आरटीयू के मुताबिक इस साल भरे गए ऑप्शन फॉर्म और कॉलेजों में हुए एडमिशन के डाटा के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन और कम्यूटर साइंस में हुए सबसे ज्यादा एडमिशन, सिविल इंजीनियरिंग में इंट्रेस्ट अब भी बरकरार जयपुर। राजस्थान तकनीकी शिक्षा मंडल की ओर से आयोजित की गई आरपीईटी परीक्षा की फर्स्ट काउंसलिंग पूरी हो चुकी हैं। सभी बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटें पूरी भरी जा चुकी हैं। आरटीयू के पास कॉलेजों में सीटों की स्थिति की भी पूरी डिटेल आ चुकी है। फिलहाल आरटीयू की ओर से खाली रही सीटों में अपवर्ड मूवमेंट चल रहा है। आरटीयू के मुताबिक पिछले कुछ सालों के मुकाबले इस साल कोर ब्रांचेज को छोड़कर स्टूडेंट्स इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस जैसी स्ट्रीम्स में इंट्रेस्ट दिखा रहे हैं। आरटीयू के अनुसार इस बार कोर ब्रांचेज में सिविल इंजीनियरिंग को छोड़कर बाकी सभी ब्रांचेज में स्टूडेंट्स ने इंट्रेस्ट कम दिखाया है। यह रही स्थिति आरटीयू के पास आए ऑप्शन फॉर्म और कॉलेजों की तरफ से प्रोवाइड कराई गई सीटों की स्थिति के बारे में जानकारी के मुताबिक अब तक सबसे ज्यादा एडमिशन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन में हुए हैं। इसके बाद कंप्यूटर साइंस में स्टूडेंट्स ने एडमिशन लिया है। गौरतलब है कि आरटीयू की ओर से 37 ब्रांचेज प्रोवाइड कराई गई हैं, जिनमें से अधिकांश कॉलेजों में 14 ब्रांचेज ही हैं। यही 14 ब्रांचेज में सीटें पूरी पैक हो चुकी है। आरटीयू के अनुसार कोर ब्रांचेज में सबसे कम एडमिशन्स आईटी में हुए हैं, जिसका रेशो 44.35 परसेंट है। इसके अलावा फूड एंड टेक्नोलॉजी में सिर्फ एक एडमिशन हुआ है। वहीं ऑटोमेशन और रॉबोटिक्स में एक भी एडमिशन नहीं हुआ है। अब तक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में 11947 और कम्यूटर साइंस में 11453 एडमिशन हुए हैं। क्यों बढ़ा है क्रेज आरटीयू की ओर से आयोजित की गई परीक्षा आरपीईटी इस बार 73000 स्टूडेंट्स ने दी थी। राजस्थान में करीब 166 इंजीनियरिंग कॉलेजों में कुल मिलाकर 50032 सीट्स हैं। इसके अलावा आरटीयू से संबंद्ध 11 गवर्नमेंट कॉलेजों हैं, जिसमें सीटें पूरी भरी जा चुकी हैं। आरटीयू संबंद्ध कॉलेजों में इस बार सीटें 47547 हो गई हैं। एक इंजीनियरिंग कॉलेज के एडमिशन कंवीनर संदीप तोषनीवाल बताते हैं, हमारे यहां 6 ब्रांचेज हैं, जिसमें सबसे ज्यादा एडमिशन इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्यूटर साइंस में हुआ है। वहीं सिविल इंजीनियरिंग में भी स्टूडेंट्स का इंट्रेस्ट बना हुआ है। इसकी वजह शायद इलेक्ट्रॉनिक्स फील्ड में लगातार बढ़ती अपॉच्र्युनिटीज है। पिछले दो तीन सालों में कम्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी कई बड़ी कंपनियां भारत में आ रही हैं। इसी फील्ड में जॉब्स अपॉच्र्युनिटीज भी बढ़ रही हैं। कोर ब्रांचेज में सिर्फ सिविल इंजीनियरिंग सभी कोर ब्रांचेज में स्टूडेंट्स का इस साल कम ही इंट्रेस्ट दिखा है, वहीं सिविल इंजीनियरिंग में स्टूडेंट्स का इंट्रेस्ट अब भी बरकरार है। जयपुर के करीबन सभी प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिविल इंजीनियरिंग की सीटें फुल हैं। एक इंजीनियरिंग कॉलेज की एडमिशन कंवीनर चांदनी कृपलानी बताती हैं, हमारे यहां सभी सात ब्रांचेज में सबसे ज्यादा एडमिशंस इलेक्ट्रॉनिक्स में हुए हैं। उसके बाद कंप्यूटर साइंस और मैकेनिकल का रेशो करीबन बराबर ही है। सिविल इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिए काफी क्वेरीज आई हैं। सिविल इंजीनियरिंग में रूचि की वजह रिटेल सेक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे ज्यादा जॉब्स अपॉच्र्युनिटीज को माना जा रहा है। अभी तक हुए एडमिशन के डाटा के मुताबिक सबसे ज्यादा एडमिशन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन और कम्यूटर साइंस में हुए हैं। सिविल इंजीनियरिंग को छोड़कर दूसरी कोर ब्रांचेज के लिए स्टूडेंट्स ने ऑप्शन फॉर्म में कम ही प्रायोरिटी दी है। 37 ब्रांचेज में से ऑटोमेशन एंड रोबोटिक्स में पूरे राजस्थान के कॉलेजों में एक भी एडमिशन नहीं हुआ। एमआर पुरोहित, एनालिसिस कम प्रोग्रामर, बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन
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