जयपुर । सांगानेर एयरपोर्ट पर संचालित फ्लाइंग कॉलेज में ट्रेनिंग के दौरान भ्रष्टाचार का पता चला है। 22 घंटे के उड़ान का प्रशिक्षण देकर ही एक युवती को 169 घंटे की उड़ान का प्रमाण-पत्र जारी कर दिया। यही नहीं लॉग बुक में भी खानापूर्ति कर दी गई। शिकायत पर एसीबी ने जांच की और गड़बड़ी के आरोप में कॉलेज के चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और उनके सहायक को गिरफ्तार कर लिया है।
एसीबी के आईजी उमेश मिश्र ने बताया कि नागरिक उड्डयन महानिदेशक नई दिल्ली के अधीन देशभर में हवाई अaों पर कॉमर्शियल पॉयलेट की ट्रेनिंग दी जाती है। सांगानेर एयरपोर्ट पर ऎसे ही फ्लाइंग कॉलेज में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही निधि वशिष्ठ ने मात्र 22 घंटे ही उड़ान का प्रशिक्षण प्राप्त किया और उसे 169 घंटे की उड़ान का प्रमाण-पत्र कॉलेज से जारी कर दिया गया।
शिकायत मिलने पर एसीबी ने जांच की तो पता चला कि कॉलेज के चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर सुभाष विजयवर्गीय और उनके सहायक महेन्द्र कुमार ने 169 घंटे उड़ान की फर्जी लॉग बुक भर दी। इसी तरह क्रॉस कंट्री उड़ान के रिकॉर्ड में भी हेर फेर की गई थी। दोनों अभियुक्तों से पूछताछ की जा रही है और इसमें अन्य कई खुलासे होने की आशंका है।
200 घंटे के बाद पायलट
नियमानुसार कॉमर्शियल पायलट का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे व्यक्ति को लाइसेंस के लिए कम से कम 200 घंटे की उड़ान का प्रशिक्षण अनिवार्य है। एक घंटे के उड़ान प्रशिक्षण का 2303 रूपए शुल्क फ्लाइंग कॉलेज द्वारा वसूला जाता है।
खराब विमान कागजों में हिसार उड़ा
गड़बड़ी की इंतहा तो तब हो गई जब 23 सितंबर 2007 को निधि वशिष्ठ द्वारा जयपुर से हिसार और हिसार से जयपुर एयरपोर्ट की शेषना विमान से क्रॉस कंट्री उड़ान लॉग बुक में भर दी गई। इसमें जयपुर फ्लाइंग कॉलेज के महेन्द्र सिंह और हिसार फ्लाइंग कॉलेज के एमएस बेनीवाल के हस्ताक्षर हैं जबकि फ्लाइंग कॉलेज के रिकॉर्ड के मुताबिक 23 सितंबर 07 को शेषना विमान मरम्मत के लिए वर्कशॉप में था।
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