जयपुर। उड़ीसा के मंदिरों में किया जाने वाला शास्त्रीय नृत्य "ओडिसी" का प्रदर्शन शहर के स्टूडेंट्स के लिए बेहद ही खास रहा। मंगलवार को स्पिक मैके की विरासत श्ृंखला के तहत दिल्ली की ओडिसी नृत्यांगना कविता द्विवेदी ने भावपूर्ण प्रस्तुति से स्टूडेंट्स को रूबरू कराया। शास्त्री नगर स्थित टैगोर पब्लिक स्कूल के सभागार में आयोजित हुए कार्यक्रम की शुरूआत में कविता ने मंच संभालते हुए अपने पौराणिक नृत्य की बारीकियों से स्टूडेंट्स को अवगत कराया। उन्होंने मंगलाचरण में देवी-देवताओं की स्तुति को पेश किया। इसके बाद उड़ीसा की संस्कृति को साकार करते पल्लवी ने विभिन्न मुद्राओं को शानदार तरीके से पिरोया। उनके नृत्य में तकनीकी विवरण शैली और सौंदर्य का एक समूह देखा जा सकता था। उनके नृत्य की जुड़वा ताकतों में भक्ति और शक्ति का समावेश था। इसके अलावा नौ रसों का समावेश इतना प्रभावी था कि स्टूडेंट्स एक बारगी तो उनके नृत्य में खो से गए। भाव-भंगिमाओं से भरपूर कविता ने नृत्य में ब्रह्मा, विष्णु और महेश पर आधारित स्तुति के माध्यम से कोणार्क मंदिर में लगी मूर्तियों जैसी मुद्राएं बनाकर अपनी कला का उम्दा प्रदर्शन किया। इसके बाद कविता ने दुर्गा तांडव में अंगों की चपलता, वीर, क्रोध तथा रौद्र रस का प्रदर्शन करते हुए पांच स्थितियों सृष्टि, स्थिति, तिरोभाव, आविर्भाव एवं संहार का क्रमबद्ध रूप में शानदार प्रदर्शन किया। उनके नृत्य में नौ रसों के साथ मृगछाला, सिर पर जटा, तीसरा नेत्र, अंगों पर सर्प की उपस्थिति का संकेत, जटाओं में चंद्रमा अर्थात शिव की वेशभूषा व अभंग, समभंग, त्रिभंग और अतिभंग मुद्राएं देखने योग्य थी। अंत में कविता ने उडिया गीत के माध्यम से कृष्णलीला की भक्ति को साकार किया। उनके साथ गायन पर सुकांत कुमार कुंदु, मृदंगम पर रामचन्द बेहड़ा और बांसुरी पर प्रभु प्रसाद बेहड़ा ने संगत की।
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