जयपुर। पूरे एक साल के इंतजार के बाद मंगलवार को राजस्थान यूनिवर्सिटी में पीएचडी और एमफिल के लिए मंगलवार को प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई। अभी तक 55 प्रतिशत से ज्यादा अंक वाले सभी स्टूडेंट्स पीएचडी के लिए अपना नाम रजिस्टर्ड करवा सकता थे। माना जाता था जिन स्टूडेंट्स की गाइड से अच्छी जानकारी होती थी, उसे पीएचडी करने का सुअवसर मिल जाता था। इस चलन को तोड़ने के लिए इस साल से यूजीसी ने पीएचडी के लिए एंट्रेंस एग्जाम की घोषणा की थी। 3197 में से 2845 रहे प्रजेंट पीएचडी और एमफिल के इस पहले एग्जाम के लिए 3197 स्टूडेंट्स का रजिस्ट्रेशन हुआ था। मंगलवार को तीनों सेंटर्स पर कुल मिलाकर 2845 स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया। ये प्रवेश परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित की गई। पहले शिफ्ट सुबह साढ़े नौ बजे से डेढ़ बजे तक हुई। पहली शिफ्ट के पेपर में 150 ऑब्जेक्टिव क्वेशचन्स थे, जिसमें से स्टूडेंट्स को सिर्फ 100 सवालों का जवाब देना था। पेपर में किसी तरह की नेगेटिव मार्किग नहीं थी, इसलिए स्टूडेंट्स को पेपर अटेम्पट करने में कोई परेशानी नहीं हुई। पहला पेपर सभी फैकल्टी के स्टूडेंट्स के लिए कॉमन था। इसमें टीचिंग स्किल्स, रिसर्च मैथेडोलॉजी, जनरल नॉलेज और एप्टीट्यूड से जुड़े सवाल पूछे गए। दूसरा पेपर सबजेक्ट ओरिएंटेड था जिसमें अलग-अलग सबजेक्ट के स्टूडेंट्स के लिए डिफरेंट सवाल शामिल थे। दूसरे पेपर में विषय से जुड़े 50 ऑब्जेक्टिव, 10 लघु उत्तर और 5 विवरणात्मक सवाल शामिल थे। पहला पेपर 100 मार्क्स का और दूसरा पेपर 300 मार्क्स का था। अब पीएचडी करेंगे सिर्फ मेरिटोरियस स्टूडेंट आरयू के प्रोफेसर्स का मानना है कि पीएचडी और एमफिल के लिए होने वाले इस एंट्रेंस एग्जाम से पूरे प्रोसिजर में ट्रांसपरेंसी आएगी। पहले जहां सैकेंड डिवीजन स्टूडेंट्स भी पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर लेते थे,वहीं अब सिर्फ मेरिटोरियस स्टूडेंट्स ही शामिल हो सकेंगे। बॉटनी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर पी.सी त्रिवेदी कहते हैं कि अमेरिका में सिर्फ दस प्रतिशत स्टूडेंट्स ही पीएचडी करते हैं। पिछले कुछ सालों में यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर्स की भीड़ जमा हो गई थी। अब सिर्फ क्रीम स्टूडेंट्स ही रिसर्च में आएंगे, इससे रिसर्च की क्वालिटी पर भी पॉजिटिव असर होगा। एग्जाम के बाद मैरिट के टॉप स्टूडेंट्स को ही एडमिशन दिया जाएगा। महारानी कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. कुसुम जैन कहती हैं कि हमें फिल्टरिंग का कोई रास्ता तो चाहिए था। ये एग्जाम सिर्फ स्टूडेंट्स की एलीजिबिलिटी ही तय करेगा। इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि जो स्टूडेंट भी एग्जाम में पास होगा वहीं पीएचडी कर सकेगा। हर डिपार्टमेंट के पास जितनी सीटें होगी सिर्फ मैरिट लिस्ट में उतने ही स्टूडेंट्स को मौका मिलेगा, बाकी को अगले साल फिर से एग्जाम देना होगा। ये पूरा पेपर नैट के सिलेबस पर आधारित था। पेपर हमारी उम्मीद से आसान था। एग्जाम सभी स्टूडेंट्स के लिए अच्छा प्लेटफॉर्म है। यूनिवर्सिटी में अभी तक कम्प्यूटर साइंस का कोई गाइड अवेलेबल नहीं है, लेकिन एग्जाम में पास होने के बाद यूनिवर्सिटी को मैरिट में आए स्टूडेंट्स को गाइड अवेलेबल कराना होगा। नेहा अग्रवाल और ऋचा पुरोहित, स्टूडेंट्स पहले पीएचडी पूरी तरह से जैक का खेल था। जो गाइड को जानता था, उसका आसानी से एडमिशन हो जाता था। इस एग्जाम के आयोजित होने से होनहार स्टूडेंट्स का भला होगा। पेपर हमारी उम्मीद के जैसा ही था। पेपर में नेगेटिव मार्किग नहीं होने की वजह से हम पेपर को पूरा अटेम्पट कर पाए। पेपर का पैटर्न काफी कुछ नेट से मिलता-जुलता था, बस इसमें नेगेटिव मार्किग नहीं थी। अरविंद कुमार, अमिता गुप्ता और गुड्डी शर्मा, स्टूडेंट्स
|
|
|
|
|
|
|