निजी समस्याएं, परिवार में परेशानी या कुछ और। अलगाव, दर्द या किसी करीबी या दोस्त के साथ हुई टे्रजेडी, आसान नहीं है इन मुश्किलों का सामना कर पाना। इन बातों पर दूसरों को समझाना उपदेश देना आसान है लेकिन जब खुद पर बीतती है तो ही जान पाते हैं कि दर्द कितना गहरा है। तकलीफ चेहरे से ही झलकने लगती है। बात आत्महत्या तक पहुंच जाती है। ऎसे मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। हाल ही हुए एक सर्वे की रिपोर्ट इस बारे में आश्चर्यजनक तथ्यों के बारे में खुलासा करती है कि हर साल दुनियाभर में करीब दस लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं। जबकि आत्महत्या का प्रयास करने वाले लोगों की संख्या दस से बीस लाख है। ज्यादातर लोगों के आत्महत्या करने की वजह सामाजिक परिस्थतियों का सामना नहीं कर पाना रही। सेलिब्रिटीज के आत्महत्या करने के मामलों में सामने आता है कि विशिष्ट होने के अहसास के चलते वे अपने आस-पास एक छk आवरण बना दुनिया से कट जाते हैं। ऎसे में प्रेम का नाटक कर करीब आने वाला भी मतलब निकल जाने पर किनारा कर लेता है तो एकाकीपन तथा खुद के छले जाने का अहसास व्यक्तित्व पर ऎसे हावी होता है कि इस तकलीफ का अंत उन्हें आत्महत्या में ही नजर आता है। हो सकता है कि हम जो समझ पा रहे हैं वह पूरी तरह से सच्चाई न हो लेकिन करीबी को किसी बात से परेशानी में देखकर खतरे को जरूर भांप लेते हैं। इन संकेतों को पहचानकर आने वाले समय में इस दौर से गुजर रहे किसी अपने किसी करीबी को आत्महत्या जैसा कदम उठाने से जरूर बचाया जा सकता है। लक्षण किसी परेशान हाल व्यक्ति जो मुश्किलों के दौर में है और आत्महत्या जैसा कदम उठा सकता है, इन संकेतों को अगर आप पहचान चुके हैं तो आपको उसे रोकने के यथासंभव प्रयास करने होंगे। द अमेरिकन एसोसिएशन ऑव सुसाइडोलॉजी ने इस बारे में कुछ अत्यावश्यक संकेतों के बारे में बताया है ताकि इन्हें पहचान कर किसी करीबी को आत्मघाती कदम उठाने से रोका जा सके। कुछ जरूरी संकेत... खतरे की घंटी मरने की धमकी या ऎसा ही कुछ और, यह लक्षण खतरे की घंटी है। वह मौत, मृत्यु या आत्म हत्या की बातें करने लगे या कहीं कुछ लिखे, दोस्त से मरने की बातें करें, तो यह आपके लिए संकेत चिन्ह हो सकते हैं खतरे को भांप पाने के लिए और इन्हें पहचानकर मामले में दखल दें। बुरा व्यवहार किसी के साथ बहुत ज्यादा बुरा व्यवहार भी खतरनाक साबित हो सकता है। अगर आप ऎसा कर रहे हैं तो रूक जाएं। आपकी अपरिपक्व सोच के परिणाम घातक हो सकते हैं। घेर लेते हैं दुख आत्महत्या के ज्यादातर मामलों में सामने आया है कि व्यक्ति अपने दर्द और परेशानी को हर समय ढोने लगता है, चाहे वह कहीं भी रहे इस विचार से मुक्त नहीं हो पाता। यह बात उसे अवसाद में ला देती है। 27 वर्षीय सुहानी कहती हैं, भाई के मरने के बाद मैं जीना ही नहीं चाहती थी। वह मेरे सबसे करीब था, मैं सब कुछ उसके साथ शेयर किया करती थी। लेह से लौटते समय एक दुर्घटना में उसकी मौत हो गई थी। तब मैं बीस की और वह 25 का था। उसकी मौत के बाद मैंने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था और बाहर आने के लिए मना कर दिया। मेरे करीबी दोस्त मेरे लिए वहां थे। सभी ने मुझे ऎसा न करने को कहा लेकिन मैं बहुत कन्फ्यूज्ड थी। मैंने अपनी कलाई काट ली थी और पापा ने मुझे बेहोशी की हालत में वहां से बाहर निकाला था। मुझे डॉक्टर के पास ले जाया गया। पेरेंट्स मुझे इस दौर से उबारना चाहते थे। मैंने दर्द को करीब से महसूस किया था लेकिन खुशियां भी तो होती हैं। आज मुझे अपने उस फैसले पर ताजुब्ब होता है। क्योंकि तस्वीर का दूसरा रूख खुशियों वाला भी तो है। चिंता यह आपकी खुशियों पर ग्रहण के समान है। चिंता के कारणों को तलाशें, समाधान के प्रयास करना बेहद जरूरी है। फंदे में फंसी जान मुश्किलों में आप देख नहीं पाते कि आखिर इस समस्या का सिरा और अंत है कहां। आप इस जाल में निरंतर उलझते चले जाते हैं और अवसाद की वजह से खुद को बाहर नहीं निकाल पाते। आशा चिंता का सबसे बड़ा कारण निराशाजनक स्थितियों का भी होना है जो आप खुद के भीतर ही पाते हैं। आशा की रोशनी आपको मुश्किल क्षणों से भी बाहर निकलने में मदद करती है जबकि निराशा ये सारे रास्ते बंद कर देती है। इसलिए सबसे पहले सोच में बदलाव लाएं। गुस्सा क्रोध में पूरी दुनिया दुश्मन नजर आने लगती है। ऎसे में खुद को इन परिस्थतियों से उबारकर बाहर निकलने की सारी कोशिशें खत्म कर आप खुद को ही खत्म करने पर आमादा हो जाते हैं। लापरवाही ज्यादा मुश्किलों से घिरने पर व्यक्ति को नुकसान की परवाह नहीं रह जाती। वह ज्यादा लापरवाह हो जाता है। इसलिए खुद को इस टै्रक पर जाने से रोक लें। मूड चेंज रूटीन जिंदगी में भी मूड में बदलाव आते रहते हैं और डिप्रेशन की हालत में नकारात्मक विचार हावी हो जाते हैं। ये बदलाव बार-बार देखें तो लक्षणों को तुरंत पहचाने कि आखिर माजरा क्या है। प्रोफेशनल हेल्प लें अगर आपके किसी करीबी में इस तरह के लक्षण नजर आते हैं तो समझ लें कि उसे तुरंत मदद की जरूरत है। मनोचिकित्सक पेशेंट को देखकर उसकी बातों से खतरे का अंदाजा ज्यादा सहज रूप से लगा पाते हैं। इसलिए पेशेंट को तुरंत डॉक्टरी परामर्श के लिए ले जाएं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक हर तीसरे सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या का प्रयास करता है। मनोवैज्ञानिक कारणों और परिवार पर पड़ने वाले सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों की वजह से छह व्यक्ति अपनी दुनिया उजाड़ बैठते हैं। ब्रेकअप, अलगाव, तलाक, दोस्त से मिले धोखे, आजादी का खात्मा, आदि आत्महत्या के कारणों खास वजह मानी जा सकती है। शहर के एक जाने-माने मनोचिकित्सक कहते हैं कि इलाज के लिए यहां आने वाले पेशेंट्स में से ज्यादातर अवसाद से बुरी तरह घिरे होते हैं। अगर आप उन्हें खुश रखने के प्रयास करें हिम्मत दें तो मुश्किल से बाहर निकाला जा सकता है। वह कहते हैं मैंने कई ऎसी महिलाओं का इलाज किया है जो आर्थिक रूप से मजबूत थीं लेकिन किन्हीं कारणों से जिंदगी में एकाकीपन अनुभव करने की वजह से अवसाद से घिरी थीं। ऎसे पेशेंट को सामाजिक सुरक्षा का अहसास कराकर इस परेशानी से बाहर निकाला जा सकता है।
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