नई दिल्ली । सरकार आम आदमी को राहत देने के लिए डायरेक्ट टैक्स कोड (डीटीसी) में आयकर स्लैब को बढ़ा सकती है और कंपनियों को राहत देने के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दरें कम कर सकती है।राजस्व सचिव सुनील मित्रा ने कहा है कि डायरेक्ट टैक्स बिल में कही गई बातें पत्थर की लकीर नहीं है। उन्हें हालात और जरूरत को देखते हुए बदला भी जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार अच्छी रही तो सरकार करदाताओं और कॉरपोरेट दोनों को राहत दे सकती है। राजस्व सचिव ने कहा कि डीटीसी बिल पर विचार चल रहा है और अगर आवश्यकता पड़ी तो इसमें कॉरपोरेट पर लगने वाले कर को घटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2011 से डीटीसी लागू हो सकता है।
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