शहर में मिलावटखोरों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जितना शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चलाया जा रहा है, उतना ही मिलावट का बाजार बढ़ता जा रहा है। कोई भी चीज ऎसी नहीं है, जिसमें मिलावट नहीं की गई हो। मिलावटखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं और धड़ल्ले से कर रहे हैं। चिंताजनक और दुखद तो यह है कि दवाइयां भी इससे नहीं बची हैं। राज्य सरकार को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। केवल अभियान चलाने भर से कुछ नहीं होता। अभियान भी ऎसा हो कि मिलावट पर अंकुश लग सके। मिलावट पर रोक लगाने के कड़े कदम उठाने होंगे। मिलावटखोरों को जब तक सख्त से सख्त सजा नहीं मिलेगी, तब तक मिलावट का व्यापार ऎसे ही फलता-फूलता रहेगा। सजा होगी, तो दूसरों की ऎसा करने की हिम्मत नहीं होगी। दूसरा इस धंधे को रोकने के लिए जरूरी है कि हर व्यक्ति जागरूक हो। सभी सरकार का सहयोग करें। कहीं भी मिलावट का शक हो, उस दुकानदार की जानकारी सरकार को दें। जनता के सहयोग के बिना सार्थक परिणाम नहीं आ सकते हैं। - विनय रावतानी, आदर्श नगर ट्रैफिक रूल्स राजधानी की सड़कों पर निकलने वाले ज्यादातर लोगों को ट्रैफिक रूल्स पता हैं। शायद ही कोई ऎसा होगा, जो यह नहीं जानता कि रेड लाइट होते ही रूकना है और जेबरा लाइन्स से पहले गाड़ी को रोकना है, लेकिन अक्सर देखने में आता है कि लोग इन नियमों का पालन नहीं करते। ट्रैफिक पुलिस की नजर चूकी नहीं कि रेड लाइट होने पर भी गाड़ी निकाल ले जाते हैं। क्या उन्हें यह बात समझ में नहीं आती कि यह सब उन्हीं की सुरक्षा के लिए है। दूसरा इसी से हादसे होते हैं। कुछ लोगों की गलती दूसरों पर भारी पड़ती है। वाहन चलाने वालों को पैदल चलने वालों पर भी ध्यान देना चाहिए। शहर की छवि वहां रहने वालों के अच्छे सार्वजनिक व्यवहार और सरकारी नियमों के प्रति संवेदनशील होने से बनती है। जयपुर वल्र्ड क्लास सिटी बने इसके लिए हरेक को यह बात अमल में लानी होगी। - नीति तैलंग, बनीपार्क
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