शहर में मिलावट का कारोबार जोरों से चल रहा है। खाने-पीने की शायद ही कोई ऎसी चीज बची है, जिसमें मिलावट नहीं हो रही हो। लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते मिलावटखोरों को किसी का भय भी नहीं है। फलों को रसायनों से पकाया जा रहा है, जो सेहत के लिए जहर से कम नहीं है। सवाल यह है कि शहर में शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चलाए जाने के बाद भी मिलावट पर अंकुश क्यों नहीं लगी? इसलिए कि इस अभियान में भी दम नहीं था। अभियान केवल मिलावटी सामान पकड़ने भर तक सीमित रहे, तो इससे मिलावट तो नहीं रूक सकती। इसके लिए तो जो लोग ऎसा करते पाए गए उन्हें सजा मिलनी चाहिए थी। कड़ी कार्रवाई के तहत उनकी संपत्ति जब्त कर लेनी चाहिए थी, लेकिन ऎसा कुछ नहीं हुआ। अगर मिलावट करने वालों के लिए त्वरित सजा का प्रावधान कर दिया जाए, तो उनमें डर पैदा होगा और तब कहीं जाकर लोगों को शुद्ध खाने-पीने की सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। - राजेंद्र बंसल, तिलक नगर हरियाली में योगदान बारिश के मौसम में पौधे लगाकर शहर को हरा-भरा बनाया जा सकता है। अपने शहर को स्वच्छ और खूबसूरत बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है। इसमें सभी की भूमिका होनी चाहिए। कुछ लोग यह काम कर रहे हैं। अगर सभी इस काम में अपने स्तर पर योगदान दें, तो जयपुर हरा-भरा शहर हो जाएगा। सभी को इस सोच के तहत काम करना चाहिए कि शहर उनका है, तो उसे संभालने की जिम्मेदारी भी उनकी ही है। - नीरा शर्मा, हीरापुरा
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