जयपुर। ग्लैमर वल्र्ड में अपनी पहचान बनाने की चाह और बॉलीवुड में एक्टर या एक्ट्रेस बनाने का सपना संजोने वाले यंगस्टर्स के लिए हर राह बड़ी मुश्किलों भरी है। जयपुर में ऎसे सैकड़ों युवा बी टाउन में सैटल होने का सपना देखते हैं और इन्हें पूरा करने के लिए अपने-अपने तरीके से कोशिश भी कर रहे हैं, लेकिन इन सबमें जिसकी सबसे ज्यादा चांदी हो रही है, वह है फर्जी ऑडिशन और फैशन शो कराने वाले ग्रुप्स। ये फर्जी कंपनियां डिफरेंट तरीकों से इन यंगस्टर्स से कॉन्टैक्ट करती हैं और फिर शुरू होता है इन युवाओं को बेवकूफ बनाने का काम। इसके जरिये ये फर्जी कंपनियां अच्छी खासी फीस तो वसूल करती ही हैं, इसके अलावा युवाओं को मेंटली टेंशन देने का काम भी कर रही हैं।
ये होता है तरीका शहर में कई फर्जी कंपनियां अपना टाइअप मुंबई की किसी बड़ी कंपनी से होने या फिर फिल्म, एड और सीरियल्स में काम देने की बात कहती हैं। ये कंपनियां विज्ञापन, मैसेज, ई-मेल्स और डायरेक्ट कॉल करके युवाओं से संपर्क साधती हैं। इनका सबसे आसान जरिया होते हैं शहर के बड़े फोटो स्टूडियो, जहां से ये मॉडल्स और इंडस्ट्री में काम करने की इच्छा रखने वाले गल्र्स या बॉयज के नंबर लेकर उनसे कॉन्टैक्ट करती हैं। इसके बाद ये कि सी भी होटल या रेस्टोरेन्ट में ऑडिशन रखती हैं। मॉडल जीतेश ठाकुर बताते हैं, पहले जहां ये फर्जी कंपनियां शहर के दूरस्थ इलाकों में ऎसे ऑडिशन रखती थीं, वहीं अब शहर की फेमस जगहों पर भी रखने लगी हैं। ऑडिशन में करीबन सभी पार्टिसिपेंट्स को सलेक्ट कर लिया जाता है और उनसे पांच से पंद्रह हजार तक की रकम मांगी जाती है, जिसकी एवज में उन्हें डेब्यू कराने का वादा किया जाता है। मेरे पास हर महीने इस तरह के चार से पांच फर्जी ऑडिशंस के लिए कॉल आता है, शुरू में मैं ऎसी जगह चला भी जाता था, लेकिन अब इतना एक्सपीरियंस हो गया है तो पता चल जाता है कि कौनसी कंपनी फर्जी है। गल्र्स के लिए ज्यादा रिस्की शहर के यंगस्टर्स का कई बार ऎसी स्थिति से सामना हुआ है, जबकि वे पूरा ऑडिशन दे चुके होते हैं और उन्हें बात में पता चलता है कि ऎसी तो कोई कंपनी थी ही नहीं। इस मामले में सबसे ज्यादा रिस्क गल्र्स उठाती हैं। कई रैंप शोज कर चुकी सृष्टि सक्सेना का कहना है कि बेसिकली जिन्हें इस फील्ड में काम करते-करते काफी टाइम हो गया है, वो लोग तो अपने कॉन्टैक्ट्स से पता लगा ही लेते हैं। ऎसे फर्जी ऑडिशंस का शिकार नए लोग होते हैं। ये लोग टाइटल बेस्ड कॉम्पिटिशन कराने का वादा करते हैं और इसके लिए फीस भी वसूलते हैं, लेकिन बाद में कई लोग गायब हो जाते हैं। इयमें सबसे ज्यादा रिस्क गल्र्स के लिए होता है। हाल ही फेमिना का नाम लेकर एक कंपनी मिस नॉर्थ इंडिया कॉम्पिटिशन लेकर आई थी, जिसमें दिल्ली और जयपुर की गल्र्स शामिल हुई थीं। इसका ऑडिशन शहर के एक बड़े होटल में हुआ था। उन लोगों ने गल्र्स का पोर्टफोलियो वगैरह बनाया, लेकिन बाद में कुछ रेस्पॉन्स ही नहीं आया। ऎसे में उन पिक्चर्स का यूज कहां हो रहा है, इसका भी पता नहीं लगाया जा सकता है। करीब छह महीने पहले रवींद्र मंच पर भी इसी तरह का एक ऑडिशन हुआ था, जहां राजस्थानी मूवी के लिए शूट किया गया था। इन फैक्ट गल्र्स से खुद की ड्रेसेज लाने के लिए कहा गया था। सभी गल्र्स का पूरा पोर्टफोलियो शूट किया और कहा कि सलेक्टेड गल्र्स को बाद में बताएंगे। उस समय जयपुर से भी करीब 40 गल्र्स ने पार्टिसिपेट किया था, लेकिन आज तक किसी को कॉल नहीं आया। कॉलोनियों में ऑडिशन कुछ समय पहले वैशाली नगर में ऎसा फर्जी ऑडिशन हुआ था, जहां लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए पूरा सेट लगाया था। सौ लोगों के स्क्रीन टेस्ट में 70 लोगों को सलेक्ट कर लिया था। सलेक्टेड लोगों को 92000 रूपए के बदले एक सीरियल में लीड रोल, एड, फोटो शूट का वादा किया। बाद में पता किया तो पता चला कि मुंबई में जहां उन्होंने एड्रेस बताया था, वहां कुछ था ही नहीं। इसके अलावा शहर में ही एक ऑडिशन हुआ, जिसमें साउथ अफ्रीका ले जाने की बात कही गई, लेकिन उनकी शर्थे और दूसरी बातें सुनकर ही डाउट हो गया तो प्लान ड्रॉप कर दिया। इसके बाद जयपुर की एक एलबम बनाने वाली कंपनी का नाम लेकर ऑडिशन करा रहे थे, लेकिन जब कंपनी से कॉन्टैक्ट किया तो पता चला कि वो सिर्फ कंपनी का नाम यूज कर रहे थे। नितिन राजानी, मॉडल कमाई का बेहतरीन जरिया शहर में ऎसे ऑडिशन होते रहते हैं, लेकिन प्रॉब्लम यह है कि इनकी सच्चाई का पता काफी देर में चलता है। इस वजह से इनके अगेंस्ट कुछ किया भी नहीं जा सकता है। फर्जी ऑडिशन का खेल सबसे ज्यादा रैंप शोज में होता है। कोई भी रैंप शो करने के लिए ये ऑडिशन कराते हैं। वहां सौ-डेढ़ सौ लोगों में प्रत्येक से चार से पांच हजार फीस वसूल करके ये छोटा-मोटा रैंप शो कर देते हैं। इससे इनकी कॉस्ट भी निकल जाती है और इन्हें प्रॉफिट भी हो जाता है। कई बार तो फीस लेकर गायब हो जाते हैं और सिम चेंज कर लेते हैं। मुंबई के नाम से शहर के कई मॉडल्स ऑडिशन के लिए आ जाते हैं और बाद में उन्हें इसका कोई फायदा नहीं मिल पाता है। निर्भय वाधवा, मॉडल ममता थपलियाल
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