जयपुर। सड़क के रास्ते से बस्तर जा रहा था। अचानक एक बुढ़ा आदमी दिखाई दिया। तन पर गंदे से कपड़े, चेहरे पर अजीब से हाव-भाव और हाथ में एक बंदूक...चंद मिनटों की बात में पता चला कि वह नक्सलिस्ट है। मैं कुछ समय तक उसे देखता रहा और मन में चल रहा प्रश्न दाग दिया। इस बंदूक की नोंक पर क्या हासिल कर लोगे? जवाब मिला- सुना है देश आजाद हो गया है। हमने उस आजाद देश को नहीं देखा। हमें नहीं पता कि वह छोटा है या बड़ा, गौरा है या काला...। यदि तुम्हें मिल जाए, तो हमारे गांव ले आना। हम भी देखे आजाद भारत कैसा है? जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल के आखिरी बैठक में "राजनीति- द क्राफ्ट ऑफ पॉलिटिक्स" विष्ाय पर सुरीना नरूला के साथ हुए संवाद सत्र में फिल्म निर्देशक प्रकाश झा ने कुछ इस अंदाज में अपनी बात की शुरूआत की।
कुछ नेता जागते हुए सोते हैं प्रकाश ने कहा कि संसद में सुबह से शाम तक एक ही विष्ाय पर बहस होती है। कुछ नेता सो जाते हैं, कुछ जागते हुए भी सोए हुए लगते हैं। इस स्थिति को देखकर जनता आरोप लगाती है कि हमारे नेता भ्रष्ट है, हमारे नेता देश को खा रहे हैं। मैं सभी को बताना चाहता हूं कि दूसरे देशों की राजनीति का भी यहीं हाल है। फर्क इतना है कि भारत में छोटी-सी घटना पर भी जनता अपना विरोध प्रदर्शित करने में सफल हो जाती है, जबकि दूसरे देशों में जनता की आवाज को उठने से पहले ही दबा दिया जाता है। भारत की राजनीति में वह व्यक्ति ही सक्रिय हो सकता है, जिसके पास पैसा है या वो व्यक्ति जिसे पैसा कमाने का हुनर आता है। आज की राजनीति पर बाजारवाद हावी हो चुका है। हमें कभी भी यह नहीं भूलना चाहिए कि देश में अलग भाष्ााएं, अलग खान-पान, अलग संस्कार होने के बावजूद हमें बोलने की स्वतंत्रता है। असल में हम परिस्थितियों का सामना करने की बजाए उसके सामने झुक जाते हैं। हम में उन परिस्थितियों का सामना करना की हिम्मत ही नहीं है। जिस दिन मन के दरवाजे-खिड़कियां खोलकर विचारों, अभिव्यक्ति को आने देंगे। उस दिन सही मायने में स्वतंत्रता को नए शब्द और नए अभिव्यक्ति मिलेगी। हालांकि मैं कुछ समय पहले तक राजनीति में सक्रिय रहा, लेकिन अब पूरा ध्यान फिल्म बनाने पर है। इस सत्र में अभिनेता राहुल बोस ने कहा कि भारत की राजनीति को कोसने की बजाए इसका उत्थान किस तरह किया जाए, इस पर विचार करना बेहद जरूरी है। अधिकतर लोग शिक्षा की कमी के कारण राजनीति में भ्रष्ट नेताओं का शामिल होना महत्वपूर्ण कारण मानते हैं।
मुझे देखने नहीं जाते दर्शक जयपुर। हे राहुल बोस, सीरियसली ही इज, यस ही इज राहुल बोस...ओ माई गॉड...आई एम फ्लेट...। जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल के आखिरी दिन गल्र्स की राहुल बोस के लिए दीवानगी देखने को मिली। मेट्रो मिक्स से हुई बातचीत में अभिनेता राहुल बोस ने कहा कि मेरी फिल्मों के फ्लॉप होने का मुझे कभी अफसोस नहीं रहा। मुझे पता है कि जो दर्शक शाहरूख खान, सलमान खान या आमिर खान की फिल्में देखने सिनेमाहॉल जाते हैं, वे मेरी फिल्में नहीं देखते। मैं शुरूआत से सामाजिक कार्यो में सक्रिय रहा हूं। जल्दी ही कुछ और फिल्मों में दिखाई दूंगा।
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