Daily News
Tuesday, 07 February, 2012
 |   |   |   |   |   |   |   |   |   |   | 
फिल्म बनाओ, प्रसिद्धि पाओ
Wednesday, July 21, 2010, 11:59 hrs IST
Email Print Comment min  max | Bookmark and Share
Left
citymix
Left
जयपुर। शहर के यंग आर्टिस्ट इन दिनों अपनी छोटी फिल्म बनाने में व्यस्त है। कारण है जवाहर कला केंद्र में अब इन कलाकारों की फिल्मों का प्रदर्शन हो रहा है। दरअसल जवाहर कला केंद्र की ओर से सैटरडे सिनेमा प्रोग्राम आयोजित किया जाता है। इस प्रोग्राम में इन कलाकारों की फिल्मों का भी प्रदर्शन हो रहा है। शहर के यंग टैलेंट को मंच देने के लिए अप्रेल में जेकेके की ओर से मनाए गए स्थापना दिवस समारोह के बाद से सैटरडे फिल्म में लोकल डॉक्यूमेंट्रीज का प्रदर्शन शुरू किया है। इस प्लानिंग के बाद शहर के बहुत से आर्टिस्ट अपनी फिल्में बनाने लग गए हैं। शहर के कलाकारों को जेकेके का यह नया प्रोग्राम काफी पसंद आ रहा है। अब तक करीब पंद्रह लोकल डॉक्यूमेंट्री इस कार्यक्रम के तहत प्रदर्शित की जा चुकी हैं।
टैलेंट को उभारने का प्रयास
सैटरडे सिनेमा में इस तरह की शुरूआत जयपुर के टैलेंट को उभारने के लिए की गई है। इस छोटे सिनेमा के माध्यम से युवा कलाकारों को फिल्म दुनिया की समझ होगी। इसके साथ ही दर्शकों को शहर के युवा कलाकार की सोच का भी पता चल सकेगा। यहां प्रदर्शन और दर्शकों के रेस्पॉन्स के बाद ये युवा कलाकार बड़े मंच पर अपनी इन फिल्मों को भेज सकेंगे। सैटरडे सिनेमा के तहत अभी तक कई फिल्मों का प्रदर्शन किया जा चुका है। इनमें जापानी संस्कृति, तिब्बत से लेकर बच्चों पर आधारित फिल्में शामिल हैं। केंद्र के स्थापना दिवस पर फेस्टिवल भी आयोजित हुआ था, जिसमें युवा फिल्मकारों की फिल्मों को दिखाया गया। इस फेस्टिवल को देखते हुए अब दोबारा से कलाकारों में उम्मीद की लहर जागी है। थिएटर स्टूडेंट मोहित भट्ट का कहना है कि वे भी जेकेके के इस प्रयास से बेहद उत्साहित हैं और अपनी डॉक्यूमेंट्री बना रहे हैं। इस योजना का फायदा शहर के स्टूडेंट्स भी उठा रहे हैं।
सामाजिक स्तर से लेकर मनोरंजन तक की फिल्में
युवा रंगकर्मी राकेश गोगना की बनाई गई डॉक्यूमेंट्री फिल्म "डार्क जोन" में जिस तरीके से पानी की समस्या को उठाया गया, उसे दर्शकों का अच्छा रेस्पॉन्स मिला है। युवा फिल्मकार धर्मेन्द्र उपाध्याय ने "लास्ट मदरहुड" में नाताप्रथा को उठाकर एक अलग सब्जेक्ट से दर्शकों को रूबरू करवाया। इस फिल्म में उन्होंने दिखाया था कि राजस्थान में प्रचलित नाता प्रथा में महिलाएं किस प्रकार अपने बच्चों को छोड़कर चली जाती हैं। केंद्र के स्थापना दिवस समारोह में दिखाई गई इस फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। इसके अलावा मनोरंजन पर आधारित फिल्मों में संजय पारीक, तपन भट्ट और नईम खान की डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाई गई। शहर के अन्य आर्टिस्ट ने भी अपनी फिल्मों के प्रिंट्स के साथ जेकेके में अप्रोच किया है। स्क्रीनिंग के बाद इन फिल्मों का प्रदर्शन होगा।
इमरान शेख
More Stories Top News
city mix news छा ग्यो घूमर
city mix news "घूमर" आज से
city mix news बूढ़ी के आगे नई मांगे पानी
city mix news क्वेरीज से टेंशन रिलीज
city mix news डेढ़ करोड़ के गिफ्ट!
city mix news इंडिया को लीड करेंगे तरूण सिरोही
city mix news एक फेस्टिवल, 28 अवार्ड
city mix news अधर में झूला "घूमर"
city mix news रवि शास्त्री की ऑडी-100 जयपुर में
city mix news दर्शकों के लिए तरसी फिल्में
Copyright © Daily News. All rights reserved.