वह अब सिर्फ अभिनेता ही नहीं, नवाब की उपाधि से भी नवाजे गए हैं। पिता के निधन के बाद उन्हें यह नई जिम्मेदारी भी संभालनी है। पिता का जिक्र चलने पर उनकी आंखें नम हो जाती हैं। इसी के साथ सैफ इन दिनों अपनी नई फिल्म एजेंट विनोद के प्रमोशन की तैयारी भी कर रहे हंै। करीब ढाई साल की अवधि में तैयार अपनी होम प्रोडक्शन की इस फिल्म को लेकर वह बहुत उत्साहित हैं।
लव आज कल के बाद से वह अपने होम प्रोडक्शन से लगातार फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं। 13 साल के कॅरियर में करीब 40 फिल्मों में काम करने वाले सैफ ने इधर फिल्में करने के मामले में काफी सुस्ती बरती है। आरक्षण के बाद एंजेट विनोद उनकी अगली रिलीज होगी। उनकी दो अन्य फिल्म होमी अडजानिया की कॉकटेल और अब्बास-मस्तान की रेस-2 का निर्माण फिलहाल शुरूआती दौर में है। एक ताजा मुलाकात के दौरान वह फिल्म एजेट विनोद के बारे में ही ज्यादा बात करना पसंद करते हैं, मगर प्रेयसी करीना से सम्बंधित सवालों का जवाब भी वह पूरे मूड में देते हैं... कैसी फिल्म है एजेंट विनोद ? मुझे ऎसा लगता है कि एक्शन-एडवेंचर से भरपूर यह फिल्म अच्छी बन गई है। इसका जो अंतिम रूप सामने आया है, उसे लेकर मैं काफी उत्साहित हूं। बहुत दिनों से लार्जर देन लाइफ किरदार के साथ एक एडवेंचर थ्रिलर बनाने की बात बहुत सारे लोगों के जेहन में थी, बहुत सारे खयाल आने के बावजूद कुछ तकनीकी दिक्कतों के चलते इसे अंजाम नहीं दिया जा सका था। अब सिनेमा बहुत आगे जा चुका है, इस तरह की फिल्मों के निर्माण में कोई बाधा नहीं है। विदेशी टेक्नीशियन की सेवाएं आपको आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
मैं आज भी अपने उस बयान पर कायम हूं। दरअसल कई बार आपको परिस्थितियों के साथ समझौता भी करना पड़ता है। अब जैसे कि मेरी फिल्म एजेंट विनोद की ज्यादातर शूटिंग मोरक्को और पूर्वी यूरोप में हुई है। यहां से वहां पूरे साज-समान और टेक्नीशियन को साथ लेकर ले जाने में एक निर्माता को बहुत दिक्कत और अतिरिक्त खर्चे का सामना करना पड़ता है। यदि उन्हें ठीक तरह से समझाया जाए, तो वहां भी बहुत खूबसूरती के साथ एक्शन सीन फिल्माए जा सकते हैं। हमने भी वही किया।
इन दिनों हिंदी फिल्मों के कई हीरो सुपर हीरो बन रहे हैं, क्या आपका भी वैसा कुछ इरादा है ? मैं इस बात से इनकार नहीं करूंगा। मैं भी सुपर हीरो बनना चाहता हूं। इसकी एक बड़ी वजह है बचपन से ही सुपर हीरोवाले कॉमिक्स पढ़ना मुझे बहुत पसंद था। मेरे प्रिय कॉमिक्स कैरेक्टर हैं वॉल्वराइन और बैटमैन, इसलिए मैं उनकी तरह का ही कोई रूप लेना चाहता हूं। एजेंट विनोद का मेरा किरदार भी काफी हद तक वैसा ही है। मानव होने के बावजूद भी वह एक सुपर हीरो की तरह काम करता है।
क्या आपने अपनी अगली फिल्म के लिए एक फारसी कॉमिक स्ट्रिप के राइट्स खरीदे हैं? हां, लेकिन अभी इस कैरेक्टर का नाम मैं आपको नहीं बता पाऊंगा। अभी भी इसका कुछ पेपर वर्क बाकी है। थोड़ा इंतजार कीजिए, मैं बहुत जल्द आपको बताऊंगा कि मैं यह कब और किसके साथ शुरू करूंगा। विदेशी कॉमिक स्ट्रिप के राइट्स खरीदने के बावजूद यह पूरी तरह से मसाला फिल्म होगी। यहां तक कि जो राइट्स हमने खरीदे हैं, उसका मुख्य चरित्र भी एक लार्जर देन लाइफ होगा। मुझे लगता है वह कैरेक्टर बहुत अच्छी तरह से हिंदी फिल्मों के साथ घुल-मिल जाएगा।
ऎसा भी सुनने को मिला है कि आप मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी का सीक्वल भी बनाने वाले हैं? नहीं, मुझसे एक बार सिर्फ यह पूछा गया था कि क्या मैं इसका सीक्वल बनाना चाहता हूं। मैंने सिर्फ इतना ही कहा था कि क्यों नहीं। अब मैं साफ कर देना चाहता हूं कि मेरा ऎसा कोई इरादा नहीं है।
13 साल के फिल्म कॅरियर में आपके अंदर कई बदलाव आए हैं? बदलाव सिर्फ अभिनय के स्तर पर आया है। अब मैं थोड़ा बहुत अभिनय करना सीख गया हूं, इसलिए अपनी हर फिल्म को लेकर मैं बहुत सीरियस हूं।
यानी आपके व्यक्तित्व में आया संजीदापन आपके अभिनय में आई मैच्योरिटी की देन है? काफी हद तक आपकी बात सही है। अभिनय में मेरे आने की एकमात्र वजह मेरी मां हैं। शुरू-शुरू में मेरा कोई लक्ष्य नहीं था, इसलिए जैसी भी फिल्में मिलीं, करता चला गया। शुरू में मैं मौज-मस्ती के अंदाज में काम करता था, शायद इस वजह से भी बड़े मेकर मुझे अभिनेता मानने के लिए तैयार नहीं थे।
क्या आपको पता था कि आप एक बेहद रचनात्मक क्षेत्र में कदम रख रहे हैं ? एक तो उस समय उम्र बहुत कम थी, फिर मैं विदेश से शिक्षा लेकर जब मुंबई आया, तो बिल्कुल अकेला था। मौज-मस्ती की तरफ मेरा ध्यान ज्यादा था। सचमुच जीवन को गंभीरतापूर्वक नहीं लिया था। इसी दौरान शादी हुई और जीवन में एक परिवर्तन आया। तभी मुुझे ऎसा लगा कि अब जीवनशैली को बदलना पड़ेगा। फरहान अख्तर की फिल्म दिल चाहता है के बाद मुझे ऎसा लगा कि मैं जिस उद्देश्य से फिल्मों में आया हूं,उसका सही रास्ता यहीं से शुरू होता है।
करीना के साथ अपने आत्मीय सम्बंधों के बारे में क्या कहेंगे? बेबो मुझसे उम्र में छोटी होने के बावजूद मुझसे बहुत ज्यादा मैच्योर है। मेरे अंदर जो भी पॉजिटिव चेंज आया है, उसका सारा श्रेय बेबो का जाता है। एक बात कहूंगा, वह मेरी तरह जुनूनी नहीं है। मैं अपने प्रति उसके लगाव को जरा भी कम नहीं कहूंगा, लेकिन वह मेरी तरह प्यार में डूबी नहीं रहती है। अपना कॅरियर, कमिटमेंट और फैमिली उसकी प्रायोरिटी है। वह डिस्टेंस मेंटेन करना जानती है।
-असीम सी.
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