डेली न्यूज में 21 जुलाई को डॉ. ज्ञान प्रकाश पिलानिया का "अबला की चीख पर चुप्पी" आलेख पढ़ा। आलेख में उन्होंने महिला उत्पीड़न की जैसी घटनाओं का उल्लेख किया है, वैसा हमारे आसपास रोज घटता हम देख भी रहे हैं। आलेख में उन्होंने देश में पंजीकृत अपराधों के आंकड़ों से समाज को जगाने का प्रयास किया। इस आलेख के लिए उन्हें धन्यवाद, लेकिन मेरी नजर में इस उत्पीड़न के लिए महिलाएं ही सर्वाधिक जिम्मेदार हैं। मेरे जीवन में भी में ऎसी तीन-चार घटनाएं हो चुकी है, जब किसी महिला की इज्जत बचाने का प्रयास खुद पर ही भारी पड़ गया। कहने का मतलब यह है कि जब तक महिलाएं अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के प्रति मूक दर्शक बनी रहेगी, तो उनकी इज्जत बचाना किसी के वश में नहीं होगा। महिलाओं को खुद की, अपने सम्मान की रक्षा के लिए आगे आना ही होगा, तभी समाज और कानून उनका साथ दे पाएंगे। - अखिलानंद बोहरा, जवाहर नगर स्वाइन फ्लू देश में स्वाइन फ्लू की दस्तक चिंताजनक है। इससे बचाव के सरकारी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सभी की जागरूकता से ही इस तरह की बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। वैसे भी बारिश का मौसम बीमारियों का सीजन माना जाता है। इस मौसम में विशेषकर बच्चों का पूरा ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि किसी भी मौसमी बीमारी के सर्वाधिक शिकार बच्चे ही होते हैं। घर में भी साफ-सफाई रखने के साथ सब्जी व फलों का उपयोग भी धोकर करना चाहिए। - रवि कुमार, अनिता कॉलोनी
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