राजस्थान विश्वविद्यालय में पांच साल बाद छात्रसंघ चुनाव होने जा रहे हैं। इन चुनाव पर लगी रोक हटा दी गई है। कहीं न कहीं इनकी रोक के पीछे यह कारण भी रहा कि ये चुनाव अपने उद्देश्यों से भटक गए थे। इसमें कोेई दोराय नहीं कि लोगों की इन चुनावों प्रति यही मानसिकता है कि ये केवल हुड़दंग का काम है। छात्रहितों का इससे कोई वास्ता नहीं होता, लेकिन अब विद्यार्थियों को यह साबित कर दिखाना है कि छात्रसंघ चुनाव कितने जरूरी हैं। विद्यार्थियों के हित में हैं। उन्हें लिंगदोह कमेटी की सभी सिफारिशों के अनुसार ही चलना है। किसी भी तरह के शोर-शराबे से लोगों को परेशान नहीं करना है। दूसरा जीतने वाले को यह ध्यान में रखना है कि उसे छात्रहितों के लिए काम करना है। छात्रसंघ लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए बेहद जरूरी हैं। छात्रों के लिए राजनीति सीखने का जरिया हैं। - अतुल वर्मा, मानसरोवर मानसून से राहत इस बार राज्य में अच्छी बरसात होने से आम आदमी को कई तरह से राहत मिली है। जहां लोगों को यह उम्मीद है कि महंगाई कम होगी, वहां पानी की समस्या भी कम हुई है। यह वाकई सुखद है। वरना पानी का संकट गहराता जा रहा था। फसलें भी बर्बाद हो रही थीं, लेकिन अब किसानों के चेहरे खिले हैं। इसके अलावा प्रशासन को इससे काफी फायदा हुआ है। जहां ट्रेनों से पानी से पहुंचाया जा रहा था, उसे रोकने से राजस्व में इजाफा हुआ है। इसके अलावा बिजली की भी काफी बचत हुई है। अब सरकार को शहर में ड्रेनेज सिस्टम के बारे में सोचना चाहिए। दूसरा वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर भी नियम बना देने चाहिए, ताकि भविष्य में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सके। सूखे से बचने के लिए ये उपाय कारगर हैं। - ललित गर्ग, आगरा रोड
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