मुंबई। महंगाई और आर्थिक वृद्धि के दो पाटों के बीच फंसा रिजर्व बैंक मंगलवार को घोषित होने वाली ऋण एवं मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों में चौथाई से लेकर आधा प्रतिशत तक वृद्धि कर सकता है।
देश के व्यापक आर्थिक परिदृश्य पर केंद्रीय बैंक की सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंची मुद्रास्फीति की वजह से स्थाई वृद्धि पर खतरे को देखते हुए अक्टूबर 2009 से जिन मौद्रिक प्रोत्साहनों को वापस लेने का जो सिलसिला शुरू किया गया, उसे जारी रखा जाएगा और मुद्रास्फीति की प्रत्याशाएं पूरी तरह शांत होने और मुद्रास्फीति के नीचे आने तक यह सिलसिला जारी रहेगा।
महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा पेश करने जा रहा है। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक रेपो और रिवर्स रेपो दरों में 0.25-0.25 प्रतिशत की वृद्धि करेगा। जून में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति की दर 10.55 प्रतिशत के स्तर पर थी।
भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि मुख्य नीतिगत चिंता मुद्रास्फीतिक दबाव को कम करना तथा मुद्रास्फीतिक संभावनाओं को रोकना है। खाद्य वस्तुओं तथा र्ईधन की ऊंची कीमतों की वजह से थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति की दर पिछले पांच माह से दो अंक में बनी हुई है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ अर्थशाçस्त्रयों का कहना है कि मुद्रास्फीति अब सिर्फ खाद्य वस्तुओं तक सीमित नहीं है, पर यह विनिर्मित उत्पादों तक फैल चुकी है। वृद्धि की रफ्तार कायम रहने का संकेत देते हुए रिजर्व बैंक के पेशेवर भविष्यविदों ने 2010-11 के लिए अपने आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 8.4 प्रतिशत कर दिया है। पिछले सर्वेक्षण में आर्थिक वृद्धि दर 8.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि केंद्रीय बैंक ने आगाह किया है कि विदेशी बाजारों के अनिश्चित माहौल से भविष्य में वृद्धि दर के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
बैंकों से नकदी हुई कम बैंकिंग तंत्र में नकदी की कड़ी स्थिति के बारे में भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि इस स्थिति में सुधार होगा, पर मौद्रिक नीति को सावधानी से सामान्य किए जाने से भी तरलता की स्थिति वैसी आसान नहीं हो पाएगी, जैसी पिछले साल थी। जून की शुरूआत में 3जी और ब्राडबैंड वायरलेस एक्सेस सिस्टम स्पेक्ट्रम के भुगतान तथा अग्रिम कर की अदायगी से बैंकिंग तंत्र से 1.36 लाख करोड़ रूपए की नकदी कम हुई है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि बैंकिंग प्रणाली में ऋण का उठाव बढ़ रहा है। खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस मामले में आगे हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि ऎसे में बैंकों को ऋण की मांग को पूरा करने के लिए जमा को बढ़ाने के लिए कदम उठाने चाहिए।
|
|
|
|
|
|
|