जयपुर। राजस्थान यूनिवर्सिटी के घूमर पांडाल पर करीब सात वर्षो बाद 6 फरवरी को प्रस्तावित घूमर समारोह के इस वर्ष भी नहीं होने की संभावना बढ़ गई है। इसकी प्रमुख वजह घूमर समारोह मे यूनिवर्सिटी एवं कॉलेजों की दिलचस्पी नहीं होना है। आरयू एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार घूमर को लेकर सभी तैयारियों को तभी पूरा किया जा सकता है, जब स्टूडेंट वेलफेयर एवं छात्रसंघ पदाधिकारियों के पास पर्याप्त बजट हो और स्टूडेंट्स एवं लोक कलाकारों की शिरकत को संभव बनाया जा सके। फिलहाल आयोजकों के पास दोनों की ही कमी है।
130 में से कोई नहीं इस तीन दिवसीय समारोह में शामिल होने के लिए देश की तकरीबन 130 से अधिक यूनिवर्सिटीज एवं कॉलेजों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था। इसके बावजूद घूमर आयोजकों की मानी जाए तो गत रविवार तक समारोह मे शामिल होने के लिए एक भी संस्थान की ओर से एन्ट्री मे दिलचस्पी नहीं ली गई है। साथ ही जिन्हें स्पॉन्सर्स के तौर पर जोड़ने के प्रयास किए जा रहे थे, उन सभी संस्थानों ने भी इससे जुड़ने से इंकार कर दिया है। आयोजकों का कहना है कि इस बार भी घूमर का आयोजन अधर में है।
आपात बैठक कल घूमर के आयोजन पर अंतिम निर्णय लेने के लिए बुधवार को वाइस चांसलर की ओर से गठित कमेटी एवं छात्रसंघ पदाधिकारियों की ओर से आपात बैठक भी बुलाई गई है। छात्रसंघ पदाधिकारियों का कहना है कि बैठक मे स्पॉन्सर्स की कमी और पब्लिसिटी के साथ ही समारोह की सफलता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक मे आरयू के स्टूडेंट वेलफेयर के डीन के अलावा छात्रसंघ यूनियन के पदाधिकारी और कमेटी के सदस्य शामिल होंगे।
प्रो. आर.वी. सिंह डीन, स्टूडेंट वेलफेयर, आरयू देशभर के नामी कॉलेजों एवं यूनिवर्सिटीज को "घूमर" में पार्टिसिपेट करने का आमंत्रण रूपी सर्कुलर भेजा गया था, लेकिन रेस्पॉन्स नहीं मिला। समारोह में शामिल होने की अंतिम तिथि 31 जनवरी थी। अब एक फरवरी को होने वाली बैठक की तैयारियां की जा रही है।
प्रभा चौधरी छात्रसंघ अध्यक्ष, आरयू तकरीबन सात वर्षो बाद यह समारोह होने के कारण हमें इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है, लेकिन स्पॉन्सर्स और यूनिवर्सिटीज दोनों ही दिलचस्पी कम ले रहे हैं। हालांकि बैठक के बाद ही आयोजन की स्थिति साफ होगी।
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