संसद हमले के गुनाहगार अफजल गुरू की फांसी का मामला अटका पड़ा है। हमारे देश के नेता आपस में उसे लेकर एक-दूसरे पर दोषारोपण तो करते रहते हैं, लेकिन कोई इस बारे में गंभीरता से चर्चा नहीं करता कि आखिर क्यों उसे फांसी नहीं दी जा रही है और क्यों इसे लेकर देरी हो रही है। अफजल गुरू की क्षमा याचिका संबंधी फाइल अब तक राष्ट्रपति तक नहीं पहुंची है। इस मामले में सरकार जिस लचर तरीके से काम रही है, उससे एक बात तो स्पष्ट है कि देश की परवाह किसी को नहीं है। मुंबई हमले के मुख्य आरोपी कसाब का भी कुछ नहीं हुआ और आगे भी शायद ही कुछ होगा। इससे देशवासियों और उन लोगों का मनोबल टूटता है, जो देश की सुरक्षा में डटे हैं। सरकार को ऎसे आतंकियों को सजा देने में देरी नहीं करनी चाहिए। देरी से आतंकियों के हौसले भी बुलंद होते हैं। - शीला दीक्षित, त्रिवेणी नगर गिरते मूल्य पूरे देश में समाज में जिस तरह की घटनाएं हो रही हैं, उससे एक बात साफ है कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों में तेजी से गिरावट आ रही है। जुड़ाव और प्यार सभी रिश्तों में कम होता जा रहा है। इसके पीछे कहीं स्वार्थ आड़े आ रहा है, तो कहीं रूपया-पैसा। हालात यह हैं समाज बिखर रहा है। भावी पीढ़ी भटक रही है। हमारी संस्कृति के पहचान परिवार अपना महत्व खोते नजर आ रहे हैं। अपनी सभ्यता और संस्कृति कमजोर पड़ती नजर आ रही है। समाज के प्रबुद्ध वर्ग को समाज को संभालने में खास भूमिका निभानी होगी। - विशाल सिंह, विद्याधर नगर
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