जयपुर। अब सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजन से पूर्व कलेक्टर से अनुमति लेना जरूरी होगा। यदि कोई सामाजिक संस्था ऎसा नहीं करेगी, तो उस पर पांच हजार रूपए तक जुर्माना लगाने के अलावा संस्था का पंजीकरण भी निरस्त किया जा सकेगा। बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए महिला अधिकारिता विभाग के महिला व बाल विकास विभाग निदेशालय की ओर से राजस्थान सामूहिक विवाह नियमन व अनुदान नियम-1996 में हाल ही में संशोधन कर अधिसूचना जारी की गई है। अब नियमों के तहत संस्था को आयोजन से पहले हर जोड़े की आयु का प्रमाण और विवाह स्थल की पूर्ण जानकारी देनी होगी।
सामूहिक विवाह को प्रोत्साहन के लिए दी जाने वाली 2 लाख की अनुदान राशि को बढ़ाकर अब 10 लाख रूपए कर दिया है। संबंधित संस्था को जिला कलेक्टर को 15 दिन पहले सामूहिक विवाह सम्मेलन की अनुमति के लिए आवेदन जरूरी होगा।
ऎसा नहीं हुआ तो महिला अधिकारिता विभाग के राजस्थान सामूहिक विवाह नियमन व अनुदान नियम-2009 के तहत कार्रवाई हो सकेगी। इनमें संस्था पर एक से पांच हजार रू. का जुर्माना और भविष्य में उसे सामूहिक विवाह आयोजित करने के लिए अयोग्य घोषित किया जाना भी शामिल है।
जोड़े की आयु बतानी होगी
संशोधित नियम के तहत संस्था को प्रत्येक जोड़े की आयु के लिए प्रमाणिक विवरण और विवाह स्थल की पूर्ण जानकारी देनी होगी। वहीं सम्मेलन में भाग लेने वाले जोड़ों की संख्या 3 दिन पहले बतानी होगी। संस्था के पंजीयन व सभी जोड़ों की आयु व अन्य जानकारियों की जांच कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित कमेटी करेगी।
सुरक्षा सुविधा जरूरी
विवाह स्थल पर आकस्मिक परिस्थितियों से निबटने के लिए चिकित्सा, अग्निशमन व अन्य सुविधाएं होना अनिवार्य होगा। साथ ही संस्था को अनुमति मिलने पर संबंधित संस्थानों को सूचित करना होगा।
सामूहिक विवाह के लिए अनुदान
नए नियमों के अंतर्गत कम से कम 10 जोड़े और अधिक से अधिक 166 जोड़ों के लिए अनुदान का प्रावधान है। इनमें अनुदान प्रति जोड़ा 6 हजार रू. देय होगा। प्रति जोड़ा अनुदानित राशि में 25 प्रतिशत की राशि संस्था को विवाह आयोजन के रूप में दी जाएगी, जबकि 75 प्रतिशत राशि नव विवाहिता के नाम से डाकघर या अधिसूचित राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यूनतम तीन वर्ष की अवधि के लिए सावधि जमा कराई जाएगी।
इनका कहना है
सामूहिक विवाह सम्मेलन में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने और समाज में फैली कुरीतियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए राजस्थान सामूहिक विवाह अनुदान नियमन व अनुदान नियम 1996 में संशोधन किया गया है। इसका पालन नहीं करने वाली संस्था के खिलाफ उचित कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है। -एसके अग्रवाल, अतिरिक्त निदेशक, महिला अधिकारिता विभाग
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