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2.5 लाख तक की आय हो कर मुक्त
Saturday, February 04, 2012, 23:30 hrs IST
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नई दिल्ली । उद्योग जगत ने सरकार से व्यक्तिगत आयकर देने वालों को और अधिक छूट देने का सुझाव दिया है। उद्योग जगत ने कहा है कि सालाना 2.5 लाख रूपए तक की आय करमुक्त होनी चाहिए तथा 30 प्रतिशत की उच्चतम दर आठ लाख के बजाय दस लाख रूपए की आय वालों पर लागू होनी चाहिए। उन्होंने आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए निवेश प्रोत्साहन भत्ता फिर शुरू करने की भी मांग की। फिक्की ने कहा है कि कंपनी कर में कोई छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए, जबकि एसोचैम ने इसमें कमी लाने का आग्रह किया है।


वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ शुक्रवार को हुई बजटपूर्व बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने निवेश में तेजी और आर्थिक गतिविधियों विस्तार के विषय में अपने सुझाव दिए गए। उद्योग संगठन फिक्की, एसोचैम, सीआईआई, फियो और एसईजेड एवं निर्यातोन्मुखी इकाइयों की निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष एवं प्रतिनिधि, आईटीसी अध्यक्ष वाई.सी. देवेश्वर और हिंदुस्तान यूनिलीवर के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ नितीन पंराजपे भी इस बैठक में उपस्थित थे।

निर्यातकों को जारी रहे ब्याज सहायता : फियो


फियो अध्यक्ष रफीक अहमद ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मझौली इकाइयों के लिए ब्याज दरें सात प्रतिशत पर सीमित रखने, जबकि अन्य के लिए 9 प्रतिशत रखे जाने का सुझाव दिया गया। हालांकि निर्यात के सभी क्षेत्रों को ब्याज सहायता कम से कम मार्च 2013 तक जारी रखने का आग्रह किया गया। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर ईओयू और एसईजेड यूनिट्स के पूर्व अध्यक्ष राजेश के संथालिया ने कहा उत्पाद एवं सीमा शुल्क दरें नहीं बढ़नी चाहिए। एसईजेड को पिछले बजट में मैट के दायरे में ला दिया गया था यह समाप्त होना चाहिए। सौर ऊर्जा मिशन के लिए धन की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।

मैट को तर्कसंगत बनाएं : फिक्की



फिक्की के अध्यक्ष आर.वी. कनोरिया ने कहा कि कोयला खदानों का निजीकरण और विदेशों में रखे कालेधन की वापसी के लिए एक बारगी माफी योजना लाने पर विचार करना चाहिए। सरकारी खजाने पर दबाव पर बढ़ते दबाव को देखते हुए कंपनी कर में कमी किए जाने की मांग नहीं की। पर उद्योग मंडल ने न्यूनतम वैकल्पिक कर "मैट" को तर्कसंगत बनाने का सुझाव देते हुए कहा कि इसकी दर कंपनियों पर लागू आयकर की दर के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।

जीएसटी जल्द लागू हो : सीआईआई


सीआईआई के अध्यक्ष वी. मुत्थुरमन ने कहा कि हमारा स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र पर जोर रहा है। इन क्षेत्रों को आधारभूत सुविधाओं का दर्जा दिए जाने का सुझाव दिया है। सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश में तेजी लाने, कौशल विकास बैंक बनाने और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को जल्द अमल में लाने का आग्रह किया गया।

ब्याज दरें कम करें : एसोचैम


उद्योगपतियों ने स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ-साथ विमानन, दूरसंचार क्षेत्र को भी आधारभूत क्षेत्र का दर्जा दिए जाने की मांग की। एसोचैम के निर्वाचित अध्यक्ष राजकुमार धूत ने ब्याज दरों में कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को रिजर्व बैंक को ब्याज दरों में कम से कम एक प्रतिशत कमी लाने की सलाह देनी चाहिए।
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