जयपुर। सीबीएसई ने स्कूलों को कम से कम एक क्लासरूम हाईटेक और आईसीटी क्लासरूम बनाने के इंस्ट्रक्शंस दिए हैं। बोर्ड का मानना है कि स्टूडेंट्स की रीजनिंग और क्रिटिकल थिंकिंग स्किल्स को डवलप करने के लिए वल्र्ड वाइड वेब तकनीक का यूज करना जरूरी है। इसके लिए बोर्ड ने स्कूल में एक आईसीटी क्लासरूम बनाने पर जोर दिया है। फिलहाल एक क्लासरूम को इस तकनीक से जोड़ने के लिए कहा गया है। आने वाले समय में सीबीएसई से संबद्ध सभी स्कूलों के प्राइमरी से सीनियर सैकंडरी लेवल तक के सभी क्लासरूम हाईटेक बनाने की प्लानिंग का भी जिक्र किया गया है। हालांकि कुछ बड़े स्कूलों के अलावा फिलहाल जयपुर के स्कूलों में ऎसा हो पाना असंभव सा लगता है। यह कहा है सीबीएसई ने बोर्ड ने कहा है कि केंद्र सरकार की एचआरडी मिनिस्ट्री का भी यही मानना है कि बच्चों को सिर्फ थ्योरिटिकल नॉलेज देने की बजाय प्राइमरी क्लास से ही प्रैक्टिकल नॉलेज को बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे उनमें एडवांस नॉलेज, क्रिटिकल थिंकिंग और रीजनिंग स्किल्स डवलप की जा सकें। इसके लिए जरूरी है कि स्कूल एजुकेशन में इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी का यूज किया जाए। इस प्लानिंग में बोर्ड ने सीनियर सैकंडरी लेवल पर बायोकैमिस्ट्री, नैनो टैक्नोलॉजी, बिजनेस इंटेलीजेंस और बायोइन्फॉर्मेटिक्स जैसे विषयों में आईसीटी टूल्स का यूज करने पर जोर दिया है, जिससे स्टूडेंट्स और टीचर्स दोनों ग्लोबल एनवायर्नमेंट में नॉलेज प्राप्त कर सकें। आईसीटी टूल्स में होंगी ये चीजें आईसीटी टूल्स का अर्थ इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टूल्स से है। इन टूल्स में कम्प्यूटर, प्रोजेक्टर, डिस्प्ले डिवाइस, डिजीटल इंस्ट्रक्शन मैटेरियल, इंटरेक्टिव सिस्टम, मल्टीमीडिया रिसोर्सेज, प्राइमरी क्लासेज में मैथ्स और साइंस के डिफिकल्ट टॉपिक्स बच्चों को नेट पर उपलब्ध विभिन्न प्रोग्राम्स के जरिये समझाना और इंटरनेट पर उपलब्ध हर सब्जेक्ट की एक्स्ट्रा एडवांस्ड नॉलेज शामिल हैं। बोर्ड की इस प्लानिंग का उद्देश्य स्टूडेंट्स को उनके टॉपिक की पूरी नॉलेज देना और उनमें सॉफ्ट स्किल्स डवलप करना है। सभी क्लासेज में आईसीटी टूल्स हालांकि सैकंडरी और सीनियर सैकंडरी लेवल पर भले ही एनसीईआरटी और बोर्ड की इस कवायद का कोई पॉजिटिव रिजल्ट नजर न आया हो, लेकिन अब बोर्ड 11 वीं और 12वीं में सभी सब्जेक्ट्स के लिए हाईटेक क्लासरूम्स के जरिये पढ़ाई करने पर जोर दे रहा है। इसके लिए बोर्ड ने सभी स्कूलों को कंप्यूटर और दूसरी टेक्निक्स के जरिये ही फॉर्मेटिव असेसमेंट करने का सुझाव दिया है। बोर्ड ने सीसीई टेक्निक में भी ज्यादा से ज्यादा कंप्यूटर टेक्निक्स का यूज करने के लिए कहा है। सीसीई के अंतर्गत स्टूडेंट्स के लिए सब्जेक्ट्स से जुड़े ऑनलाइन क्विज ऑर्गेनाइज करने के बारे में भी बोर्ड ने इंस्ट्रक्शन दिए हैं। मॉनीटर्स को मिला कॉलम सीबीएसई ने गुरूवार को सीबीएसई की मॉनीटर एंड मेंटर स्कीम के अंतर्गत सलेक्ट हुए मेंटर्स के लिए कॉलम बनाने का ऑप्शन खोल दिया है। इसके जरिये मॉनीटर इस स्कीम से जुड़ी सारी इन्फॉर्मेशन ले सकेंगे। इसके अंतर्गत हर मॉनीटर को एक आईडी दे दिया गया है। सीबीएसई के इस स्टेप से स्टूडेंट्स को फायदा होगा। स्टूडेंट्स टॉपिक्स पढ़ने की बजाय देखकर जल्दी समझ सकते हैं, लेकिन स्कूल भी इसे उसी तरह से इंप्लीमेंट करें, तभी बोर्ड ने जो प्लान किया है, वह सक्सेसफुल हो पाएगा। अशोक गुप्ता, मेंबर गवर्निüग कमेटी, सीबीएसई
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