Daily News
Tuesday, 07 February, 2012
 |   |   |   |   |   |   |   |   |   |   | 
पुण्य करने पर भी मिली उल्लू योनि
Friday, July 30, 2010, 11:48 hrs IST
Email Print Comment min  max | Bookmark and Share
राजा भुवनेश्वर ने अनेक अश्वमेध और वाजपेय यज्ञ कराए थे। उन्हें अहंकार हो गया कि पृथ्वी पर उनसे बड़ा धर्मात्मा और कोई नहीं है। उन्होंने राज्य में घोषणा करा दी कि यज्ञ होम करके ही पूजा-उपासना की जा सकती है। जो इस आज्ञा का पालन नहीं करेगा, उसे दंड दिया जाएगा। उनके राज्य में हरिमित्र नामक एक पहुंचे हुए भक्त रहते थे। एक दिन नदी के तट पर जब वह वीणा पर संकीर्तन कर रहे थे, तो राजा के दूत ने उन्हें देख लिया।
उसने राजा से शिकायत कर दी कि एक ब्राह्मण यज्ञ होम करने की जगह मूर्ति के सामने नाच-गाकर भगवान को रिझाने का प्रयास कर रहा है। अहंकार में डूबे राजा ने हरिमित्र को पकड़कर दरबार में बुलवाया और पूछा, "तुम वेदों के अनुसार यज्ञ-हवन न करके मनमाने ढंग से कीर्तन द्वारा पूजा क्यों कर रहे हो?" हरिमित्र ने उत्तर दिया, "राजन, मैं वेदशास्त्रों के गूढ़ रहस्यों को नहीं समझ सकता। भगवान की मूर्ति के सामने नाच-गाकर उनके नाम का उच्चारण करने से मुझे परम शांति मिलती है।" इस उत्तर से राजा संतुष्ट नहीं हुआ और उसने उन्हें राज्य से निकल जाने का आदेश दिया। कुछ दिनों बाद राजा भुवनेश्वर की मृत्यु हो गई। यमराज ने उनके कर्मो का खाता देखकर उन्हें उल्लू की योनि में भेजने का आदेश दिया। राजा ने सकपकाकर धर्मराज से पूछा, "मैंने जीवन में असंख्य अश्वमेध यज्ञ किए हैं। प्रजा को धर्मशास्त्रों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। ऎसा फिर भला कौन सा पाप किया है, जो मुझे इस योनि में भेजा जा रहा है?" धर्मराज ने राजा को हरिमित्र वाली घटना की याद दिलाते हुए कहा, "अहंकार और मनमाने व्यवहार के कारण ही तुम्हारे तमाम पुण्य क्षीण हो गए हैं। इसलिए तुम्हें उल्लू योनि में भेजा जा रहा है।" राजा समझ गया कि अहंकार पतन का कारण बनता है।
More Stories Top News
vyavahar news कर्तव्यनिष्ठा
vyavahar news बुद्धि का बल
vyavahar news सरलता का महत्व
vyavahar news महानता के लक्षण
vyavahar news प्रार्थना की ताकत
vyavahar news सुकरात की सीख
vyavahar news मानव कल्याण
vyavahar news श्रम का महत्व
vyavahar news कंजूस गीदड़
vyavahar news सेवा का महत्व
Copyright © Daily News. All rights reserved.