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Tuesday, 07 September, 2010
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नई दोस्ती
Saturday, July 31, 2010, 10:47 hrs IST
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कहते हैं जोडे आसमान में बनते हैं, मगर हमारी फिल्मी दुनिया में जोडे शूटिंग के सेट पर फिल्मों के लिए बनते हैं। यदि वो जोड़ी हिट हो जाए, तो कई बार रील लाइफ जोडे रीयल लाइफ में भी उसे सार्थक कर लेते हैं। वैसे हिट -फ्लॉप का फार्मूला इन जोड़ों पर कम ही बैठता है। एक शूटिंग के सेट पर लंबे समय तक का साथ कई बार उनके रेपो, अंडरस्टैंडिंग व आपसी रिश्ते को एक अलग स्तर पर ले जाता है। कई बार सितारे इससे परेशानी में भी पड़ जाते हैं, तो कई बार सेट पर पनपी दोस्ती उन्हें राहत देने वाली भी होती है। अब नील नितिन मुकेश और दीपिका पादुकोण की नई जोड़ी को ही देख लीजिए। आजकल इनकी दोस्ती के चर्चे काफी आम हैं। रणबीर से ब्रेकअप के बाद दीपिका जहां अकेली थीं, वहीं नील भी अपनी गर्लफ्रैंड के अलगाव के बाद अकेले, तन्हा, उदास थे। यशराज बैनर की प्रदीप सरकार निर्देशित फिल्म लफंगे परिंदे में दोनों को न केवल चुनौतीपूर्ण भूमिका मिली, बल्कि एक-दूसरे को जानने-समझने का मौका भी मिला। साथ वक्त गुजारा...दोस्ती हो गई। ये इंडस्ट्री की नई दोस्ती है...बेहद पक्की दोस्ती...जो आसानी से टूटेगी नहीं। फिल्म प्रदर्शन के लिए तैयार है... फिल्म हिट होती है, तो दोनों को समान रूप से फायदा होगा...नहीं चलती, तो उस स्थिति में भी दोनों नुकसान में नहीं रहेंगे। हाल ही मुंबई में एफएम संवाददाता रेखा खान ने इस नई हॉट जोड़ी से आमने-सामने बात की। हर मुद्दे पर हुई बेबाक बातें... तो लीजिए पेश है हमारे सवाल, नील-दीपिका के जवाब....
सबसे पहले आप दोनों फिल्म लफंगे परिदे के बारे में कुछ बताइए?
नील: लफंगे परिंदे पर्सनली व प्रोफेशनली अपने सपनों को साकार करने की कहानी है। बस समस्या तब होती है, जब आप अपने ख्वाबों को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाते हैं। मैं इसमें नंदू नामक एक ऎसे स्ट्रीट फाइटर का रोल अदा कर रहा हूं, जो अंधी फाइट करता है। वह दिल से रोमांटिक है और बेहद महत्वाकांक्षी भी।
दीपिका: लफंगे परिंदे पांच लड़कों व दो लड़कियो की कहानी है, जो मुंबई की गलियों में रहते हैं। मैं इसमें पिंकी पालकर का चरित्र निभा रही हूं, जो अंधी है, मगर डांसर बनने के सपने संजोये हुए है। मैं इस चरित्र से काफी मेल खाती हूं, क्योंकि ये मेरी तरह काफी कॉन्फिडेंट है। पिंकी मरते दम तक हार न मानने का माद्दा रखती है।
अगर दुनिया में आपको कहीं और रहने का मौका मिले, तो आप कहां रहना चाहेंगे?
नील: ये आपको भले फैंटेसी लगे, मगर यदि मुझे ऎसा वरदान मिल जाए, तो मैं अपने दादू (लीजेंड गायक मुकेश) के साथ एक बार जरूर रहना चाहंूगा। मैं जब हुआ था, तो दादू नहीं रहे थे, मगर दादी के जरिय मैं उनके बेहद करीब रहा हंू। काश मैं उन्हें देख पाता, उनका प्यार दुलार हासिल कर पाता...।
दीपिका: मैं जबसे फिल्मों में आई हंू शूटिंग की व्यस्तता के कारण अपने होम टाउन बैंगलुरू जाने को तरस जाती हंू। मेरी दुनिया मेरे मम्मी-पापा हंै, लिहाजा मुझे जब भी मौका मिलेगा, मैं बैंगलुरू में अपने माता-पिता के पास ही रहना चाहंूगी।
रील लाइफ के यादगार पल...?
नील: कई यादगार अनुभव हैं कौन-सा बयान करूं। अब लफंगे परिंदे को ही लीजिए , मैंने इसमें कई खतरनाक स्टंट किए हैं, मगर मेरी पहली फिल्म जॉनी गद्दार के समय जब मुझे बाइक चलाने के लिए कहा गया, तो मैं काफी नर्वस था। दरअसल उस वक्त मुझे बाइक चलानी नहीं आती थी। मुझे याद है जब न्यूयॉर्क के लिए मुझे आदी (आदित्य चौपड़ा) का फोन आया था, तो मैं उनके ऑफिस से काफी दूर चर्चगेट में था और रास्ते में ट्रैफिक में फंस गया, तब आधा रास्ता कार में, आधा रिक्शे में और तकरीबन आधा घंटा मैं सड़क पर भागता हुआ गया ताकि आदी के ऑफिस में तयशुदा समय पर पहुंच सकूं। इसके अलावा जॉनी गद्दार की रिलीज के बाद एक बार जुहू में मेरी फीमेल फैंस ने मुझे घेर लिया और मेरे गालों को नोच डाला था।
दीपिका: एक अभिनेत्री के तौर पर सबसे यादगार पल तो लफंगे परिंदे के सेट पर का है,जब एक एक्टर सीक्वेंस में मुझे अलग-अलग तरह का मेकअप करना था। नील ने मेरा पूरा मेकअप किया था। मैं तो हैरान रह गयी कि नील इतना अच्छा मेकअप जानते हैं। उनके साथ काम करना बेहद यादगार था। सेट पर वे तब भी मौजूद होते थे, जब उनकी जरूरत नहीं होती थी। मुझे लगता है एक अभिनेत्री के तौर पर आपके लिए हर दिन नया व यादगार होता है। चांदनी चौक टु चाइना की शूटिंग के स्टंट के दौरान घंटों केवल पर लटके रहना भी मैं कभी नहीं भूल सकती।
एक अभिनेता-अभिनेत्री के तौर पर जिंदगी के मायने...?
नील: एक अभिनेता की जिंदगी जीते हुए मैं काफी खुश हूं। मुझे जब से होश आया, तभी से मैंने एक्टर बनने का सपना देखा और अपने उस सपने को साकार करने के लिए मेहनत की, संघर्ष किया। आज जब एक्टर बन गया हूं, तो अच्छा लगता है, मगर इसे मैं एक बड़ी जिम्मेदारी के तौर पर भी देखता हूं। मसलन, अपने दर्शकों व प्रशंसकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना... अपने परिवार की उम्मीदों को पूरा करना आदि। मैं लीजेंड गायक मुकेश का पोता हूं, तो मुझे अभिनेता के तौर पर उस विरासत का भी पूरा खयाल रखना पड़ता है।
दीपिका: एक अभिनेत्री की जिदंगी को जीना इतना आसान नहीं है, यह मैंने फिल्मों में आने के बाद जाना। जब मैं फिल्मों में नहीं आई थी और थियेटर में फिल्में देखने जाती थी, तो परदे पर हीरोइन को देखकर उन्हें महारानी समझा करती थी। लेकिन हीरोइन बनके के बाद मैंने जाना कि परदे पर जो कुछ दिखाया जाता है, उसके लिए व हीरोइन के रूतबे के लिए आपको कितनी मेहनत व सेक्रिफाइज करना पड़ता है। परिवार व रिश्तों से दूर हो जाना पड़ता है। मुझे याद है कि मुंबई आने के बाद मैं पूरे 2-3 साल तक अपने होम टाउन नहीं जा सकी थी।
पहला क्रश... कैसा लगता है
अब याद करके?
नील: मेरा पहला क्रश चौथी कक्षा में था। वो मेरी टीचर थीं। उनका रंग गुलाबी था और बाल लंबे... मैं तो क्लास में उन्हें देखता रहता था। आज जब भी वो याद आती हैं, तो मन ही मन शर्माकर रह जाता हूं।
दीपिका: (शर्माकर) मेरा पहला क्रश अपने स्कूल डेज में हुआ था और वे थे अर्जुन रामपाल। लिहाजा जब मुझे पता चला कि मेरी पहली ही फिल्म ओम शांति ओम में मैं अर्जुन रामपाल की पे्रमिका बनने वाली हूं, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
लिव-इन-रिलेशपशिप में कितना यकीन है?
नील: मुझे बड़ा रोचक लगता है कि दो लोग, जो प्यार में हैं और साथ रहकर एक-दूसरे को समझने की कोशिश कर रहे हैं। मैं निजी तौर लिव-इन-रिलेशनशिप के खिलाफ नहीं हूं। मुझे लगता कि ये प्यार का एविएशन है। आज जब हम लव, रोमांस, रिलेशनशिप, लव मैरिज को एक्सेप्ट कर सकते हैं, तो लिव-इन-रिलेशनशिप को क्यों नहीं। हां, व्यक्तिगत तौर पर मैं नहीं समझता कि मुझे ऎसा करने की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि मैं आपने परिवार को नहीं छोड़ सकता। मैं अपने प्यार पर उनकी सहमति की मुहर लगाना चाहूंगा मतलब तभी शादी करूंगा।
दीपिका: मुझे लगता है लिव-इन-रिलेशनशिप व्यक्ति की निजी पसंद पर निर्भर करता है। ये उन दो लोगों के बीच की बात है, जो प्यार में हैं और साथ रहना चाहते हैं। जहां तक मेरा अपना मानना है, तो मैं विवाह संस्था पर बेहद यकीन करती हूं। इसका सबसे बड़ा व खूबसूरत उदाहरण हैं मेरे मॉम-डैड।
जिंदगी का सबसे हताशा भरा वक्त...?
नील: मैं आपनी जिंदगी में दो बार बहुत ज्यादा हताश हो गया था, एक तो उस वक्त, जब पूरे डेढ़ साल तक के लिए जॉनी गद्दार की 25 प्रतिशत शूटिंग अटक गई थी। उस दौर में फाइनेंस के जुगाड़ में मैंने कितने ही ऑफिसों के चक्कर काटे,जूते घिसे...वाकई वो दौर बेहद हताशाजनक था मेरे लिए। इसके अलावा पिछले साल जब मेरी न्यू ब्राण्ड गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ और उसकी ऎसी-तैसी हो गई। बेहद हताश हुआ था... इतना दुख पहुंचा कि जोर-जोर से रोने लगा था।
दीपिका: मेरे लिए मेरे कॅरियर का सबसे बड़ा हताशाभरा वक्त था चांदनी चौक टु चाइना की असफलता। कहां फिल्म रिलीज के पहले मुझे लेडी अक्षय कुमार कहा जा रहा था और कहां फिल्म के रिलीज के बाद फिल्म को आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा। उस फिल्म के लिए मैंने इतनी मेहनत की थी कि मैं शारीरिक व मानसिक तौर पर काफी परिपक्व हो चुकी थी। वैसे मैं काफी कम हताश होती हंू...हमेशा पॉजिटिव रहती हूं।
कभी स्ट्रगल व रिजेक्शन का
सामना हुआ?
नील: बिलकुल। लोगों को लगता है कि मुकेशजी का पोता होने के नाते मेरे लिए रास्ता आसान हो गया होगा तो लोगों का ऎसा सोचना गलत है। फिल्मों में आने के लिए मैंने दो हजार चार सौ रूपए महीने की असिस्टेंटशिप की, तब मैं यश अंकल (यश चोपड़ा) का असिस्टेंट हुआ करता था। शुरू में मेरे हीरो बनने की बात पर लोग हंस देते थे। उन्हें लगता था कि गायक के पोते, बेटे को गायक ही बनना चाहिए। कई बार लोगों ने मेरे जरूरत से ज्यादा गोरा होने पर भी मजाक उड़ाया। 2-3 बार बतौर हीरो रिजेक्ट हुआ। बड़ी मुश्किल में "जॉनी गद्दार" में मौका मिला। फिर आधी से ज्यादा बनने के बाद आर्थिक कारणों के चलते फिल्म लटक गई। लगता था कि शायद अब हीरो नहीं बन पाऊंगा।
दीपिका: मेेरे लिए संघर्ष नील की तरह फिजिकल, फाइनेंशियल कम, मेंटली ज्यादा था। मैं एक बेहद ही संरक्षित परिवार से हंू,अत: कॅरियर के आरंभिक दौर में अकेले रहने का संघर्ष मेरे लिए बड़ा था। बर्थडे, फेस्टिवल पर घर की बहुत याद आती थी। इसके अलावा जहां तक रिजेक्शन की बात है, तो पहली फिल्म सुपरहिट रही, मगर उसके बाद जब चांदनी चौक टु चाइना व कार्तिक कालिंग कार्तिक फ्लॉप हुई, तो वो दर्शकों की ओर से सीधा रिएक्शन था, जो मुझे बुरा लगा। मैं प्यार में भी रिजेक्ट हुई हंू, जो बहुत भारी था।
आपकी नजरों में रिश्ते-नाते?
नील: रिलेशनशिप में होना आपको जिंदगी में एक अलग तरह की हाइप देता है। जरूरी है कि कोई आपको चाहने वाला, केयर करने वाला व इंतजार करने वाला है। आपके पास कितना भी नाम-दाम व शोहरत हो, मगर यदि प्यार न हो तो जिंदगी निरर्थक है। ये बात सिर्फ गर्लफ्रैंड पर ही लागू नहीं होती... पारिवारिक रिलेशनशिप भी बेहतर जिंदगी के लिए बेहद जरूरी होती है।
दीपिका: हां, इस मामले में मैं नील की बातों से सौ फीसदी सहमत हूं। एक इनसान के लिए जिस तरह हवा, पानी, खाना जरूरी है, उसी तरह एक प्यारभरी रिलेशनशिप भी जरूरी है। इससे आपको अपने होने की सार्थकता का अहसास होता है। जिंदगी जीने के लिए अलग-अलग स्तर के रिश्ते जरूरी होते हैं। ऎसे में आपका लो फेज कट जाता है। आपका परिवार आपके लिए सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम होता है।
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