कश्मीर में दिनोंदिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं। हिंसा, उपद्रव और आतंकी हमलों की वजह से घाटी सुलग रही है। पुरूषों के साथ युवा, बच्चे और यहां तक की महिलाएं भी सड़क पर उतर आई हैं। पुलिस पर लोग पत्थर फेंकते हैं। वहां की अवाम में जो आक्रोश है, उसके बारे में सरकार को सोचना होगा। तभी घाटी में शांति संभव है। सरकार जम्मू एवं कश्मीर को खास आर्थिक सहायता देती है। फिर भी लोग असंतुष्ट हैं। इसका कारण है जनता तक उस पैसे का लाभ न पहुंचना और बेरोजगारी। यही कारण है कि वे कट्टरपंथी संगठनों की बातों में आ जाते हैं। सवाल यह है कि राज्य को विशेष दर्जा मिलने के बाद भी आम आदमी को क्या हासिल हुआ है? इस बात पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को विचार करना चाहिए और फिर समस्या के समाधान के प्रयास करने चाहिए। - स्वप्निल जोशी, मानसरोवर सीबीआई पर सवाल अगर देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी के कामकाज पर भी सवाल उठने लगे हैं, तो यह चिंताजनक है। कुछ समय से सीबीआई की निष्पक्षता पर जिस तरह के सवाल खड़े हुए हैं, उससे लगता है कि ऎसे तो देश का बंटाधार होना तय है। नेताओं को कम से कम सीबीआई को तो अपना काम स्वतंत्रता से करने देना चाहिए। सीबीआई में भी भ्रष्टाचार की खबरें आती रहती हैं। इससे जनता को निराशा होती है। इसलिए उसे देशहित को ध्यान में रखते हुए अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी चाहिए। किसी के दबाव में काम नहीं करना चाहिए। - अनुष्का शर्मा, लालकोठी
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