डेली न्यूज के 8 अगस्त के संस्करण में पढ़ा कि गत बीस साल में एक करोड़ बालिकाओं को कोख में ही मार दिया गया। इसका अर्थ यह हुआ कि औसतन पांच लाख बेटियों की हर साल हमारे देश में हत्या हो रही है। हमारा देश धर्मपरायण देश माना जाता है। देश में तकरीबन दुनिया के सभी धर्म-संप्रदाय के अनुयायी रहते हैं। लोगों की धर्म के प्रति आस्था भी बढ़ रही है और साधु-संतों की संख्या में भी आश्चर्यजनक रूप से बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन भ्रूण हत्या का ग्राफ हमारे पाखंड को इंगित करता है। भ्रूण हत्या भी मानव हत्या के समान अपराध है, ऎसा सभी मानते भी हैं, लेकिन फिर क्या वजह है कि इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। इससे स्त्री-पुरूष का अनुपात भी गड़बड़ा रहा है। स्थिति यह हो रही है कि हमारे देश में हर साल पांच लाख युवक कुंवारे ही रहने को विवश हो रहे हैं। इस असंतुलन से को रोकने के कारगर उपाय नहीं किए गए तो आने वाले सालों में लिंग अनुपात पूरी तरह गड़बड़ा जाएगा। - घेवरचंद गोदीका, किशनपोल बाजार सड़कें सुधरे बारिश के कारण खराब हो रही शहर की सड़कों को सुधारने की कार्रवाई त्वरित प्रभाव से होनी चाहिए, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। सड़क निर्माण का जिन फर्मो को ठेका दिया जाता है, उनकी भी सतत मॉनीटरिंग होनी चाहिए। सड़क बनाते समय ही यदि पूरा ध्यान दिया जाता तो ऎसी स्थिति पैदा ही नहीं होती। सड़कें टूटने का एक कारण जल निकासी की प्रयाप्त व्यवस्था नहीं होना भी है। सड़क पर लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण भी टूट जाती है। ऎसे में यह भी जरूरी है कि जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि यातायात भी बाधित न हो। - मनीष कुमार, महावीर नगर
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