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Tuesday, 07 September, 2010
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... और बन गए सीए
Tuesday, July 20, 2010, 11:15 hrs IST
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जयपुर। द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया ने सोमवार को सीपीटी "कॉमन प्रॉफिशियंसी टेस्ट" और फाइनल ओल्ड और न्यू सिलेबस का रिजल्ट घोषित किया। सीए फाइनल न्यू सिलेबस में शहर से तीन स्टूडेंट्स ने ऑल इंडिया टॉप 50 में रैंक बनाने में सफलता हासिल की। इनमें विकास पंजवानी 43 वीं, हर्षिता माहेश्वरी और कुलदीप कोठारी 50वीं रैंक पर रहे। मई में हुए फाइनल ओल्ड के दोनों ग्रुप में जयपुर का रिजल्ट 4.63 परसेंट और फाइनल न्यू में 10.18 परसेंट रहा है।
न्यू स्कीम ने दिया फायदा
रिजल्ट को देखते हुए यह माना जा रहा है कि स्टूडेंट्स को सीए फाइनल न्यू स्कीम से एग्जाम देना फायदेमंद रहा। सीए फाइनल ओल्ड स्कीम का रिजल्ट दोनों ग्रुप में 4.63 परसेंट ही रहा, वहीं न्यू स्कीम में 10.18 परसेंट रहा। इंस्टीट्यूट के चेयरमैन सीएल यादव के मुताबिक ओल्ड स्कीम के मुकाबले न्यू स्कीम का रिजल्ट अच्छा रहा। जयपुर से न्यू स्कीम में ही मैरिट लिस्ट में स्टूडेंट्स ने रैंक हासिल की है। न्यू स्कीम में एग्जाम दे रहे स्टूडेंट्स का कहना है कि इसका सिलेबस ओल्ड के मुकाबले प्रैक्टिल ज्यादा है।
अभी और पढ़ने का है इरादा
न्यू सिलेबस में ऑल इंडिया 43 वीं रैंक पर रहे विकास पंजवानी इस सफलता से बेहद उत्साहित है। वे कहते हैं कि गुड़गांव में मेरी आर्टिकलशिप पूरी हो गई है और अब उसी कंपनी में जॉब कर रहा हूं। फिलहाल प्रैक्टिस का कोई इरादा नहीं है। आगे और पढ़ना चाहता हूं। मैंने दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम किया है। इसके बाद पी1 में ऑल इंडिया 19 वीं और पीसीसी में 11 वीं रैंक रही। मैं अपनी सफलता का श्रेय पिता आरके पंजवानी और मां मीरा पंजवानी को देना चाहता हूं। मेरा मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है, सिर्फ रेग्युलरली और पढ़ाई के प्रति सीरियस रहकर ही अच्छे मार्क्स लाए जा सकते हैं।
पीसीसी के बाद फाइनल
में भी रैंक
फाइनल न्यू स्कीम में ऑल इंडिया 50वीं रैंक हासिल करने वाली हर्षिता माहेश्वरी अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता रमेश मूंदड़ा और मां अनीता मूंदड़ा को देती हैं। हर्षिता का कहना है कि पीसीसी में भी 34 वीं रैंक थी, लेकिन फाइनल में मैरिट में नाम आने का एक्सपेक्ट नहीं किया था। सीएस भी कर रही हूं। अब सीए फाइनल हो गया है, तो किसी अच्छी कंपनी में जॉब करनी है। मेरा मानना है कि ज्यादा पढ़ना इम्पॉर्टेट नहीं है, बस एग्जाम के दौरान होने वाला प्रेशर हैंडल हो जाए तो आराम से पढ़ाई हो जाती है। मैं जूनियर्स से भी यही कहूंगी कि वे पढ़ाई के पहले कॉन्सेप्ट क्लीयर करें।
दो साल बाद प्रैक्टिस
फाइनल न्यू सिलेबस में 50 वीं रैंक पाने वाले कुलदीप कोठारी ने बताया कि पी1 में ऑल इंडिया 39 वीं रैंक और पीसीसी में राजस्थान में 8 वीं रैंक थी, इसलिए पता था कि
फाइनल में भी मैरिट लिस्ट में नाम जरूर आएगा। इस समय कोलकाता में आर्टिकलशिप चल रही है। अभी दो साल सिर्फ जॉब करने का इरादा है।
फिर दो फ्रैंड्स के साथ मिलकर प्रैक्टिस शुरू करने का प्लान है। इसके अलावा अब सीएफए चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट का कोर्स करना है। शुरू से ही तीन से चार घंटे पढ़ाई करता था। घर में दादी मां और पापा का बहुत सपोर्ट रहा। उन्हीं की वजह से आज यहां तक पहुंचा हूं।
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