टीना ने मुनीम से अंबानी बनने तक के सफर में अनेक उतार-चढ़ाव देखे। एक भाई और नौ बहनों में सबसे छोटी थीं टीना। इसलिए मुनीम परिवार में उन्हें लाड़-प्यार भी ज्यादा मिला और आजादी भी। बड़ी बहन भावना से उनकी खूब पटती थी। भावना मॉडलिंग क्षेत्र में थीं, इसलिए टीना को भी मॉडल बनने का शौक जगा। मिस टीन-एज प्रतियोगिता में मिली सफलता ने उनका हौसला और बढ़ा दिया। तभी उनके अंदर छिपी अभिनय प्रतिभा पर नजर पड़ गई देव आनंद की, जो उन दिनों अपने जीवन और फिल्मों से खाली हुई जगह को भरने के लिए किसी मासूम चेहरे की तलाश में थे। उनकी तलाश पूरी हुई टीना मुनीम के रूप में। देस-परदेस में टीना उनकी हीरोइन बनीं।
देस-परदेस के प्रदर्शन के बाद चारों ओर देव-टीना के प्रेम के चर्चे चल पड़े। इस रोमांस की लगातार खबरों ने टीना का मन खट्टा कर दिया और उन्हें अपने पुराने दोस्त संजय दत्त की बरबस याद आई। संजय के साथ उनकी दोस्ती और फिर इश्क की दास्तान तभी शुरू हो गई थी, जब ये दोनों स्कूल में पढ़ते थे। संजय के कॅरियर को वजनी शुरूआती देने के लिए टीना ने देव आनंद के कैम्प से नाता तोड़ लिया और सुनील दत्त की रॉकी की नायिका बनना स्वीकार कर लिया। वे फिल्म के निर्माण में पारिवारिक सदस्य की तरह हर-सम्भव सहयोग करने लगीं। संजय दत्त के प्रति टीना की निष्ठा इस कदर पक्की होती गई कि राजेंद्र कुमार के बेटे कुमार गौरव के साथ लव-स्टोरी और कमल हासन के साथ एलवी प्रसाद की एक दूजे के लिए जैसी फिल्मों के प्रस्तावों को भी टीना ने बेहिचक ठुकरा दिया। ये दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। लेकिन टीना को अपने फैसले पर कोई मलाल नहीं हुआ। वे तो हर कदम पर संजय के सफर में शामिल रहना चाहती थीं। इसी दौरान संजय दत्त नशे के ऎसे अंधेरे सफर पर चल पड़े, जहां लोगों की लाख कोशिशों के बावजूद वे लौट नहीं पाए। नतीजतन दोनों प्रेमियों के बीच दूरियां बढ़ती गई और अंतत: वे जुदा हो गए।
इसी बीच टीना के पिता का निधन हो गया और वे अकेलेपन और आध्यात्मिकता की ओर प्रवृत्त होने लगीं। छोटी-सी उम्र में वे इस तरह निराशा के अंधे कुएं में छलांग न लगा बैठें, यही चिंता सताने लगी मुनीम परिवार को। शायद यही वजह थी कि इन क्षणों में जब राजेश खन्ना ने टीना में रूचि दिखानी शुरू की, तो उन्हें प्रोत्साहित ही किया गया। किसी जमाने में सुपर-स्टार रहे राजेश खन्ना का पूरा मुनीम परिवार फैन रह चुका था। राजेश-टीना की जोड़ी वाली फिल्म सौतन और फिफ्टी-फिफ्टी को शानदार सफलता मिली और उनके पास निर्माताओं की कतार लग गई। जल्द ही दोनों में प्रगाढ़ सम्बंध कायम हो गए और वे एक साथ एक नए बंगले में लिव इन फ्रेंड बनकर रहने लगे। लेकिन तभी खोखले अंहकारों के बर्तन टकराने लगे। राजेश ने टीना की आजादी पर अंकुश लगाना शुरू कर दिया। वे चाहते थे कि आशीर्वाद के आंगन में कदम रखने से पहले टीना ओढ़ी हुई आधुनिकता का लबादा उतार फेंके और घरेलू नारी की तरह गुजराती संस्कारों का दामन थाम ले। टीना को इस व्यवहार में विरोधाभास नजर आने लगा। उनका राजेश खन्ना से मोहभंग हो गया और उन्होंने उनसे नाता तोड़ लिया।
भले उसे लम्बा इंतजार करना पड़ा इस घड़ी के लिए, मगर अब उसे असल खुशी मिलेगी, सुख का आनंद तभी है, जब मुश्किल से मिले...। यह कथन था सदाबहार अभिनेता देवआनंद का, जिन्होंने अपने जमाने की चर्चित नायिका टीना मुनीम के बारे में कहा था। गौरतलब है कि टीना आज देश के जाने-माने बिजनेस घराने की बहू और अनिल अंबानी की पत्नी हैं। कहते हैं सब्र का फल मीठा होता है। कम से कम टीना मुनीम के मामले में तो यह कहावत सच साबित हुई है। चार साल की उनकी प्रतीक्षा 2 फरवरी 1993 को पूरी हुई, जब धीरूभाई अंबानी के परिवार ने उन्हें बहू के रूप में स्वीकार किया।
इस प्रेम-प्रकरण के कारण टीना मुनीम का कॅरियर डांवाडोल हो गया। अपने लड़खड़ाते कॅरियर को बचाने की खातिर वे कामाग्नि जैसी सैक्सी फिल्में साइन करने की भूल कर बैठीं और अपनी अच्छी-भली इमेज पर बट्टा लगा लिया। निराशा और हताशा के इस दलदल से उन्हें उबारा अनिल अंबानी ने, जिनके साथ दाम्पत्य-जीवन के सुखद सपने संजोकर टीना ने फिल्मों को अलविदा कह दिया। उनका यह सपना चार साल के इंतजार के बाद पूरा हुआ। वे न सिर्फ अनिल अंबानी की पत्नी बनीं, बल्कि रिलायंस कम्पनी की मालकिन होने का दर्जा भी उन्हें मिल गया। -ठाकुरदास खत्री
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