जयपुर। शहर के बाइक राइडर्स अब ग्रुप ए कॉम्पिटिशन में पार्टिसिपेशन की चाह रखने के बावजूद इस कॉम्पिटिशन से दूर ही रहेंगे। दरअसल ग्रुप ए कॉम्पिटिशन में केवल फॉरेन बाइक्स को रेस में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन शहर के किसी भी बाइक राइडर के पास इस तरह की कोई बाइक ही नहीं है। रविवार को हुए सुपरमोटो क्रॉस चैंपियनशिप में भी पार्टिसिपेट करने वाले शहर के बाइक राइडर्स ने फॉरेन की इन बाइक्स को रेंट पर लेकर ग्रुप ए कॉम्पिटिशन में पार्टिसिपेट किया। ये राइडर्स बाइक तो खरीदना चाहते हैं, लेकिन शहर में मैकेनिक और पाट्र्स अवेलेबल नहीं होने के कारण इस पर पैसा खर्च करने से हिचकिचाते हैं। हालांकि मेट्रो सिटीज में फॉरेन बाइक्स के पाट्र्स और इनके मैकेनिक कंपनियों ने शोरूम्स में अवेलेबल कराने शुरू कर दिए हैं, लेकिन राजस्थान अभी तक इस सुविधा से अछूता है। 45 राइडर्स में से 2 ने चलाई फॉरेन बाइक रविवार को हुए सुपरमोटो क्रॉस चैंपियनशिप में ग्रुप ए जिसमें फॉरेन बाइक्स चलाई जाती हैं, में राजस्थान के दो बाइकर्स प्रद्युम्न सिंह और गौरव खत्री ने ही पार्टिसिपेट किया था, जिसमें गौरव खत्री को पहला प्राइज मिला। जयपुर में हुए इस तीसरे कॉम्पिटिशन में ग्रुप ए में पार्टिसिपेट करने वाले बाकी सभी राइडर्स पुणे, बैंगलुरू और चेन्नई जैसी साउथ सिटीज से थे। शहर के बाइक राइडर्स मानते हैं कि यहां सभी राइडर्स ग्रुप ए में पार्टिसिपेट करना चाहते हैं और वे जीतने का दम भी रखते हैं, लेकिन जयपुर अभी मेट्रो सिटीज की तरह डवलप नहीं हो पाया है। जहां यामाहा और दूसरी कंपनियां अपने मैकेनिक्स और फॉरेन बाइक्स के पाट्र्स अवेलेबल ही नहीं हैं। केवल सिंपल बाइक्स की ही सर्विस दी जाती है या बाइक को मॉडिफाई कर दिया जाता है। अभी तक शहर के 50 प्रतिशत राइडर्स ने सभी रेसिंग कॉम्पिटिशन में अपने साथी राइडर्स से रेंट पर बाइक लेकर ग्रुप ए में पार्टिसिपेट किया है। शहर के अधिकतर राइडर्स मोडिफाई बाइक्स के भरोसे राजस्थान में बाइक राइडर्स को मिलने वाली फैसेलिटीज की कमी के चलते शहर के अधिकतर राइडर्स सिर्फ मोडिफाई बाइक्स के जरिये ही कॉम्पिटिशन में हिस्सा ले रहे हैं। शहर में हुए कॉम्पिटिशन में जयपुर से करीबन सभी राइडर्स ने मोडिफाई बाइक्स ही यूज की थी। शहर में रेसिंग के लिए बाइक मोडिफाई करने वाले राजस्थान मोटोक्रॉफ्ट के मैकेनिक अब्दुल रहमान बताते हैं कि मेट्रो सिटीज में विदेशी कंपनियों की बाइक्स के पाट्र्स आसानी से अवेलेबल हो जाते हैं, इसलिए बाइक ना भी खरीदे तो भी उन पाट्र्स के जरिये वैसी बाइक तैयार की जा सकती है, लेकिन जयपुर में उस तरह से बाइक मोडिफाई कराना पॉसिबल नहीं है। यहां सिर्फ लोकल पाट्र्स मिलते हैं। पिछले दो साल में कई लोग बाहर से पाट्र्स खरीदकर यहां फॉरेन बाइक्स जैसी बाइक तैयार करवा चुके हैं, जिनमें एक्टर जॉन अब्राहम भी शामिल हैं। ये बाइक साधारण बाइक से 50 परसेंट ज्यादा तेज स्पीड से चलती है। मैं 2005 से बाइक राइडिंग कॉम्पिटिशन में हिस्सा ले रहा हूं। लेकिन इस बार मुझे ग्रुप ए में ही पार्टिसिपेट करना था, इसलिए मैंने अपने एक फ्रैंड से फोर स्ट्रॉक बाइक रेंट पर ली और पार्टिसिपेट करके फर्स्ट प्राइज जीता। दूसरे शहरों से भी कई लोगों ने पार्टिसिपेट किया था, लेकिन राजस्थान में राइडिंग की फैसेलिटीज ना होने के बावजूद मैं रेस में विनर रहा। बाइक खरीदना बड़ी बात नहीं है लेकिन राजस्थान में इसकी केयर और मेंटेनेंस नहीं हो सकती है। - गौरव खत्री, चैंपियन, सुपर क्रॉस चैंपियनशिप फॉरेन बाइक चलाना हर राइडर का ड्रीम होता है। मैं ग्रुप ए में आसानी से पार्टिसिपेट कर सकता हूं। साउथ की सिटीज में राइडर के पास बाइक्स हैं क्योंकि वहां पर सभी बड़ी कंपनियों जैसे टीवीएस और यामाहा ने अपने शोरूम्स में फॉरेन बाइक्स की नॉलेज रखने वाले मैकेनिक और पाट्र्स अवेलेबल कराए हैं, लेकिन फिलहाल कंपनियों ने जयपुर में इसके लिए इंट्रेस्ट नहीं दिखाया है। - अमित शर्मा, चैंपियन, बाइक राइडिंग राजस्थान के राइडर्स में भी फॉरन बाइक्स के प्रति क्रेज दिख रहा है। दो साल पहले तक ग्रुप ए में राजस्थान से एक भी राइडर पार्टिसिपेट नहीं कर पाता था, लेकिन अब इस ओर इंट्रेस्ट बढ़ा है। इसके लिए राजस्थान के राइडर 5000 रूपए तक में बाइक रेंट पर भी ले रहे हैं। -कुणाल सिंह, नेशनल बाइक राइडर
|
|
|
|
|
|
|