कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए दिल्ली में कई सरकारी विभागों ने बनाए फेसबुक अकाउंट जयपुर। कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी सरकारी विभाग जोर-शोर से कर रहे हैं। दिल्ली में तो अब ट्रैफिक को भी मैनेज करने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाल ही दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट को फेसबुक से कनेक्ट किया है। इस अकाउंट पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस शहरवासियों के रेग्युलर फीडबैक ले रही है। ट्रैफिक से जुड़ी सभी समस्याएं दिल्लीवासी इस वेबसाइट पर लिख रहे हैं। फेसबुक से जुड़े सभी मेंबर्स सरकारी विभागों की इस मुहिम में इंट्रेस्ट दिखा रहे हैं, क्योंकि कहीं न कहीं ये फीडबैक और शिकायतें आमजन से जुड़ी हुई हैं। जयपुर के सोशल नेटवर्किग साइट यूजर चाहते हैं कि राजस्थान के सरकारी डिपार्टमेंट्स भी इंटरनेट एक्टिव बनें जिससे शहरवासी अपनी प्रॉब्लम्स और फीडबैक इसके जरिये दे सकें। हमारे पास नहीं हैं टेक्निकली स्मार्ट लोग जयपुर ट्रैफिक पुलिस के एसपी विजेन्द्र कुमार झाला का कहना है कि फेसबुक के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। हमारे यहां ज्यादातर फील्ड का स्टाफ ही नियुक्त किया जाता है। टेक्निकल लोगों की हमेशा से ही कमी रही है। राजस्थान ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट को भी रेग्युलरली अपडेट नहीं किया जाता, क्योंकि इसके लिए इंटरनेट फ्रेंडली लोगों की जरूरत है। स्टाफ में बहुत कम ऎसे ऑफिसर्स हैं, जिन्हें फील्ड ड्यूटी के बाद इंटरनेट पर काम करने का समय मिलता हो। झाला कहते हैं कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ये अच्छी पहल है। जयपुर ट्रैफिक पुलिस के पास अभी तक सभी शिकायतें पोस्टकार्ड के जरिये ही मिलती हैं। इसके अलावा इस तरह का कोई सोशल प्लेटफॉर्म हमारे पास नहीं है। आरयू में भी इसकी डिमांड राजस्थान यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स का भी मानना है कि यूनिवर्सिटी को सोशल नेटवर्किग साइट्स से जुड़कर अपनी सूचनाओं को आम बनाना चाहिए। कुछ टेक्निकल डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स ने अपने लेवल पर कुछ वेबपेज डवलप भी किए हैं। सेंटर फॉर कन्वर्जिंग टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट्स ने फेसबुक पर अपना एक ग्रुप बनाया है, जिस पर वे अपनी क्लासेज के वीडियो भी शेयर कर रहे हैं। एंटी रैगिंग कमेटी के लिए यूजफुल आइडिया यूनिवर्सिटी के इंफोनेट सेंटर के डायरेक्टर डॉ. अशोक नगावत कहते हैं कि यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन ऑफिसर ही इस तरह की सोशल नेटवर्किग साइट्स को डील कर सकता है। इन साइट्स पर रेग्युलर अपडेट रखने पड़ते हैं। यूनिवर्सिटी बहुत बड़ी है और एक साथ सभी की रेग्युलर इन्फॉर्मेशन मिलना थोड़ा मुश्किल है। एजुकेशनल इंस्टीट्यूट को इससे बहुत फायदा मिल सकता है। एंटी रैगिंग जैसी कमेटी इसके जरिये आसानी से फीडबैक ले सकती है। शाही ट्रेनों को मिला फायदा पैलेस ऑन व्हील्स और रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स ये दोनों शाही ट्रेनें सोशल नेटवर्किग से जुड़ चुकी हैं। आरटीडीसी के ऑफिशियल सूत्रों का कहना है कि इससे उन्हें बहुत फायदा मिला है। पैलेस ऑन व्हील्स के जनरल मैनेजर प्रदीप बोहरा का कहना है कि टि्वटर और फेसबुक पर आने से डिपार्टमेंट को बहुत ही यूजफुल फीडबैक मिले हैं, जिन्हें भविष्य में अप्लाई किया जाएगा। साथ ही सरकारी प्रोडक्ट को भी इन साइट्स से जुड़ने के बाद पूरी दुनिया में पब्लिसिटी मिलती है। आज के समय में कम्युनिकेशन ही सिस्टम को सुधार सकता है। कहते हैं फेसबुक यूजर्स मेरे हिसाब से डिपार्टमेंट ऑफ पुलिस के साथ-साथ जेडीए को भी फेसबुक या सोशल नेटवर्क पर होना चाहिए। इतनी बिजी लाइफ में हमारे लिए ये पॉसिबल नहीं है कि हम सरकारी ऑफिस में लंबी लाइन में लगें। इस मौसम में सड़कों का हाल बुरा है। यह ऎसी प्रॉब्लम है जिसे हम किसी ऑफिशियल को फोन से नहीं बता सकते । इंटरनेट पर कम्युनिटी को ही जयपुर के विकास के लिए मुहिम छेड़नी होगी। रोहित कामरा, फैशन डिजाइनर। जनरल पब्लिक से जुड़े जितने भी सेक्टर हैं, उन सभी को सोशल नेटवर्किग साइट्स से जुड़ना चाहिए। पानी, बिजली और नगर निगम ये आम लोगों से जुड़े हैं। जब तक इन्हें सभी जगह से रेग्युलर अपडेट नहीं मिलेंगे, स्थितियां नहीं सुधर सकतीं। टेक्नोलॉजी जब इतनी आगे बढ़ गई है, तो सरकारी कर्मचारियों को भी इसका इस्तेमाल करना चाहिए। अनिरूद्ध बाहेती, एमडी बाहेती फैशन्स आज दुनिया के 50 करोड़ लोग फेसबुक से जुड़ गए हैं, ऎसे में ब्रेनस्ट्रॉम की जरूरत है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की यह शुरूआत मुझे बहुत पसंद आई। ट्रैफिक पुलिस को तो इस पर आना ही चाहिए। साथ में राजस्थान टूरिज्म को भी फेसबुक पर उतरना चाहिए। टूरिस्ट के महत्वपूर्ण फीडबैक हमारी कमियों को आसानी से सुधार सकते हैं। संजय कौशिक, डायरेक्टर, राजपूताना हॉलीडे मेकर श्वेता पचौरी
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