नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में प्रमुख दरो में वृद्धि किए जाने की संभावना और लागत बढ़ने से कंपनियों के लाभ में गिरावट आने की आशंका से फिक्की के कारोबारी विश्वास सूचकांक में करीब तीन अंकों की गिरावट आई है।
फिक्की का सर्वे चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए किए गए फिक्की के कारोबारी विश्वास सर्वेक्षण में एक करोड़ रूपए से लेकर 20 हजार करोड़ रूपए का कारोबार करने वाली 311 कंपनियों ने भाग लिया। इस तिमाही में यह सूचकांक पिछले तिमाही में 74.8 अंक से नीचे उतरकर 71.9 अंक पर आ गया।
सर्वेक्षण में भाग लेने वाली अधिकांश कंपनियों ने कहा है कि लागत बढ़ने के बावजूद वे अपने उत्पादों की कीमतों में सस्ती निर्यातित वस्तुओं की चुनौतियों की वजह से बढ़ा नहीं पा रहे हैं। उनका कहना है कि ऎसी स्थिति में रिजर्व बैंक द्वारा फिर से प्रमुख दरों में वृद्धि किए जाने से उद्योग जगत पर विपरीत असर पडेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा और कड़ी हो जाएगी।
सर्वे में शामिल कंपनियां सर्वेक्षण में टेक्सटाइल, स्टील, कैमिकल एंड फर्टिलाइजर्स, तेल एवं गैस, ऑटो एवं ऑटो उपकरण, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रिक उपकरण, मशीनरी, रबड़, रबड़ उत्पाद, सीमेंट, रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुएं बनाने वाली कंपनियों, दवा कंपनियों, पेपर, धातु और वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियां शामिल है।
यह सर्वेक्षण चालू महीने में किया गया है। सर्वेक्षण में भाग लेने वाली कंपनियों में से 72 प्रतिशत ने कहा है कि बेंचमार्क प्रधान ब्याज दर प्रणाली से आधार दर प्रणाली के शुरू होने से ब्याज दरों के कम होने के बावजूद उसका लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है। इसमें शामिल 24 प्रतिशत बड़ी कंपनियों का मानना है कि आधार दर प्रणाली के लागू होने से उनके ऋण पर ब्याज दरों में वृद्धि होगी।
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