आए दिन सरकारी कर्मचारी और अधिकारी रिश्वत लेते पकड़े जाते हैं। छोटे से छोटे स्तर का कर्मचारी रिश्वत ले रहा है। रिश्वत के बिना आज हमारे देश में कोई काम होता ही नहीं है। गहराई तक रिश्वत की जड़ें फैल चुकी हैं। दुखद यह है कि देने वाला भी रिश्वत देकर अपने काम करवा रहा है, ताकि उसे कोई लंबी कवायद नहीं करनी पड़े। आखिर क्या वजह है कि रिश्वत सभी को रास आ रही है। चाहे वह लेने वाला हो या देने वाला। उसका प्रमुख कारण यह है कि रंगे हाथों रिश्वत लेते और देते हुए पकड़े जाने के बाद भी किसी को सजा नहीं मिलती। रिश्वतखोरों के साथ कड़ाई बरती जाती, तो आज ये हालात नहीं होते। न किसी को सख्त सजा दी जाती है और न किसी पर कोई जुर्माना लगाया जाता है। ऎसा इसलिए होता है, क्योंकि यह काम पूरी तरह से एक सिस्टम के तहत हो रहा है, जहां पकड़ने और पकड़वाने वालों सभी की मिलीभगत होती है। सबके अपने-अपने हिस्से तय होते हैं। ऎसे तो कैसे होगा रिश्वत का अंत? - राम नरेश गुप्ता, सोडाला घटती सहनशीलता वर्तमान दौर में बढ़ते आत्महत्या और दरकते रिश्तों के मामले देखकर ऎसा लगता है जैसे लोगों में सहनशीलता नाम की चीज ही नहीं बची है। छोटे-छोटे कारणों का परिणाम मौत के रूप में सामने आ रहा है। यह समाज के लिए सुखद संकेत नहीं हैं। हमें अपने सामाजिक और पारिवारिक ढांचे को बनाए रखने और सुदृढ़ करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है। लोगों को यह बात समझनी होगी कि आत्महत्या या टकराव किसी भी समस्या का हल नहीं है। जीवन को सही ढंग से जीने के लिए सहनशीलता का बड़ा महत्व है। - नीमिष्ाा जैन, दौसा
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