जयपुर। ढेर सारे लुभावने वादे, अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने का दावा और बेहतरीन फिल्मों का प्रदर्शन...धूमधाम से प्रचार-प्रसार करने के बावजूद जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (जेआईएफएफ) का दूसरा दिन भी ओपनिंग सेरेमनी की तरह फ्लॉप शो साबित हुआ। सुबह निर्घारित समय पर गोलछा सिनेमा और चैम्बर भवन में फिल्मों की स्क्रीनिंग तो शुरू हो गई, लेकिन फिल्में दर्शकों को तरसती नजर आई।
हॉल में दर्शकों के नाम पर सिर्फ गिनी-चुनी यूनिवर्सिटीज के कुछेक स्टूडेंट्स और बहुत कम विजिट्र्स देखने को मिलें। हालात उस वक्त और खराब हो गए, जब तकनीकी समस्याओं के चलते फिल्मों के प्रदर्शन में समय लग गया। इससे ना केवल दर्शकों को फिल्म देखने के लिए इंतजार करना पड़ा बल्कि उनके पैसे भी वसूल नहीं हो पाए। सबसे अहम दर्शकों के मुताबिक अधिक दर्शकों के ना पहुंचने का कारण रजिस्ट्रेशन फीस और वेन्यू का दूर होना बताया गया।
आयोजक भी दर्शक ढूंढते रह गए जेआईएफएफ के तहत फिल्मों की स्क्रीनिंग के लिए शहर के गोलछा सिनेमा और चैम्बर भवन को वेन्यू बनाया गया है। हालांकि तय शेड्यूल के मुताबिक सुबह दस बजे फिल्मों की स्क्रीनिंग शुरू हो गई, पर दर्शकों की संख्या नगण्य रही। यह नजारा देखकर खुद आयोजक भी दर्शकों को ढूंढते नजर आए। शाम पांच बजे तक भी दोनों वेन्यू में दर्शकों का टोटा रहा।
43 फिल्मों की स्क्रीनिंग, फिर भी दर्शक नहीं गोलछा सिनेमा की बात करें, तो एक स्क्रीन में मात्र 40-45 दर्शक ही थे, जबकि दूसरी स्क्रीन में इतने भी दर्शक नहीं थे। सुबह हुई फिल्मों की स्क्रीनिंग की हालत काफी खराब थी। बामुश्किल गिनती के दर्शक फिल्म देखने पहुंचे, वहीं शाम तक 43 फिल्मों की स्क्रीनिंग होने के बावजूद फिल्में दर्शक नहीं जुटा पाई। रात तक हालात और भी खराब हो गए। जेआईएफएफ के दूसरे दिन 60 फिल्मों की स्क्रीनिंग होनी थी।
रजिस्ट्रेशन सिस्टम से बनी दूरी जेआईएफएफ में रजिस्ट्रेशन सिस्टम की वजह से सिने प्रेमियों ने फिल्मों से दूरी बनाए रखना उचित समझा। जहां सामान्य स्टूडेंट्स के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 250 रूपए निर्घारित की गई है, वहीं सिर्फ फिल्म एंड मीडिया से जुड़े स्टूडेंट्स से 200 रूपए वसूले जा रहे हैं। स्टूडेंट तान्या ने बताया कि इस तरह के फेस्टिवल्स में स्टूडेंट्स के लिए फ्री एंट्री होनी चाहिए। अब वह सामान्य स्टूडेंट हो या मीडिया कोर्स से जुड़ा हुआ...। यदि आयोजक फेस्टिवल में युवाओं की अधिक भागीदारी चाहते हैं, तो उन्हें इस तरह की व्यवस्था नहीं करनी चाहिए। जब मुझे पता चला कि रजिस्ट्रेशन फीस 250 रूपए है, तो मैंने अपना प्लान कैंसिल कर दिया।
पहले दिन ही फ्लॉप शो पिछले साल हुए जेआईएफएफ में फिल्म देखने के लिए टिकट व्यवस्था नहीं रखी गई थी। उस समय ज्यादा नहीं, पर दर्शकों की संख्या बेहतर थी। इस बार रजिस्ट्रेशन फीस 250 रूपए रखने से ना तो स्टूडेंट्स फिल्म देखने आ रहे हैं ना ही बाकी लोग। ऎसे में फेस्टिवल अपने अंतिम पड़ाव तक पहुंचने से पहले ही फ्लॉप शो साबित हो गया। आयोजकों को स्टूडेंट्स से ज्यादा चार्ज नहीं लेना चाहिए था। -ज्योति सिहाग, स्टूडेंट
संख्या ना के बराबर जेआईएफएफ शुरू होने से पहले आयोजकों ने वादे किए थे कि इस फेस्टिवल से भावी फिल्म मेकर्स को काफी फायदा मिलेगा, लेकिन फेस्टिवल में हिस्सा लेकर सभी वादे झूठे लगे। जब मैं अपने दोस्तों के साथ फिल्म देखने पहुंची, उस समय कुछेक दर्शक देखने मिलेे जिनमें युवाओं की संख्या ना के बराबर थी। यहां तक की फिल्मों का स्टैंडर्ड भी बहुत लो था। यहां की वर्कशॉप से भी मुझे कुछ ज्यादा सीखने को नहीं मिला। इससे निराशा हुई। पलक दीक्षित, स्टूडेंट
200 रू. लेना सही नहीं एक तरफ यह कहना कि फेस्टिवल के माध्यम से युवाओं को फिल्म मेकिंग में एक्सपोजर मिलेगा, वहीं उन्हीं युवाओं के लिए 200 रूपए की रजिस्ट्रेशन फीस रखी जा रही है। आमतौर पर 200 रूपए तो बॉलीवुड या हॉलीवुड फिल्मों के लिए भी नहीं देना पड़ता। यहां तक की साल के सबसे बड़े आयोजन जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल के लिए भी स्टूडेंट्स से किसी तरह का चार्ज नहीं वसूला गया था। ऎसे में फेस्टिवल में दिखाई जाने वाली कुछेक फिल्मों को छोड़ दिया जाए, तो बाकी लो स्टैंडर्ड वाली फिल्मों के लिए इतने रूपए लेना बिलकुल भी उचित नहीं है। -विमला सिंह, स्टूडेंट
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