देश में एक ओर गरीब दाने-दाने को मोहताज है और भुखमरी विकराल रूप धारण करती जा रही है, वहां दूसरी ओर गोदामों में और उचित भंडारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण अनाज सड़ रहा है। हालात यह हैं कि सड़ा हुआ अनाज जानवरों के खाने लायक भी नहीं है। यह देखकर बेहद दुख होता है। कैसे हो गए हैं आज हमारे देश के नेता। आम आदमी की कोई परवाह नहीं। अनाज का सड़कर बर्बाद होना उन्हें मंजूर है, लेकिन गरीबों को बांटना नहीं। चुनाव में बड़े-बड़े वादे करके सत्ता सुख पाने वाले इन नेताओं को खुद पर शर्म आनी चाहिए। वे देश को ही खोखला कर रहे हैं अपने तुच्छ स्वार्थो की पूर्ति के लिए। इनकी सोच में तो सुधार आने वाला है नहीं।
इसलिए अब जरूरी हो चला है कि जनता जागरूक हो। इस तरह के हालात में जनता को आंदोलन कर देना चाहिए। दूसरा जनता के इस काम में प्रबुद्ध वर्ग को उनका साथ देना चाहिए। उनकी अगुवाई में जब लोग सड़क पर उतर आएंगे, तो निश्चित रूप से व्यवस्था में सुधार होगा। तीसरा जनप्रतिनिधियों के आचरण में सुधार लाने और उन पर नकेल कसने के लिए जरूरी है कि संविधान में संशोधन किया जाए। कुछ इस तरह की व्यवस्था की जाए कि अगर कोई नेता या अधिकारी अपना काम सही तरीके और ईमानदारी से नहीं करे, तो उसे पांच साल से पहले ही सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने का जनता को कानूनन अधिकार प्राप्त हो। इसके बाद ही सुधार की आशा की जा सकती है। - विनय गुप्ता, सोडाला
स्वाइन फ्लू राज्य में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। स्वाइन फ्लू बड़े स्तर पर पहले की तरह न फैल सके, इसके लिए राज्य सरकार को अभी से पुख्ता प्रबंध कर लेने चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को सचेत हो जाना चाहिए। बाहर से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग होनी चाहिए। लोगों को भी सावधान रहना चाहिए। घर से बाहर मास्क लगाकर निकलें। साफ-सफाई पर ध्यान दें। अस्पतालों में इसके मरीजों के लिए अलग से ओपीडी, आइसोलेशन वार्ड और आईसीयू वार्ड की व्यवस्था की जाए। - नीता अवस्थी, चित्रकूट
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