जयपुर । वाह! ट्रैफिक पुलिस। आम आदमी का मामला होता तो चालान तो करते ही साथ में कार भी जब्त कर लेते, लेकिन मामला काले कोट से जुड़ा था, जिसके चलते शुक्रवार को जयपुर ट्रैफिक पुलिस एक वकील के आगे नतमस्तक हो गई और यातायात नियमों की खिलाफत होने के बाद भी उसे बिना चालान के छोड़ दिया। इस घटना को लेकर ट्रैफिक पुलिस के निचले तबके में काफी रोष्ा है।
हुआ यूं कि शुक्रवार शाम करीब पांच बजे हाईकोर्ट का एक वकील कार लेकर एमआई रोड पर पांचबत्ती स्थित एक आईसक्रीम पार्लर पहुंचा। वकील ने अपनी कार व्यस्ततम एमआई रोड पर नो-पार्किंग में खड़ी की और पार्लर पर चला गया। इसी दौरान टै्रफिक पुलिस की क्रेन आई और नो-पार्किंग में खड़ी वकील की कार को उठाने लगी। इस पर वह दौड़कर क्रेन पर चढ़ गया और जमकर हंगामा किया। वकील ने खुद को डीजीपी का दोस्त बताते हुए मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस के एक एसआई को वर्दी उतरवाने तक की धमकी दे डाली। वकील ने करीब आधे घंटे तक उत्पात मचाए रखा। यातायात नियमों की खिलाफत होने और ट्रैफिक पुलिस ने अपनी भद पिटवाने के बाद आला अधिकारियों के निर्देश पर वकील की कार के सिर्फ नंबर नोट किए और बिना चालान के ही छोड़ा। अब अपनी लाज बचाने के लिए ट्रैफिक पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि हमने पूरे मामले की वीडियो रिकॉर्डिग करवा ली है, जिसे देखकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आश्वासन के बाद हड़ताल स्थगित
जयपुर। पुलिस की कथित ज्यादती के कारण आत्महत्या करने वाले वकील को मुआवजा देने समेत अन्य मांगों को लेकर 11 जनवरी से हड़ताल पर चल रहे वकीलों ने शुक्रवार को हड़ताल फिलहाल स्थगित कर दी है। मुख्यमंत्री की ओर से मृतक मुरलीधर यादव के परिजनों को अंतरिम सहायता के तौर पर 5 लाख रूपए देने आदेश होने, एक आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने व वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापिस लेने के मुद्दे पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के आश्वासन पर हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया गया। गुरूवार को राजभवन में आयोजित एटहोम पार्टी में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष करणपाल सिंह को यह आश्वासन दिया था।
सिर्फ स्थगित की है खत्म नहीं
दी बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष राममनोहर शर्मा व महासचिव राकेश शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से 5 लाख रूपए की अंतरिम सहायता देने पर फिलहाल हड़ताल स्थगित की है। यदि सीबीआई अनुसंधान में मृतक का पुलिस प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या करने के तथ्य साबित हो जाते हैं तो एक आश्रित को नौकरी देने की मांग पूरी करवाने की कोशिश करेंगे। इससे पहले हाईकोर्ट में एडवोकेट संजय पारीक व मुरलीधर यादव की असामयिक मृत्यु पर कोर्ट नंबर एक में रैफरेंस रखा गया। इसमें हाईकोर्ट की ओर से न्यायाधीश अजय रस्तौगी ने और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष करणपाल सिंह ने शोक प्रस्ताव पढ़ा। इसके बाद सभी अदालतों ने न्यायिक कार्य स्थगित कर दिया।
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