कभी पूरे देश में जयपुर शहर की यह छवि थी कि यह बेहद शांत और सुरक्षित शहर है, लेकिन आज स्थिति एकदम उलट है। कभी ऎसा था यह बात एकदम सही है, पर आज जयपुर अपराधों का गढ़ बनता जा रहा है। हाल ही मालवीय नगर में जिस तरह चोरों ने एक घर के लोगों को बंधक बनाकर मारा-पीटा और नगदी व सामान चुरा कर भाग छूटे, उससे यह तो साफ है कि चोरों के हौसले बुलंद हो चुके हैं। उन्हें किसी का भी डर नहीं है। पुलिस को तो वो कुछ समझते ही नहीं हैं। सचाई यही है कि आज जयपुरवासी डरे हुए हैं। कोई भी चैन से नहीं जी पा रहा है। सबको यही डर बना रहता है कि पता नहीं कब उनके घर का नंबर आ जाए। रात को घरों में लोग जागने लगे हैं। कोई एक सोता है, तो दूसरा जागता है। यह अब कोई छोटी-मोटी समस्या नहीं रह गई है। प्रशासन को अब ठीक तरह से काम करने की जरूरत है। अगर पुलिस विभाग सही तरीके से काम करे, तो ऎसा संभव ही नहीं है कि अपराधों पर रोक न लग सके। आज जो हालात हैं, उन्हें देखते हुए राज्य सरकार को समय रहते जल्द से जल्द ठोस और कारगर कदम उठाने की जरूरत है। वरना वह दिन भी दूर नहीं होगा, जब पूरे शहर में चोरों और बदमाशों का ही राज होगा। - नीता गुप्ता, मालवीय नगर अशोभनीय आचरण हाल ही बिहार विधानसभा में हमारे जनप्रतिनिधियों का जो अशोभनीय आचरण देखने को मिला, उससे पूरी दुनिया में हमें शर्मिंदा होना पड़ा है। कभी संसद, तो कभी विधानसभा अखाड़ा बन जाती है। ये कैसे जनप्रतिनिधि हैं, जिनकी कोई इज्जत ही नहीं है। ये फिर जनता के हितों और उसके मान-सम्मान की भला कैसे रखवाली करेंगे? दुखद है कि लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। अगर ऎसा ही होता रहा, तो हम खुद अपनी बर्बादी के जिम्मेदार होंगे। अराजकता ऎसे ही पैदा होती है और पनपती है। समाज के प्रबुद्ध वर्ग को इस ओर ध्यान देना होगा और मिलकर सार्थक कदम उठाने होंगे। जनता को भी भ्रष्ट और गैर जिम्मेदार नेताओं को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए। - चंद्र भूषण, राम नगर
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