चार पहियों के वाहनों पर कर बढ़ाया गया है और विद्युत उपभोक्ताओं पर 100 यूनिट से ज्यादा उपभोग करने पर 10 पैसा प्रति यूनिट सैस (उपकर) लगाया गया है, ताकि इस राशि का उपयोग स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में हो सके। इससे उपभोक्ताओं पर भार पडेगा। यदि बजट के प्रस्तावों व प्रावधानों को पूरी तरह क्रियान्वित किया जा सका तो निश्चित रूप से जन कल्याण में वृद्धि होगी और राज्य के भावी विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। व्यवहार में प्राय: देखा गया है कि उपलब्घि का स्तर प्रस्तावों व वायदों से काफी नीचे रह जाता है। परिव्यय व प्रतिफल में तालमेल होना चाहिए।
चिंता की रेखाएं बाकी हैं बजट में आम आदमी को लुभाने की कोशिश की गई है, लेकिन इस सच को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि राजस्थान की राजकोषीय स्थिति के विभिन्न संकेतक चिंताजनक हैं। 2009-10 के संशोघित अनुमानों में राजस्व घाटा 3993 करोड़ रूपये आंका गया है, जबकि बजट अनुमान मात्र 1409 करोड़ रूपये था। 2010-11 के लिए यह 1098 करोड़ रूपये रखा गया है। इसी प्रकार राजकोषीय घाटा 2010-11 में 8461 करोड़ रूपये रखा गया है, जो काफी ऊंचा है। ब्याज की देनदारी राज्य की राजस्व प्राप्तियों का 17.5 प्रतिशत है और 2010-11 में राज्य पर ब्याज की देनदारी 20 करोड़ रूपये प्रतिदिन (वर्ष में 7427 करोड़ रूपये) आंकी गई है। कहने की आवश्यकता नहीं कि मजदूरी, वेतन, पेंशन व ब्याज की राशियां राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों का लगभग दो तिहाई अंश है, जिससे भावी विकास के लिए बहुत कम राशि बच पाती है। सरकार ने पूंजीगत परिव्यय 2009-10 के बजट अनुमानों में 6864 करोड़ रूपये दर्शाया था, जबकि संशोघित अनुमानों में यह मात्र 5526 करोड़ रूपये रह गया और 2010-11 के लिए यह 7433 करोड़ रूपये दर्शाया गया है, जिसे प्राप्त करना आसान नहीं होगा।
वर्तमान में राज्य राजकोषीय दुविधा में प्रविष्ट हो गया है। इसलिए राज्य के नियोजन को नया स्वरूप प्रदान करना अत्यावश्यक है। राज्य में विकास की विपुल संभावनाएं हैं। सरकार को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल का उपयोग करके तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का घाटा कम करके विकास की दर बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। बजट में इन दिशाओं पर ध्यान दिया जाता तो बेहतर होता। यह बजट इन प्रश्नों पर मौन है, आशा है आगामी बजट में यह अभाव और अन्य कमियां दूर करने का प्रयास किया जाएगा। ऎसा करने पर ही राज्य में समावेशी विकास रफ्तार पकडेगा।
प्रो. लक्ष्मीनारायण नाथूरामका (लेखक जाने-माने अर्थशास्त्री हैं)
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