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Saturday, 19 May, 2012
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नौकर के वेश में अपराधी
Monday, January 30, 2012, 08:26 hrs IST
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करीब तीन माह पहले टोंक रोड पर एक अस्पताल के निदेशक के घर से दस लाख रूपए चुराकर फरार हुए घरेलू नौकर दंपत्ति को सांगानेर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि इस दंपत्ति ने फर्जी दस्तावेज के जरिए डॉक्टर के यहां नौकरी हासिल की थी। डॉक्टर ने नौकर दंपत्ति का पुलिस वेरीफिकेशन भी नहीं करवाया था। यदि पुलिस वेरीफिकेशन करवाया जाता तो भागने की उनकी हिम्मत नहीं हो पाती। इससे पहले भी इस तरह की कई वारदातें हो चुकी है, लेकिन पता नहीं लोग पुलिस सत्यापन करवाने से क्यों कतराते हैं। घरेलू नौकर के वेश में घरों में घुस रहे अपराधियों की रोकथाम के लिए जरूरी है कि छोटी से छोटी जानकारी पुलिस को दी जाए। किसी को नौकर रखन से पहले उसका पुलिस वेरीफिकेशन करवाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाना जरूरी है। साथ ही यह भी सख्ती की जानी चाहिए कि बार-बार आग्रह और चेतावनी के बावजूद भी जो लोग अपने नौकरों का पुलिस वेरीफिकेशन नहीं करवा रहे हैं, उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई में अमल में लाई जानी चाहिए।
-राजेंद्र गुप्ता छिन्दी, सांगानेर, जयपुर

सर्वमान्य समाधान
बहुत ही अफसोस की बात है कि न तो मानसरोवर समग्र विकास समिति और ना ही जयपुर विकास प्राधिकरण, और नगर निगम जयपुर बी टू बायपास का सही हल निकाल पा रहे हैं। दुर्घटनाओं से छुटकारा पाने का सर्वश्रेष्ठ इलाज है अंडरब्रिज। अगर एसएफएस अग्रवाल फार्म में दो अंडरपास बना दिए जाएं तो दुर्घटनाओं से निजात मिल सकती है। पहला अंडर पास हंस मंदिर से द्वारकादास उद्यान तक तथा दूसरा अंडर पास मध्यम मार्ग से क्योरवेल अस्पताल तक बना दिया जाए तो ट्रैफिक में न तो ट्रक चालकों को तकलीफ होगी और न ही एसएफएस से मानसरोवर जाने वालों को। यह एक व्यावहारिक सुझाव है, इस पर विचार किया जाना चाहिए।
- सी.के. गोस्वामी, मानसरोवर जयपुर

मानसिक विकृति
विरोध और अपमान में फर्क समझा जाना चाहिए। बाबा रामदेव पर विरोध स्वरूप जो काली स्याही फेंकी गई है, उसे विरोध की बजाय अपमान कहना चाहिए। यदि किसी को किसी मुद्दे पर नाराजगी है, तो अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर सकता है। इससे भी यदि उसे संतुष्टि नहीं मिले तो वह विरोध स्वरूप अनशन कर सकता है, लेकिन किसी को अपमानित करके कुछ हासिल नहीं किया जा सकता है। इस तरह की हरकत को मानसिक विकृत कहना ही ज्यादा बेहतर रहेगा। इस तरह की प्रवृत्ति को रोकना चाहिए।
- किरण वर्मा, महेशवास कलां, जयपुर
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