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इनसे है हमारी भी पहचान
Sunday, August 29, 2010, 10:56 hrs IST
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जयपुर। बात फिजिकल और मेंटल फिटनेस की हो या फिर सक्सेस मंत्र सीखने की, खेल इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस तथ्य को जानकर शहर के कई युवाओं ने स्पोट्र्स से खुद को जोड़ा और डेडिकेशन के साथ आज वे युवा प्रतिभा बन गए। नेशनल स्पोट्र्स डे के मौके पर हमने बात की कुछ ऎसे ही स्पोट्र्स पर्सन्स से, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से न सिर्फ शहर का बल्कि राजस्थान का नाम भी रोशन किया और आज स्पोट्र्स जगत में अपनी एक अलग ही पहचान बना ली। इन्होंने अपनी सफलता और जीवन में खेल के महत्व को कुछ इस तरह बताया।

दिन-रात प्रैक्टिस से भी एनर्जी
अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित होना मेरे लिए किसी सपने के पूरा होने जैसा है। इसके लिए मैंने बहुत मेहनत की। 2006 में दोहा एशियाई खेलों में कांस्य, 2010 भारत में हुई एशियन ग्रां प्री एथेलेटिक्स में तीन स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही विश्व रैंकिंग में 9वें स्थान हासिल करने के बाद अब मेरा लक्ष्य है कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को पदक दिलवाना। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए मैंने अभी प्रैक्टिस के लिए दिन-रात एक कर रखे हैं। सच पूछें तो खेल से मुझे कभी थकान नहीं होती, हर बार एक पॉजीटिव एनर्जी मिलती है। मैं हमेशा मौका मिलने पर युवाओं को भी किसी न किसी स्पोट्र्स से जुड़ने की सलाह देती हूं।
कृष्णा पूनिया, एथेलेटिक्स

बातें बनाने से बेहतर पसीना बहाना
शौक के साथ मैंने खेलना शुरू किया था। मुझे पता भी नहीं था कि यही शौक आगे चलकर मेरी मंजिल बन जाएगा। पहले स्टेट खेले और फिर उसके बाद जूनियर फिर सीनियर नेशनल तक का सफर किया। कई मैडल और बेस्ट प्लेयर का खिताब जीतने के साथ ही मैंने हाल ही इंटर कॉलेज बास्केटबॉल कॉम्पिटिशन में बेस्ट शूटर का खिताब हासिल किया। कॉम्पिटिशन में पार्ट लेना और वहां अपनी बेस्ट परफॉर्मेüस से कोई खिताब अपने नाम करना बहुत ही सुखद अनुभव होता है, लेकिन इसके लिए बहुत डेडिकेशन की जरूरत होती है। शुरूआत में कई दोस्त मुझे कहते थे कि खेल में कुछ नहीं रखा, पढ़ाई पर ही ध्यान दो, लेकिन मेरा हमेशा यही जवाब होता कि घर पर बैठकर टीवी देखने या दोस्तों से गप्पें लगाने से बेहतर है कि ग्राउंड पर जाकर पसीना बहाना। बस इसी के साथ शुरूआत हो गई।
योगेन्द्र सिंह सोलंकी, बास्केटबॉल प्लेयर

स्पोट्र्स ही सब कुछ
मैंने आठ साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। 2005 से हर साल राजस्थान टीम में शामिल होकर खेल रहा हूं और पिछले साल मैंने राजस्थान टीम की कप्तानी के साथ ही आस्ट्रेलिया में जूनियर इंडियन टीम में शामिल होकर अपनी परफॉर्मेüस दी है। मुझे कम उम्र में जो मौके मिले इसके पीछे कारण मैं सही समय पर मेरे खेलने के निर्णय और कठिन परिश्रम को देता हूं। सब में कोई न कोई क्वालिटी होती है, जरूरत होती है तो सिर्फ उसे पहचान कर उसके लिए दिल से कोशिश करने की। जहां तक बात स्पोट्र्स की है, सभी को किसी न किसी तरह से स्पोट्र्स से अपना जुड़ाव जरूर रखना चाहिए। यह आपको हर फील्ड में आगे बढ़ाने में हैल्प करता है। जहां तक मेरी बात है तो मेरे लिए स्पोट्र्स ही सब कुछ है।
अशोक मिनारिया, क्रिकेट प्लेयर

परिवार का सपोर्ट जरूरी
मुझे बहुत खुशी होती है, जब मुझे स्टेट का नम्बर वन प्लेयर कहता है। पिछले कई सालों से मैं स्टेट के नम्बर वन टेबल टेनिस प्लेयर का खिताब हासिल कर रही हूं। मेरा मानना है कि इसके आपकी मेहनत के साथ ही परिवार का पूरा साथ होना भी बहुत जरूरी है। मेरी पढ़ाई और उसके साथ हर रोज प्रैक्टिस यह बहुत ही टाइट शेड्यूल है, लेकिन जब परिवार का साथ होता है, तो यह टाइट शेड्यूल भी अच्छा लगने लगता है। टाइम टू टाइम फैमिली का मोटिवेशन मिलने के कारण मैं नम्बर वन की पोजिशन हासिल कर लेती हूं, लेकिन मेरा लक्ष्य नेशनल और फिर इंटरनेशनल लेवल तक पहुंचना है। इसके लिए पूरी तैयारी हो रही है। एक प्लेयर होने के नाते मेरा मानना है कि सभी को पढ़ाई के साथ ही स्पोट्र्स से जुड़ना चाहिए और इसके लिए परिवार का सपोर्ट बहुत जरूरी है।
आरूषी असावा, टेबल टेनिस प्लेयर

पढ़ाई और स्पोट्र्स दोनों महत्वपूर्ण
साउथ इंडिया जूनियर-सब जूनियर, नॉर्दर्न इंडिया जूनियर-सब जूनियर, ईस्ट इंडिया जूनियर-सब जूनियर और ऑल इंडिया जूनियर-सब जूनियर सहित मैंने कई टूर्नामेंट खेले हैं। ऑल इंडिया में मेरी पोजिशन फोर्थ नम्बर पर रही है। इसके लिए हर रोज कम से कम तीन से चार घंटे प्रैक्टिस करनी होती है। स्पोट्र्स से लगातार जुड़ाव रहे हमेशा इसी की कोशिश की और इसी कोशिश के कारण आज मुझे सफलता मिली है। ऑल इंडिया खेलने के बावजूद मैं पढ़ाई पर पूरा ध्यान देता हूं। स्पोट्र्स और स्टडी दोनों ही समान महत्व रखते हैं। यही कारण है कि मैं अपने सभी फ्रैंड्स को स्टडी के साथ ही स्पोट्र्स में भी एक्टिव रहने की सलाह देता हूं।
प्रखर असावा, गोल्फ प्लेयर
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