लगता है कि हमारे देश की कृषि भी विकास और तरक्की की भेंट चढ़ जाएगी। सरकार के दिल्ली को आगरा से जोड़ने वाली तेज रफ्तार सड़क बनाने के लिए किसानों की भूमि के अधिग्रहण करने से कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। यहां सवाल यह उठता है कि इससे जहां खेती योग्य भूमि खराब होगी, वहां किसानों का भी इससे अहित होगा। सरकार किसानों को मुआवजा दे रही है, लेकिन मुआवजा भी संतुष्टिजनक नहीं है। किसान इसका विरोध कर रहे हैं। बहुत से किसान ऎसे हैं, जो भूमि देना ही नहीं चाहते हैं। मथुरा और अलीगढ़ में किसान कई दिनों से उनकी भूमि अधिग्रहण और वाजिब मुआवजा ने मिलने को लेकर आंदोलनरत हैं। किसानों का कहना है कि पैसे तो एक दिन खत्म हो जाएंगे। जमीन तो चली ही जाएगी। दूसरा मुआवजा भी कम है। सरकार को किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कम से कम मुआवजा तो सही देना ही चाहिए। किसानों को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। सरकार अगर किसानों के हितों पर ध्यान नहीं देगी, तो निश्चित रूप से किसान और उग्र होंगे। यह न सरकार के हित में है और न देश के हित में। - रूपाराम, चौमूं नक्सली समस्या देश के कई राज्य नक्सली समस्या से पीडित हैं। हमारे जवान उनके कई बड़े हमलों के बाद भी जंगलों में उनसे मुकाबला कर रहे हैं। नक्सलियों को जड़ से उखाड़ फेंकने में आम आदमी को एकजुट होकर उनका साथ देना होगा। नक्सली जो जबरन गांवों में आतंक फैलाते हैं, उन्हें जनता ही सबक सिखा सकती है। कोई भी विद्रोही संगठन कितना भी बड़ा और ताकतवर क्यों न हो, जब जनता उसे खत्म करने पर आमादा होती है, तो उसे नेस्तनाबूद होने में देर नहीं लगती। कोई इस सचाई को झुठला नहीं सकता कि स्थानीय लोगों के सहयोग से ही नक्सलियों के हौसले इतने बुलंद हुए हैं। अगर उनका सहयोग पूरी तरह से नक्सलियों को मिलना बंद हो जाए, तो यह खून-खराबा बंद हो सकता है। आम आदमी के सहयोग से हमारे जवानों का साहस बढ़ेगा और ऊर्जावान होकर वे नक्सलियों को काबू करने में जुटेंगे। - अंकुर, प्रताप नगर
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