Daily News
Tuesday, 07 February, 2012
 |   |   |   |   |   |   |   |   |   |   | 
कैशलेस झगड़े पर विराम
Saturday, July 31, 2010, 00:42 hrs IST
Email Print Comment min  max | Bookmark and Share
Left
b1t
Left
नई दिल्ली। उद्योग संगठन सीआईआई के दखल से कैशलेस मेडिक्लेम विवाद का हल निकलता दिख रहा है। सीआईआई ने कैशलेस मेडिक्लेम विवाद सुलझाने के लिए अस्पतालों और बीमा कंपनियों ने मिलकर एक विशेषज्ञ कमेटी बनाई है।

यह समिति अस्पतालों और बीमा कंपनियों से बात करने के बाद 30 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। विशेषज्ञ समिति को कैशलेस मेडिक्लेम के स्थायी समाधान निकालने के लिए कहा गया है। सीआईआई की शुक्रवार को हुई बैठक में अपोलो, फोर्टिस, मैक्स, मेदांता के साथ चारों बीमा कंपनियों के चेयरमैन शामिल हुए।

विशेषज्ञ समिति में मैक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन परवेज अहमद, टीपीए की तरफ से पवन भल्ला शामिल होंगें। ये लोग रोजाना बैठक कर इस मामले का जल्द हल सीआईआई को सुझाएंगे।

यही नहीं जब तक इस विवाद का कोई स्थायी हल नहीं निकल जाता तब तक सरकारी स्वास्थ्य बीमा कंपनियां दिल की बीमारी, आईसीयू, ट्रॉमा, इमरजेंसी के लिए बड़े अस्पतालों में कैशलेस सेवा बहाल रखेंगे। सीआईआई की बैठक में शामिल हुए फोर्टिस हेल्थकेयर के एमडी शिवेंद्र मोहन सिंह ने कहा कि इस पूरे मामले पर नए
सिरे से विचार करने की जरूरत है। पिछले नौ साल में हेल्थकेयर की लागत तीन सौ नब्बे फीसदी यानी करीब पांच गुनी हुई है।

इरडा ने पल्ला झाड़ा
मुंबई। बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने कैशलेस विवाद से पल्ला झाड़ लिया है। आईआरडीए का कहना है कि स्वास्थ्य बीमा कंपनियां और अस्पताल ही मिलकर इस समस्या को हल करें, क्योंकि इलाज के लिए एक जैसी दरें तय करना मुमकिन नहीं है। इरडा के चेयरमैन जे. हरिनारायण ने कहा कि स्वास्थ्य बीमा पर नए मसौदे के दिशा-निर्देश जल्द आ जाएंगे।

प्रीमियम के मुकाबले क्लेम के भुगतान में कमी आ रही है। उनके मुताबिक क्लेम अनुपात करीब 70 प्रतिशत होना चाहिए। चेयरमैन ने कहा कि फिलहाल स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी धारकों की संख्या 50 लाख है और कंपनियों का लक्ष्य करीब पौने 2 करोड़ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इलाज का खर्च तय करने में पारदर्शिता होनी चाहिए। भुगतान के तरीकों से क्लेम पर बुरा असर नहीं होना चाहिए।

उनका मानना है कि हर एक अस्पताल को एक ही इलाज के लिए समान चार्ज तय करना मुमकिन नहीं है। टीपीए और अस्पतालों के बीच क्लेम भुगतान नियमों के मुताबिक नहीं है। बीमा नियामक इरडा को उम्मीद है कि कैशलेस इलाज सुविधा को लेकर जारी विवाद जल्द सुलझ जाएगा।

कई अस्पतालों में सुविधा बंद
उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियाें ने कुछ प्रमुख अस्पतालाें में मेडिक्लेम पॉलिसीधारकों से कैशलेस इलाज की सुविधा वापस ले ली थी, पर काफी होहल्ला मचने के बाद बीमा कंपनियों ने मामले दर मामले के आधार पर कैशलेस सुविधा को बहाल करने की घोष्ाणा की है। न्यू इंडिया एश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस तथा ओरियंटल इंश्योरेंस ने एक जुलाई से कैशलेस इलाज की सुविधा रोक दी थी।

इन कंपनियाें का आरोप था कि कुछ निजी अस्पताल इस सुविधा के नाम पर जरूरत से ज्यादा बिल बना रहे हैं। हालांकि, बाद में इन कंपनियाें ने कुछ मामलाें में यह सुविधा देने का फैसला किया था। हरिनारायण ने कहा, मेरी नजर में यह मामला बीमा कंपनियाें, अस्पतालों और उनके नेटवर्क के बीच कमीशन के लेनदेन से संबंधित है। यह नियमन से जुड़ा मसला नहीं है। उन्हाेंने कहा कि नियामक इस मामले में तभी हस्तक्षेप करेगा जब मेडिक्लेम पालिसी अनुबंध के बीच किसी तरह का उल्लंघन होता है।

हरिनारायण ने कहा कि यदि पॉलिसीधारक और बीमा कंपनी के बीच अनुबंध का उल्लंघन होता है, तो इरडा का मुख्य कार्य इस अनुबंध को कायम रखना है। उन्हाेंने कहा कि करार के उल्लंघन पर पांच लाख रूपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
More Stories Top News
bussiness news साख पर खतरा
bussiness news रूपए ने छुआ चार माह का शीर्ष
bussiness news कच्चा तेल 114 डॉलर पर
bussiness news स्वस्थ कारोबार के लिए नया कानून
bussiness news 16.6 लाख एसआईपी बंद
bussiness news आंशिक जीएसटी उद्योग के हित में नहीं : सीआईआई
bussiness news लीनिया व पुंटो 2012 लॉन्च
bussiness news एसटीटी के विरोध में कमोडिटी एक्सचेंज
bussiness news मनमाने शुल्कों पर लगेगा अंकुश
bussiness news एमएसएमई पर न लगे पूंजीगत कर
Copyright © Daily News. All rights reserved.