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जीत से पहले सीखो हारना
Sunday, July 25, 2010, 10:52 hrs IST
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सौ मीटर दौड़ के ओलम्पिक और विश्व रिकॉर्डधारी बोल्ट की चोट के बाद ट्रैक पर वापसी के कारण उनकी क्षमताओं को लेकर तरह—तरह के कयास लगाए जा रहे थे। कई खेल समीक्षक यह मान रहे थे कि अपने हमवतन पावेल से बोल्ट को कड़ी चुनौती मिलेगी और वे "पावेल" बोल्ट की सल्तनत में सेंध लगा सकते है। बोल्ट ने 9.84 सैकण्ड के अंतराल में पूरे दमखम और जोशोखरोश के साथ दौड़ लगाते हुए सभी अटकलों पर विराम लगा दिया। खेलों में एथलेटिक्स स्पर्घाएं सही मायनों में मानवीय ताकत, दमखम और महारत की अग्नि परीक्षा लेती हैं। एथलेटिक्स में पुरूष्ाों की सौ मीटर की दौड़ वह मुकाम है, जिसके विजेता को "दुनिया के सबसे तेज धावक" व "मानवों में महामानव" की उपमा से नवाजा जाता है। जमैका के 23 वष्ाीüय उसेन बोल्ट इन दिनों इस अद्वितीय सल्तनत के सरताज और पृथ्वी के सबसे ताकतवर मानव के रूप में सभी की आंखों के तारे बने हुए हैं। ओलम्पिक और विश्व एथलेटिक्स में नए आलमी कीर्तिमान के साथ शीष्ाü पर काबिज होना और अपने रूतबे को अनवरत कायम रख, हर बार उत्कृष्ट प्रदर्शन कोई हंसी खेल नहीं है, लेकिन बोल्ट इस प्रतिष्ठित स्पर्घा में बुलंदियों पर एकछत्र राज कर रहे हंै।

पेरिस में डायमंड लीग से पूर्व ब्रुसेल्स में उसेन बोल्ट ने अपनी सतत सफलता के जो राज बताए, वे सभी के लिए गांठ बांधने लायक हंै। चोट से उबरने के बाद पहली बार ट्रैक पर उतर रहे बोल्ट के समक्ष हमवतन असाफा पावेल की मजबूत चुनौती थी। इसके मद्देनजर पावेल के विरूद्ध उनकी हार की आशंकाओं को लेकर पत्रकारों ने सवाल किया तो उन्होंने जवाब से दुनिया को अपना कायल बना दिया। उनका कहना था "मुझे किसी के हाथों हार जाने का कोई डर नहीं है। मैंने ग्लेन मिल्स के साथ प्रशिक्षण की शुरूआत में जीत से पहले हार का सबक सीखा है। जीवन में सफलता के पाठ से पहले आपको यह जानना जरूरी है कि हार कैसे होती है। अत: मेरे मन में हार को लेकर कोई चिंता नहीं है, मैं जानता हूं कि हार क्या होती है। मैं हारना नहीं चाहता, फिर भी यदि मैं हारता हूं तो मैं तत्काल अपनी कमियों का पता लगाकर उन्हें दूर करने में जुट जाऊंगा।

लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि जीत मेरी ही होगी।" बोल्ट के श्रीमुख से निकले इन शब्दों के जेहन में सफलता का माधुर्य छिपा था। बोल्ट द्वारा उलीचे गए कामयाबी के इस मर्म को जानकर सभी को लगा कि वाकई में पावेल तो क्या हकीकत के धरातल पर कोई भी चुनौती उनके हिमालयी इरादों को डिगा न सकेगी। बोल्ट पेरिस में सफलता का झंडा गाड़कर इस विश्वास पर बखूबी खरे उतरे हैं।

फड़कती भुजाओं और गगनचुम्बी हौसले के साथ छ: फीट पांच इंच की लम्बी कद—काठी वाले बोल्ट को फर्राटा भरते देखना बड़ा रोमांचक होता है। हवाओं से बात करना, पलक झपकते ही आंखों से ओझल होना या बिजली सी गति जैसे मुहावरे वैसे तो कई संदर्भों में प्रयुक्त किए जाते हंै, लेकिन उसेन बोल्ट को एथलेटिक्स के ट्रैक पर देख यंू लगता है गोया ये उपमाएं उनके लिए ही गढ़ी गई हों। उनके फर्राटों से ट्रैक पर जलजला पैदा होता है और वे पलक झपकते ही सौ मीटर की दूरी बिजली की रफ्तार से पार कर लेते हैं।

वष्ाü 2008 में बीजिंग ओलम्पिक में उन्होंने मात्र 9.69 सैकण्ड में सौ मीटर तथा 19.30 सैकण्ड में दौ सौ मीटर की स्पधार्ओं में विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीतकर चौंकाने वाला प्रदर्शन किया था। गत वष्ाü बर्लिन में विश्व एथलेटिक्स स्पर्घा में उनका जादू फिर सिर चढ़कर बोला। सौ मीटर में 9.58 सैकण्ड और दो सौ मीटर में 19.19 सैकण्ड के समय के साथ स्वर्णिम कामयाबियां रिकॉर्ड बुक में उनके दो नए विश्व कीर्तिमानों के साथ दर्ज हो गइंü। बीजिंग में उन्होंने श्रेष्ठता के जिस मंजर का प्रदर्शन किया, वह आज भी लोगों के दिलों में कैद है। मात्र नौ सैकण्ड और दसवें सैकण्ड के 69वां अंश का वक्त गुजरा था और उन्होंने अपने ही विश्व रिकॉर्ड में सुधारकर ओलम्पिक चैंपियन होने का गौरव अर्जित कर लिया। यह समय कईयों के लिए जम्हाई लेने या पलक झपकाने के लिए भी नाकाफी होता होगा, मगर बोल्ट ने इस अल्पकाल में सौ मीटर के पार पहुंचकर निर्विवाद विश्व श्रेष्ठ हो गए।

यूसेन बोल्ट की क्षमताओं से वाकिफ जानकार मानते हंै कि उनमें सौ मीटर के विश्व रिकॉर्ड को और बड़े अंतर से बौना साबित कर ट्रैक पर बिजलियों के कौंधने का एहसास जगाने की और सम्भावनाएं निहित हैं। वे स्पर्घा में अपने प्रतिद्वंद्वियों के विरूद्ध एक लिहाज से श्रेष्ठता के चरम को छुए बगैर ही मैदान मार लेते हैं।

मनमोहन हर्ष
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