आज स्थिति यह है कि अपना काम निकलवाने के लिए लोग सरकारी कर्मचारियों को घूस देते हैं। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि भ्रष्टाचार की ताली दोनों हाथों से बजाई जा रही है। भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए हर व्यक्ति को यह तय करना होगा कि वह अपना काम बिना किसी रिश्वत दिए कराएगा, चाहे उसे कितना ही कष्ट झेलना पड़े। चाहे उसका काम हो या नहीं हो, लेकिन किसी को एक पैसा भी रिश्वत का नहीं देगा। उसे तय करना होगा कि चाहे उसे किसी प्रकार की धौंस झेलनी पड़े, प्रताड़ना का शिकार होना पड़े, सजा भुगतनी पड़े, आर्थिक दंड भुगतना पड़े, लेकिन रिश्वत के रूप में एक रूपया भी नहीं देगा। जब यह संकल्प हम कर लेंगे तो कोई रिश्वत मांगने का साहस नहीं करेगा। - सुगन चंद गर्ग, मलिकपुर (जयपुर)
फेस्टिवल का इंतजार जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल का आयोजन राजधानी जयपुर शहर के लिए मानो एक सौगात लेकर आया। सलमान रश्दी प्रकरण के बावजूद इस बार फेस्टिवल की बात ही कुछ और थी। दुनिया भर के जाने-माने लेखकों का यहां जमावड़ा रहा। मुझे लगता है कि इस तरह के फेस्टिवल होते रहने चाहिए। साहित्य प्रेमियों को अपने पसंदीदा लेखकों से मिलने का मौका मिलता है। साथ ही कुछ ज्ञान भी बढ़ता है। ऎसा मौका अन्यत्र मिलना मुश्किल है। वैसे मै पिछले दो वर्षो से इस समारोह मै पूरी तरह से अपनी पत्नी के साथ हिस्सा ले रहा हूं। अगले साल के समारोह का अभी से इंतजार है। - सोमेन्द्र हर्ष, सी स्कीम, जयपुर
बिखर गई टीम यह क्या हो गया है भारतीय क्रिकेट टीम को? पूरी भारतीय क्रिकेट टीम बिखर गई। इंग्लैण्ड के बाद ऑस्ट्रेलिया में भारत की शर्मनाक हार ने बहुत कुछ सोचने के लिए मजबूर कर दिया। आस्ट्रलिया की टीम इतनी पॉवररफुल भी नहीं है कि भारत को इतनी शर्मनाक हार का सामना करना पड़े। ऎसा लगता है कि या तो मैच फिक्स हो गए या खिलाड़ी किसी दूसरी वजह से चलाकर नहीं खेले। जो भी हो, इससे भारत की साख खराब हुई है। - रामनरेश गुप्ता, विवेक विहार, सोडाला, जयपुर
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