इन दिनों सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। जयपुर में जगह-जगह होर्डिंग लगे हुए हैं, जिन पर सुरक्षित यातायात से जुड़े नारे लिखे हुए हैं। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस सक्रिय है। नागरिक संगठनों को भी सहयोग लिया जा रहा है। यातायात नियमों की पालना से निश्चित रूप से हादसों पर अंकुश लगता है। दुपहिया वाहन चालक यदि हेलमेट लगाए और कार में सीट बेल्ट लगाई जाए तो दुर्घटना होने पर गंभीर चोट का खतरा कम हो जाता है। गति सीमा का ध्यान रखने पर भी हादसों से बचाव होता है। पूरी तरह प्रशिक्षित होने पर ही वाहन चलाना चाहिए। आजकल किशोर भी मोटरसाइकिल चलाते नजर आते हैं। उनके पास न लाइसेंस होता है और न ही वे यातायात नियमों को समझते। वे गतिसीमा का भी ध्यान नहीं रखते। ऎसे में वे खुद तो दुर्घटनाग्रस्त होते ही हैं, दूसरों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। अभिभावकों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - रामजीलाल मीणा, प्रतापनगर, जयपुर
यह कैसी पढ़ाई आजकल बच्चों पर पढ़ाई का भारी बोझ है। हर बच्चे के मां-बाप यह चाहते हैं, उसका बच्चा हर बार बहुत अच्छे अंक लेकर आए। जब ऎसा नहीं होता तो बच्चे की शामत आ जाती है। ऎसा लगता है जैसे स्कूल रणक्षेत्र बन गए हैं, जहां अभिभावक अपने बच्चों को अंकों की जंग लड़ने के लिए भेजते हैं। ऎसी जंग बच्चों को कुंठित और रोगी बना रही है। यह कैसी पढ़ाई है? - गोविंद शर्मा, अजमेर रोड जयपुर
उपयोगी सेवा राज्य में रोगियों के लिए 104 नंबर की हेल्पलाइन सेवा शुरू की गई है। अब इस नंबर पर डायल करके कोई भी व्यक्ति अपने रोग के बारे में डॉक्टर की राय ले सकता है। यदि इसका संचालन सही तरीके से हुआ तो यह सेवा बेहद उपयोगी साबित होगी। सरकार ने रोगियों को मुफ्त दवा देने की योजना पहले ही शुरू कर दी है। इसी तरह से 108 एंबुलेंस सेवा भी मददगार साबित हो रही है। हां, कुछ समय से 108 एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था जरूर गड़बड़ रही है। इसे सुधारना होगा। -रामलाल यादव, सांगानेर, जयपुर
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