जयपुर। राजस्थान के स्टूडेंट्स भी अपने प्रदेश से एमबीए नहीं करना चाहते हैं। एक्सपट्र्स के मुताबिक, ए और बी ग्रेड के एमबीए कॉलेजेज जहां हर साल अपने स्टडी मैटेरियल और स्टूडेंट्स को दी जाने वाली प्रैक्टिकल नॉलेज में वैल्यू एडिशन करते रहते हैं। वहीं राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने सालों से अपने स्टडी मैटेरियल और एग्जाम और रिजल्ट के प्रोसीजर में कोई बदलाव नहीं किए हैं। स्टूडेंट्स इस वजह से आरटीयू से संबद्ध कॉलेजों में एडमिशन लेना ही नहीं चाहते हैं। यहीं कारण है कि आरमैट की काउंसलिंग के दौरान दस हजार पांच सौ सीटों के लिए अभी तक तीन हजार स्टूडेंट्स ने ही रजिस्ट्रेशन करवाया है, जबकि शनिवार को रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख है। कुछ ये हैं कारण आरटीयू की ओर से चलाए जा रहे एमबीए प्रोग्राम में हर साल सीट्स तो बढ़ाई जाती हैं, लेकिन स्टडी पैटर्न, जॉब्स एंड प्लेसमेंट्स और वैल्यू एडेड स्किल्स की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। राजस्थान से एमबीए करने वाले स्टूडेंट्स के पास हर साल एमबीए में एडमिशन लेने के बाद पछताने के कई कारण होते हैं। एक ओर फर्स्ट, सैकंड और थर्ड सेमेस्टर खत्म हो जाने के बाद फर्स्ट सेमेस्टर का रिजल्ट आने से स्टूडेंट्स परेशान होते रहते हैं। वहीं कोर्स पूरा होने के बाद रिजल्ट देरी से स्टूडेंट्स को कहीं भी इंटरव्यू के लिए इंतजार ही करना होता है। वहीं एक दो गवर्नमेंट कॉलेजों को छोड़ दिया जाए तो किसी भी कॉलेज में दिल्ली, मंुबई और पुणे के एमबीए संस्थानों के समान फैकल्टी और दूसरी फैसेलिटीज नहीं है। प्रदेश के कॉलेजों में घटते कैंपस प्लेसमेंट्स भी इसकी एक वजह है। इसके अलावा इन संस्थानों में स्टूडेंट्स की सॉफ्ट स्किल्स और कम्युनिकेशन स्किल्स को डवलप करने पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया जाता है। आरटीयू द्वारा कराए जाने वाले एमबीए प्रोग्राम और सिलेबस में इन चीजों की कमी अखरती है, इसलिए बड़ी कंपनियां भी दूसरे प्रदेशों से एमबीए करने वाले स्टूडेंट्स के मुकाबले यहां के एमबीए स्टूडेंट्स में टैलेंट को कम ही आंकती है। आंकड़ों की जुबानी गुरूवार से शुरू हुई आरमेट काउंसलिंग के रजिस्ट्रेशन आंकड़ों ने गवर्नमेंट महिला इंजीनियरिंग कॉलेज, अजमेर को भी सकते में डाल दिया है। इस साल आरमेट एग्जाम और काउंसलिंग कंडक्ट कराने का जिम्मा गवर्नमेंट महिला इंजीनियरिंग कॉलेज, अजमेर को दिया गया है। इस साल करीब आठ हजार स्टूडेंट्स आरमेट परीक्षा में पास हुए थे, जिसमें से अभी तक सिर्फ 3000 स्टूडेंट्स ने फीस जमा कराई है। यह हाल तब है जबकि फीस जमा कराने की आखिरी तारीख 24 जुलाई है। प्रदेश की करीब 123 कॉलेजों की 10500 सीटों के लिए हुई आरमेट परीक्षा में करीब 9612 स्टूडेंट्स ने पंजीकरण कराया था। तीन जून को हुई परीक्षा में 8772 स्टूडेंट्स पास हुए थे। राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी की ओर से चलाए जा रहे एमबीए प्रोग्राम के लिए जयपुर में ही करीब 1930 सीट्स हैं। इस साल 8772 स्टूडेंट्स पास हुए थे, लेकिन अभी तक 3000 स्टूडेंट्स ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। हम खुद सरप्राइज्ड हैं कि बाकी स्टूडेंट्स कहां चले गए? प्रदेश में जॉब प्लेसमेंट की स्थिति बहुत खराब है। इसी वजह से स्टूडेंट्स यहां से एमबीए नहीं करना चाहते हैं। अब स्टूडेंट्स को मैसेज भिजवाने वाला है, जिससे स्टूडेंट्स रजिस्ट्रेशन कराएं। डॉ. एमसी गोविल समन्वयक, आरमेट परीक्षा एमबीए प्रोग्राम में है कमी आरटीयू के तहत कराया जाने वाला यह एमबीए प्रोग्राम ढंग से डिलीवर नहीं हो पा रहा है। यहां का कोर्स और दूसरे महत्वपूर्ण पाट्र्स बड़ी कंपनियों की एक्सपेक्टेशन पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। मंदी के बाद मार्केट की स्थिति भी खराब हो गई है। अब फ्रेश ग्रेजुएट्स को कंपनीज रिक्रूट नहीं करना चाहती हैं, इसलिए राजस्थान से एमबीए करने वाले बहुत कम स्टूडेंट्स को जॉब मिल पा रही हैं। कम फीस होने के बावजूद स्टूडेंट्स ज्यादा फीस देकर बाहर से एमबीए करना चाहते हैं। राजेश कोठारी, भूतपूर्व निदेशक, आरए पोद्दार मैनेजमेंट कॉलेज राजस्थान के कॉलेजों में वैल्यू एडिशन की कमी आईआईएम संस्थान और दूसरे बी ग्रेड एमबीए कॉलेज जहां मार्केट की डिमांड के हिसाब से अपने कोर्सेज को रिवाइज करते हैं, वहीं यहां के इंस्टीट्यूट्स में वैल्यू एडिशन होता ही नहीं है। इसके अलावा स्टूडेंट्स की सॉफ्ट स्किल्स और कम्युनिकेशन स्किल्स को डवलप करने पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया जाता है, इसलिए फीस कम होने के बावजूद यहां के संस्थानों के लिए रूझान कम हो रहा है। डॉ. हर्ष द्विवेदी, डायरेक्टर, आरए पोद्दार मैनेजमेंट कॉलेज
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