सांसदों के वेतन-भत्ते बढ़ाने की मांग को लेकर लोकसभा की कार्यवाही का स्थगित होना बेहद दुखद स्थिति है। अव्वल तो यह कि सांसदों के वेतन-भत्ते इतने भी कम नहीं हैं कि उसे बढ़ाना अतिआवश्यक हो। दूसरा इसके लिए सदन की कार्यवाही स्थगित होना सरासर गलत और शर्मनाक है। सदन में बैठे नेतागण क्या यह बात भूल जाते हैं कि वह जगह देश की समस्याओं और उनके समाधान ढूंढने के लिए है और यही उनका कर्तव्य है। वैसे भी फिलहाल इस समय देश के सामने दूसरी कई विकट समस्याएं खड़ी हुई हैं। सभी दलों के नेताओं को उस ओर अपनी ऊर्जा लगाने की जरूरत है। लालू जैसे नेताओं को यह बात समझनी होगी कि वेतन-भत्ते बढ़ाने की मांग बाद में भी की जा सकती है। कम से कम सांसदों को इतना तो मिल ही रहा है कि वे चैन से खा-पी सकें। उस आम आदमी जैसे हालात तो नहीं हैं, जिसे दो वक्त की रोटी नसीब नहीं हो रही है। - स्नेहा रानी, मानसरोवर असभ्यता का प्रदर्शन हमारे देश की बहुरंगी संस्कृति को देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक हमारे यहां आते हैं। हमारा कर्तव्य है कि हम अपने विदेशी मेहमानों का स्वागत करें और उनके साथ अच्छा व्यवहार करें, लेकिन देखने में आता है बहुुत से लोग उन्हें परेशान करते हैं। उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। इससे पूरी दुनिया में भारत का नाम खराब होता है। हमारे पर्यटन उद्योग को भी नुकसान पहुंचता है। सभी को इस बारे में संवेदनशील होने की जरूरत है। - अनिल मंडावत, दादी का फाटक
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