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कॉलेज खोलना बच्चों का खेल!
Monday, July 26, 2010, 00:02 hrs IST
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जयपुर । तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से हाल ही 46 तकनीकी शिक्षा कॉलेजों को स्थापना के लिए हरी झंडी दिखाई गई है। इस सूची में तीन कॉलेजों की संचालक समितियों के सचिव तकनीकी शिक्षा मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय के वैयक्तिक सचिव शंकर लाल कुमावत का बेटा रमेश चंद्र कुमावत है। इन कॉलेजों की सूची को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), दिल्ली से मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।

इन तीन कॉलेजों के लिए दो समितियों के माध्यम से आवेदन किया गया है। कॉलेजों की सूची में समितियों के पते के रूप में मंत्री मालवीय के सचिव कुमावत के घर (दो प्लॉट 71 व 72, महादेव नगर-नंदपुरी, हवा सड़क) को दर्ज करवाया गया है।

इन तीनों कॉलेजों के लिए जिन दो समितियों के नाम से आवेदन किया गया है उनमें से एक का नाम आदित्य मानव सेवा संस्थान है और दूसरी समिति का नाम गुरूकुल शिक्षा सेवा समिति है। इन दोनों समितियों ने चौमूं (जयपुर) क्षेत्र में कॉलेजों के लिए आवेदन किया है। मंत्री मालवीय के सचिव कुमावत मूलत: चौमूं के ही रहने वाले हैं।

पहले भी विवादों में रहे कुमावत

* अपने हस्ताक्षरों से उच्चाधिकारियों (प्रमुख शासन सचिव स्तरीय) को विभिन्न आदेश जारी करना। आदेशों में खुद को सूचित करने के निर्देश।
* मंत्री मालवीय के ऑफिस में एक-एक दिन में 120-125 चाय-कॉफी के बिल उठाए गए। बिलों को कुमावत ने हस्ताक्षर कर प्रमाणित किए। बिलों पर मीटिंग के लिए लिखा गया, जबकि मालवीय के ऑफिस में इतने लोगों की मीटिंग हुई ही नहीं। ऎसा एक दिन नहीं बल्कि कई बार किया गया।

* कुमावत के बेटे अशोक कुमावत (एमबीए) को तकनीकी शिक्षा विभाग के तहत संचालित राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, अजमेर में संविदा पर व्याख्याता नियुक्त किया गया। इस नियुक्ति के लिए सिर्फ अशोक को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया।

मंत्री मालवीय से बातचीत

आपके सचिव कुमावत के बेटे के नाम से संचालित समितियों को कॉलेज आवंटित किए जा रहे हैं?
देखिए, कॉलेज संचालन समिति में और भी कई लोग हैं। कॉलेज सामूहिक रूप से समिति को दिया जाता है, किसी व्यक्ति विशेष को तो दिया नहीं जाता।
लेकिन एक नहीं बल्कि तीन-तीन कॉलेज... इन्हीं समितियों पर इतनी मेहरबानी क्यों?

मेहरबानी जैसा कुछ नहीं है।

लेकिन आपके विभाग में वे आपके पीए हैं। कभी उनके एक बेटे (अशोक कुमावत) को बिना विज्ञापन विभागीय कॉलेज में व्याख्याता के रूप में नियुक्ति दी जाती है और कभी दूसरे बेटे के नाम पर कॉलेज आवंटित किया जाता है। कॉलेज भी एक नहीं तीन-तीन?
- आप किसी एक आदमी के पीछे पूरे विभाग को मत घसीटिए।

गड़बड़ी की आशंका क्यों?

विभाग की ओर से इन कॉलेजों को हरी झंडी दिखाते समय यह भी नहीं देखा गया कि तीनों कॉलेजों की समितियों को एक ही पते से दिखाया है। पता भी विभाग में प्रभावशाली पद पर बैठे व्यक्ति का है और समितियों में संबंधित व्यक्ति का बेटा भी शामिल है।

मंत्री मालवीय बोले-तीन-तीन कॉलेज देना इन समितियों पर मेहरबानी नहीं। कॉलेज सामूहिक रूप से समिति को दिया जाता है किसी व्यक्ति विशेष को नहीं।

कॉलेजों की समितियों में मेरा बेटा सचिव है और समितियों के पते के रूप में मेरे घर का पता दर्ज है। मेरा इससे सीधे-सीधे कोई वास्ता नहीं है। मेरे बेटे का स्वतंत्र कामकाज है। - शंकर लाल कुमावत, वैयक्तिक सचिव, तकनीकी शिक्षा मंत्री (सचिवालय)
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