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Saturday, 19 May, 2012
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देश की इकॉनॉमी
Wednesday, February 01, 2012, 09:10 hrs IST
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देश की सुपर बैंकर चंदा कोचर का ताल्लुक राजस्थान से है। वह जोधपुर में जन्मीं और जयपुर में पली-बढ़ी हैं। कॉलेज की पढ़ाई के लिए वह मुंबई चली गई, वहीं उन्होंने मैनेजमेंट की पढ़ाई की। बिजनैस स्कूलमेट दीपक कोचर से उन्होंने शादी की। 1984 में उन्होंने आईसीआईसीआई लिमिटेड में बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी, करिअर की शुरूआत की और आज आईसीआईसीआर्ई बैंक की एमडी और सीईओ हैं


वैश्विक मंदी के दौर में, एकमात्र भारत ऎसा देश है जो फल-फूल रहा है, इस बारे में आपकी क्या राय है?
भारत का घरेलू उपभोग बहुत मजबूत स्थिति में है और निवेश की जरूरतों की वजह से अर्थव्यवस्था निरंतर वृद्धि करती जा रही है। यही वजह है कि मंदी का असर हम पर ज्यादा नहीं पड़ा। आज जिस जगह पर हम हैं, वह विश्व के अन्य कई देशों के मुकाबले ज्यादा बेहतर है। कहने का मतलब है कि हम जैसा कर रहे हैं, उससे भी बेहतर कर सकते हैं।

देश की अर्थतंत्र को मजबूत बनाने के लिए बैंक किस तरह भूमिका निभाते हैं?
बैंक किसी भी देश की इकॉनॉमी को बदल सकते हैं। जब हमारा देश इंडस्ट्रीअल देश था, तब बैंक प्रोजेक्ट्स के लिए फंड मुहैया करवाती थी। ज्यों ही वैयक्तिक उपभोग शुरू हुआ, हाउसिंग लोन सेक्टर में बूम आया। बैंक ने यह संभव बनाया कि लोग घर के लिए ऋण ले सकें, सपने पूरे कर सकें। उपभोग और खर्च बढ़ा तो इकॉनॉमिक ग्रोथ भी बढ़ी। यह सब बैंक के जरिए हुआ जिसने इकॉनॉमी के लिए ईधन का काम किया।

बैंक की स्कीम वीमॅन फ्रेंडली होती हैं?
महिलाओं का एक अलग वर्ग होता है, जैसे यूथ और सीनियर सिटीजन का वर्ग होता है। इस वर्ग की अपनी जरूरतें होती हैं। उनकी उन जरूरतों को दिमाग में रखना होता है। हमारी वीमॅन फ्रेंडली स्कीम इन विशेष्ा बातों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

महिलाओं के लिए बैंकिंग में करिअर बनाने के लिए क्या स्कोप है
çस्त्रयों के लिए बैंकिंग बेहतर करिअर विकल्प है। किसी भी अन्य इंडस्ट्री की तुलना में बैंक इंडस्ट्री ज्यादा जेन्डर न्यूट्रल है, ऎसा मैंने पाया है। बस यह याद रखें कि बैंकिंग एक व्यवसाय है, जहां आपको कस्टमर की जरूरतों को समझना होता है। कस्टमर की जगह आपको खुद को रखकर महसूस करना होता है।

आज, बैंकिंग सेक्टर में महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी है। ऎसा क्या है जो महिलाएं इस क्षेत्र में इतना बेहतर काम कर पा रही हैं
जैसा कि मैं पहले ही कह चुकी हूं कि इस क्षेत्र में महिलाओं के साथ किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं होता है। यह सेक्टर लिंग-भेद से मुक्त है इसलिए इस क्षेत्र में महिलाओं की तरक्की की संभावना ज्यादा है। दूसरी वजह जो मुझे लगती है वो यह कि महिलाएं दूसरों के नजरिए को बहुत अच्छी तरह से समझ पाती हैं और जान पाती हैं कि दूसरों के लिए क्या बेहतर हो सकता है।

आप देश की टॉपमोस्ट बैंकर हैं, टॉप में बने रहने के लिए क्या प्रयास कर रही हैें?
कामयाबी के लिए कोई एक चीज जिम्मेदार नहीं होती, कई चीजें एकसाथ काम करती हैं। कड़ी मेहनत, काम करने की धुन या तत्परता, आधारभूत योग्यताएं, काम का माहौल और काम करने के अवसर आपकी पॉजिशन तय करते हैं। इसके साथ ही आपको अपने काम में निरंतर कुशल होते रहने की जरूरत होती है, इसका और कोई विकल्प नहीं है।

चंदा कोचर
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